कोलकाता: Kolkata में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 92.89% मतदान दर्ज किया गया, जो 2021 के मुकाबले करीब 10.5% अधिक है। पहली नजर में यह लोकतंत्र की बड़ी जीत लगती है, लेकिन इसके पीछे मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का गणित सामने आ रहा है।
कैसे बढ़ा वोटिंग प्रतिशत?
Election Commission of India के निर्देश पर राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया गया। इस प्रक्रिया में:
- करीब 90.8 लाख नाम हटाए गए (लगभग 12%)
- कुल मतदाता घटकर 6.75 करोड़ रह गए
पहले चरण में:
- कुल मतदाता: 3.61 करोड़
- वोटिंग: 3.35 करोड़
यही वजह रही कि मतदान प्रतिशत 92.8% तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वोटर बेस कम होने से प्रतिशत ज्यादा दिखाई दे रहा है।
बदला चुनावी समीकरण
इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया है। यह अब इस पर निर्भर करेगा कि किन क्षेत्रों और समुदायों के कितने नाम हटे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
- Amit Shah ने इसे सत्ता परिवर्तन का संकेत बताया
- वहीं Trinamool Congress (TMC) ने आरोप लगाया कि मुस्लिम बहुल इलाकों में जानबूझकर नाम हटाए गए
इन जिलों में सबसे ज्यादा असर
- मुर्शिदाबाद: 66% मुस्लिम आबादी, बड़ी संख्या में नाम कटे
- मालदा: 51% मुस्लिम आबादी
- उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना: यहां भी बड़े पैमाने पर नाम हटे
इन चार जिलों में ही करीब 12.2 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए।
बीजेपी की सीटों पर भी असर
कुछ ऐसे क्षेत्र जहां बीजेपी जीती थी, वहां भी नाम कटने का असर दिखा:
- कूचबिहार (दिनहाटा)
- पुरुलिया (बलरामपुर)
- पूर्व मेदिनीपुर (मयना)
नतीजों पर क्या होगा असर?
2021 में TMC को BJP से करीब 9.87% ज्यादा वोट मिले थे। इस बार 90.8 लाख नाम हटना इस अंतर से भी अधिक है। ऐसे में:
- कई सीटों पर नतीजे प्रभावित हो सकते हैं
- मुकाबला और ज्यादा करीबी और अनिश्चित हो सकता है
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि:
- किस इलाके में कितने नाम हटे
- किस समुदाय पर इसका ज्यादा असर पड़ा