रांची: झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर पहुंच गई हैं। चुनाव से ठीक पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने ऐसा दावा किया है, जिसने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा है – "56 नहीं, 61"। इस पोस्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
JMM के इस दावे को राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां महागठबंधन अपने दोनों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है। पार्टी की ओर से किया गया यह दावा संकेत दे रहा है कि गठबंधन के पास घोषित संख्या से अधिक विधायकों का समर्थन मौजूद है।
सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ी चर्चा
झारखंड मुक्ति मोर्चा के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से किए गए पोस्ट में केवल "56 नहीं 61" लिखा गया। हालांकि पोस्ट में किसी विधायक या दल का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसके राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि JMM इस पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की स्थिति पहले से अधिक मजबूत है और उसे अतिरिक्त समर्थन भी प्राप्त है।
राज्यसभा चुनाव में क्यों अहम है संख्या बल?
झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होना है। मौजूदा गणित के अनुसार दोनों उम्मीदवारों की जीत के लिए लगभग 28-28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।
ऐसे में यदि महागठबंधन के पास 56 से अधिक विधायकों का समर्थन है, तो दोनों उम्मीदवारों की जीत का रास्ता और आसान हो सकता है। JMM के 61 विधायकों के समर्थन वाले दावे को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या कोई क्रॉस वोटिंग के संकेत?
JMM के इस दावे के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या महागठबंधन को अपने गठबंधन के बाहर से भी समर्थन मिलने वाला है। हालांकि इस संबंध में किसी भी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में अक्सर संख्या बल और रणनीति दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में JMM की यह पोस्ट विपक्षी दलों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकती है।
महागठबंधन की रणनीति पर नजर
राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड में INDIA गठबंधन के घटक दल लगातार बैठकें कर रहे हैं। JMM, कांग्रेस, राजद और अन्य सहयोगी दल अपने विधायकों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
गठबंधन नेतृत्व का दावा है कि सभी विधायक एकजुट हैं और दोनों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। इसी बीच JMM का "56 नहीं 61" वाला दावा चुनावी समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।
विपक्ष भी बनाए हुए है नजर
JMM की इस पोस्ट के बाद विपक्षी दल भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम से पहले इस तरह के दावे राजनीतिक संदेश देने और शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा भी होते हैं।
हालांकि वास्तविक तस्वीर मतदान और मतगणना के बाद ही साफ होगी कि JMM का 61 विधायकों के समर्थन का दावा कितना सटीक साबित होता है।
चुनावी माहौल हुआ और गर्म
राज्यसभा चुनाव नजदीक आते ही झारखंड की राजनीति में बयानबाजी और दावों का दौर तेज हो गया है। JMM की सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और हवा दे दी है।
अब सभी की नजर 18 जून को होने वाले मतदान पर टिकी है, जहां यह साफ होगा कि विधानसभा के भीतर किस गठबंधन की पकड़ कितनी मजबूत है और JMM का "56 नहीं 61" वाला दावा चुनावी नतीजों में कितना असर दिखाता है।