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Dr. Rajendra Prasad Birthday : दुसरे नेताओं से कितने अलग थे राजेंद्र बाबू, जानें उनकी Inspirational Story

Dr Rajendra Prasad

नई दिल्ली: 3 दिसंबर, 1884 को जन्मे डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया. आज Rajendra Prasad की 137वीं जयंती है. राष्ट्रपति और PM Narendra Modi ने भारत के पहले राष्ट्रपति Rajendra Prasad को उनकी 137वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की.

राष्ट्रपति ने किया ट्वीट : 

 PM Modi ने ट्वीट किया.

डॉ राजेंद्र प्रसाद एक स्वतंत्रता सेनानी, वकील, पत्रकार और एक राजनेता थे, जो स्वतंत्रता के लिए असहयोग आंदोलन के दौरान राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी के साथी भी थे, जिन्हें महात्मा गांधी के नाम से भी जाना जाता है. Rajendra Prasad ने 1934, 1939 और 1947 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया.

Rajendra Prasad का पालन-पोषण एक जमींदार परिवार में हुआ और उन्होंने कलकत्ता लॉ कॉलेज से स्नातक किया. कलकत्ता उच्च न्यायालय में कानून का अभ्यास करने के बाद, उन्हें 1916 में पटना उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया. 1917 में, Rajendra Prasad को गांधी द्वारा बिहार में ब्रिटिश नील बागान मालिकों द्वारा शोषण किए जा रहे  किसानों की स्थिति में सुधार लाने के अभियान में सहायता के लिए नियुक्त किया गया था.

वह राष्ट्रवादी हित में एक सक्रिय पत्रकार भी बने और उन्होंने न केवल हिंदी साप्ताहिक ‘देश’ की स्थापना और संपादन किया बल्कि अंग्रेजी में ‘सर्चलाइट’ भी लिखा. उन्होंने हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा बनाने का अपना जीवनभर का अभियान भी शुरू किया और अंग्रेजों ने उन्हें कैद कर लिया.

पूर्ण स्वतंत्रता से पहले 1946 की अंतरिम सरकार में, Rajendra Prasad को शुरू में उसी वर्ष सितंबर में खाद्य और कृषि मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई थी. उसके बाद, 1946 से 1949 तक, उन्होंने भारतीय संविधान सभा की अध्यक्षता भी की और देश के संविधान को आकार देने में योगदान दिया. आखिरकार, 1950 में, उन्हें सर्वसम्मति से भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना गया. 1952 में पहले आम चुनाव के बाद, उन्हें नए निर्वाचक मंडल के स्पष्ट बहुमत के साथ चुना गया और 1957 में तीसरे कार्यकाल के लिए चुना गया.

डॉ राजेंद्र प्रसाद ने स्वास्थ्य के कारण 1962 में सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लिया. यह वही वर्ष था जब उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था जो भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है. 1946 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा ‘आत्मकथा’ के अलावा प्रसाद ने ‘इंडिया डिवाइडेड’ (1946) भी लिखा. वह कई अन्य पुस्तकों के अलावा ‘महात्मा गांधी और बिहार’, ‘कुछ यादें’ (1949) के लेखक भी हैं. 28 फरवरी, 1963 को उनकी मृत्यु के बाद, पटना में स्मारक ‘राजेंद्र स्मृति संग्रहालय’ उन्हें समर्पित किया गया.

यह भी पढ़ें – जानिए 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ गंगासागर की लड़ाई जितवाने वाले Lance Naik Albert Ekka की पूरी कहानी

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