धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले करीब 15 दिनों से टुंडी पहाड़ क्षेत्र में 35 हाथियों का एक बड़ा झुंड डेरा डाले हुए है। भोजन और पानी की तलाश में यह झुंड लगातार आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ रहा है, जिससे ग्रामीणों की चिंता और भय दोनों बढ़ गए हैं। मंगलवार देर रात हाथियों के झुंड ने पर्वतपुर और बसहा गांव में घुसकर जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान दो ग्रामीणों के घर क्षतिग्रस्त हो गए और घरों में रखा अनाज भी हाथियों ने खा लिया।

घटना के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने और भोजन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि समय रहते परिवार के लोग घर से बाहर निकल गए, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर हाथियों को गांव से बाहर खदेड़ने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों में अब भी दहशत का माहौल बना हुआ है।

रात के अंधेरे में गांव में घुसा हाथियों का झुंड

स्थानीय लोगों के अनुसार मंगलवार देर रात अचानक टुंडी पहाड़ से हाथियों का झुंड नीचे उतरकर पर्वतपुर और बसहा गांव की ओर बढ़ने लगा। रात के सन्नाटे में हाथियों की चिंघाड़ और पेड़ों के टूटने की आवाज सुनकर ग्रामीणों की नींद खुल गई। लोगों ने जब बाहर निकलकर देखा तो गांव के आसपास हाथियों का बड़ा झुंड मौजूद था।

हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। कई परिवारों ने पूरी रात जागकर बिताई।

दो घरों को पहुंचाया भारी नुकसान

हाथियों के झुंड ने सबसे पहले पर्वतपुर गांव निवासी महालाल किस्कू और सुनील हेंब्रम के घरों को निशाना बनाया। दोनों के घर मिट्टी से बने हुए थे। ग्रामीणों के मुताबिक बड़े हाथियों ने घर की दीवारों और छप्पर को तोड़ दिया, जबकि झुंड में शामिल छोटे हाथी घर के अंदर घुस गए।

घर के अंदर रखे धान, गेहूं और अन्य खाद्यान्न को हाथियों ने खा लिया। कुछ सामान को रौंदकर भी नुकसान पहुंचाया गया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनकी कई महीनों की मेहनत से जुटाई गई खाद्यान्न सामग्री कुछ ही मिनटों में बर्बाद हो गई।

महालाल किस्कू ने बताया कि घटना के समय पूरा परिवार घर के अंदर सो रहा था। अचानक तेज आवाज सुनकर जब वे जागे तो हाथियों को घर तोड़ते देखा। किसी तरह परिवार के सभी सदस्य बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे।

बाल-बाल बची कई लोगों की जान

ग्रामीणों का कहना है कि यदि थोड़ी भी देर हो जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। हाथियों के हमले के दौरान घर के अंदर बच्चे और बुजुर्ग भी मौजूद थे। सौभाग्य से सभी लोग समय रहते बाहर निकल गए।

ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों का झुंड काफी आक्रामक दिखाई दे रहा था। यदि कोई व्यक्ति उनके सामने आ जाता तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। यही कारण है कि लोग रातभर भय के साये में रहे।

15 दिनों से सक्रिय है हाथियों का झुंड

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार 35 हाथियों का यह झुंड पिछले लगभग 15 दिनों से टुंडी पहाड़ और आसपास के जंगल क्षेत्रों में सक्रिय है। लगातार भोजन की तलाश में हाथी जंगल से निकलकर गांवों की ओर आ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन और जल स्रोतों की कमी के कारण हाथियों का रुख आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। खेतों और घरों में रखा अनाज उन्हें आसानी से आकर्षित करता है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

वन विभाग ने चलाया राहत अभियान

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की मशालची टीम मौके पर पहुंची। टीम ने मशाल, ढोल-नगाड़े और पटाखों की मदद से हाथियों को गांव से बाहर निकालने का प्रयास किया।

कई घंटों की मशक्कत के बाद हाथियों के झुंड को गांव से हटाकर नवतार पहाड़ की दिशा में खदेड़ा गया। वन विभाग के कर्मचारियों ने पूरी रात क्षेत्र में निगरानी भी की ताकि हाथी दोबारा गांव की ओर न लौटें।

अधिकारियों का कहना है कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमों की भी तैनाती की जाएगी।

ग्रामीणों में बढ़ रही चिंता

लगातार हो रही घटनाओं के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि हाथियों का झुंड कभी भी गांव में प्रवेश कर सकता है। कई परिवार रात के समय खेतों या गांव के बाहरी इलाकों में जाने से डर रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों की समस्या वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है। हर साल हाथियों के कारण फसलों, मकानों और अन्य संपत्तियों को भारी नुकसान होता है।

स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से हाथियों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल हाथियों को खदेड़ना पर्याप्त नहीं है।

लोगों ने प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की है। साथ ही गांवों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी टीम और चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया है।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में किसी बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता।

मानव-हाथी संघर्ष बन रहा बड़ी चुनौती

झारखंड के कई जिलों में मानव-हाथी संघर्ष लगातार गंभीर समस्या बनता जा रहा है। जंगलों का क्षेत्र घटने, प्राकृतिक आवास प्रभावित होने और भोजन की कमी के कारण हाथी आबादी वाले इलाकों में प्रवेश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। इसके लिए दीर्घकालिक योजना, बेहतर वन प्रबंधन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी आवश्यक है।

प्रशासन पर टिकी उम्मीदें

फिलहाल टुंडी क्षेत्र के ग्रामीण प्रशासन और वन विभाग की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। लोगों को आशा है कि प्रभावित परिवारों को राहत मिलेगी और हाथियों के लगातार बढ़ते आतंक पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

जब तक हाथियों का यह झुंड क्षेत्र में मौजूद है, तब तक आसपास के गांवों में सतर्कता बनाए रखने की जरूरत है। वन विभाग ने भी लोगों से अपील की है कि हाथियों के करीब न जाएं और किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें।