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Elephant Terror In Gumla: हाथी ने दुधमुंहे को कुचलकर मार डाला, आखिर क्यों बढ़ता जा रहा है इंसान से हाथियों का टकराव?

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Elephant Terror In Gumla: झारखंड (Jharkhand) के गुमला जिले (Gumla district) में हाथी का आतंक (terror of elephant) बढ़ता ही जा रहा है. हाथी आक्रामक हो रहे हैं और लोगों की जानें जा रही हैं. जिले में इन दिनों हाथियों के आतंक से लोग त्रस्त हैं. हाथियों ने एक माह में 5 लोगों को मौत के घाट उतार दिया है. वहीं 50 से अधिक घरों को तोड़ डाला है. जंगली हाथियों के डर से पहाड़ी इलाकों में ग्रामीण भय में जीने को विवश हैं. लोग जान बचाने के लिए रातभर सो भी नहीं पा रहे हैं. मंगलवार की शाम गुमला-लातेहार सीमा पर जंगली हाथी ने एक दुधमुंहे बच्चे को कुचल कर मार डाला। घटना में एक अन्य बच्चा और उसकी मां भी घायल हो गई। सभी घायलों को गंभीर हालत में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना के बाद ग्रामीणों में दहशत है.

दुधमुंहे बच्चे को मार डाला 

गुमला-लातेहार सीमा पर हूसमु गांव में जब महिला अपने 10 माह के दुधमुंहे बच्चे सहित 6 वर्ष के बच्चे को लेकर घर से गांव की ओर जा रही थी तभी हाथी ने सभी को अपनी चपेट में ले लिया. घटना के बाद आनन-फानन में लोगों ने सभी घायलों को गुमला सदर अस्पताल भेज दिया. जहां मां-बच्चे का इलाज डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा है. गौरतलब है कि जिले में इन दिनों हाथियों का आतंक है. हाथियों ने एक माह में 5 लोगों को मौत के घाट उतार दिया है. वहीं 50 से अधिक घरों को तोड़ डाला है.

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इसलिए होता है मानव और हाथियों के बीच टकराव

धान पकने की शुरुआत के साथ ही मानव और हाथियों के बीच टकराव (conflict between humans and elephants) शुरू हो जाता है। भोजन और अपनी बस्ती की तलाश में हाथी अपनी बस्ती की तरफ आते हैं और ग्रामीणों द्वारा बनाए गए गड्ढों में फंस जाते हैं. इससे झुंड के बाकी साथी उग्र हो जाते हैं और तबाही मचाते हैं. इसके अलावा हाथी भोजन-पानी और प्रजनन के लिए आते हैं. हाथी अपने क्षेत्र को लेकर बेहद संवेदनशील होते हैं और कभी भी अपना मार्ग नहीं भूलते हैं. यदि उनके मार्ग में अतिक्रमण हो तो उसे नष्ट कर ही आगे बढ़ते हैं. जंगल में अतिक्रमण बढ़ने से भी हाथी मानव टकराहट की घटना में वृद्धि हुई है. इसके अलावा खनन में बढ़ोतरी, सड़क और रेलवे लाइन का विस्तार तथा हाथियों के कोरिडोर में गांव का बसना भी टकराहट के कारण हैं क्योंकि इससे हाथियों के आवागमन में समस्या आती है जो दोनों के लिए घातक है .

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कॉरिडोर से इंसान और हाथियों के बीच टकराहट होगी कम

वन अधिकारियों के मुताबिक हाथियों का साल में एक बार भोजन की तलाश में निकलते हैं. हाथियों का प्रिय भोजन बांस है।अगर उसे रास्ते में ही पर्याप्त भोजन मिल जाए तो जंगली हाथी किसी गांव में घुसकर फसलों को क्षति नहीं पहुंचाएगा. इससे मनुष्य और हाथियों की बीच टकराहट कम होगी.हाथियों के आतंक को कम करने के लिए राज्‍य के 24 जिलों में पहली बार वन्य जीव कोरिडोर बनाने की तैयारी भी चल रही है. इसके लिए पूरे राज्य के 1200 हेक्टेयर गैर वनभूमि पर बांस के पौधे लगाए जाने हैं. संभावना है कि यह काम इस साल के जुलाई महीने तक पूरी कर ली जाएगी. सरकार की ओर से उक्त योजना के तहत सभी जिलों को राशि आवंटित की गई है.

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