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किस ‘डर’ से अचानक झामुमो जांच एजेंसियों पर बिफर पड़ा? या यह विपक्ष की रणनीति का है कोई हिस्सा?

Due to which 'fear' JMM suddenly got upset with the investigating agencies?

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अचानक बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश की जांच एजेंसियों पर हमला बोल दिया। झामुमो को प्रवक्ता सुप्रीयो भट्टाचार्य ने इन जांच एजेंसियों के तथाकथित गलत इस्तेमाल पर केन्द्र सरकार को जम कर कोसा। क्या आपको समझ आया कि आखिर अचानक झामुमो को यह क्या हो गया है, वह भाजपा की केन्द्र सरकार पर अचानक हमला क्यों करने लगा है। जबकि उसका कोई नेता, मंत्री इन दिनों ईडी, सीबीआई या दूसरी जांच एजेंसियों की चपेट में भी नहीं है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी ने खनन मामले में एक बार बुलाया जरूर है, लेकिन इस घटना को महीनों गुजर गये हैं। फिर आखिर वजह क्या है वह अचानक एकदम से तल्ख हो गया।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद विपक्ष को मिला बोलने का मौका

आपको याद होगा दो दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया था। यह फैसला था वर्तमान ईडी डायरेक्टर संजय मिश्रा के ऊपर। केन्द्र की मोदी सरकार ने रिटायरमेंट के बाद संजय मिश्रा को दो बार ईडी का डायरेक्टर बनाया था। इसी का एक मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर केन्द्र सरकार के किसी फैसले को पलटते हुए उसे झटका दे कर ईडी डायरेक्टर के एक्टेंशन को अवैध करार दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने संजय मिश्रा के एक्सटेंशन को अवैध करार देते उन्हें 31 अगस्त को अपना पद छोड़ने को कहा था।  फिर क्या था, विपक्ष के हाथ एक बटेर लग गयी और पूरे देश में विपक्ष ने इसे अपनी जीत मानते हुए एक तरह से जश्न मनाना शुरू कर दिया। झामुमो भी शायद उसी जश्न में शामिल हो था। उसे भी केन्द्र सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया और उसने हमला कर भी दिया।

विपक्ष की एकता में बड़ा काम करेगा ईडी डायरेक्टर पर आया फैसला

17 और 18 जुलाई को बेंगलुरू में विपक्षी एकता के लिए फिर से बैठक होने वाली है। इस बैठक में उम्मीद की जा रही है कि 24-25 विपक्षी पार्टियां शामिल होंगी। माना जा रहा है कि इस बार की बैठक इस दिशा में कोई बड़ा मोड़ ले लेगी। केन्द्र सरकार को घेरने, उस पर हमले करने के लिए विपक्ष के पास कई मुद्दे हैं, लेकिन ईडी डायरेक्टर वाले मामले में विपक्ष को जीत ने उसका उत्साह बढ़ा दिया है जो इस बैठक में तो नजर आयेगा ही, लेकिन ईडी और दूसरी जांच एजेंसियों का खौफ दिखा कर सबसे एक सूत्र में जोड़ने का काम भी करेगा। ऐसा इसलिए भी होगा, क्योंकि संजय मिश्रा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का एक बयान भी आया था। उसे भी विपक्षी दल अपनी प्रतिष्ठा पर चोट मान रहा है। अमित शाह ने कहा था कि ईडी का चीफ चाहे कोई भी रहे, ईडी के तेवर में कोई कमी नहीं आयेगी। यानी गृहमंत्री ने साफ-साफ कह दिया कि ईडी या दूसरी जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार पर जिस तरह प्रहार कर रही हैं, वह प्रहार आगे भी जारी रहेगा।

अमित शाह ने कहा क्या था?

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अमित शाह ने कहा था- यह महत्वपूर्ण नहीं है कि ईडी का निदेशक कौन है, क्योंकि जो कोई भी इस पद पर होगा, वह विकास विरोधी मानसिकता रखने वाले ‘परिवारवादियों के क्लब’ के बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पर नजर रखेगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट और कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करने के लिए ईडी की शक्तियां पहले जैसी हैं, क्योंकि यह एक ऐसी संस्था है जो किसी व्यक्ति विशेष से परे है. यह अपने मुख्य उद्देश्य को प्राप्त करने के प्रति लक्षित है।

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