झारखंड हाईकोर्ट ने श्रम विभाग में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि न्यायिक आदेशों की अनदेखी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी।
🏛️ खंडपीठ की तीखी टिप्पणी, DC की कार्यशैली पर सवाल
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान रांची के उपायुक्त (DC) की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताई।
अदालत ने तल्ख लहजे में सवाल किया:
👉 “क्या रांची का उपायुक्त विभाग के प्रधान सचिव से भी ऊपर है?”
यह टिप्पणी दर्शाती है कि कोर्ट प्रशासनिक लापरवाही और आदेशों की अवहेलना को लेकर बेहद सख्त रुख अपना चुका है।
📢 रांची DC को अवमानना नोटिस, सशरीर पेश होने का आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने रांची के उपायुक्त सह जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति के अध्यक्ष मंजूनाथ भजंत्री को ‘हाईकोर्ट रूल्स’ के तहत अवमानना नोटिस जारी किया है।
👉 कोर्ट के निर्देश:
- अगली सुनवाई में सशरीर (व्यक्तिगत रूप से) उपस्थित होना अनिवार्य
- मामले पर विस्तृत जवाब देना होगा
इसके साथ ही, श्रम विभाग के प्रधान सचिव को भी अदालत में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करना होगा कि वर्ष 2019 के आदेश पर अब तक अमल क्यों नहीं हुआ।
👨👩👦 क्या है राजकुमार राम नियुक्ति विवाद?
यह पूरा मामला दिवंगत कर्मचारी राजकुमार राम के परिवार से जुड़ा है।
📌 विवाद की पूरी कहानी:
- राजकुमार राम की मृत्यु के बाद उनके बड़े पुत्र अनिल कुमार ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया
- उम्र अधिक होने के कारण आवेदन खारिज कर दिया गया
- इसके बाद छोटे पुत्र रूपेश रंजन ने नियुक्ति का दावा किया
- अदालत ने पहले ही नियुक्ति पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था
👉 लेकिन जिला प्रशासन की ओर से इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद प्रार्थी ने अवमानना याचिका दायर की।
⚠️ शपथ पत्र पर भड़का कोर्ट
सुनवाई के दौरान DC की ओर से दाखिल शपथ पत्र (Affidavit) ने मामले को और गंभीर बना दिया।
👉 शपथ पत्र में कहा गया:
- बड़े भाई द्वारा NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं देने के कारण नियुक्ति संभव नहीं
इस दलील पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट कहा कि:
👉 तकनीकी बहानों के आधार पर न्यायिक आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अदालत ने यह भी पूछा कि आदेश की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
🏢 प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इस मामले ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या सरकारी आदेशों का पालन समय पर हो रहा है?
- क्या अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है?
- क्या आम नागरिकों को समय पर न्याय मिल पा रहा है?
👉 हाईकोर्ट की सख्ती यह संकेत देती है कि अब इस तरह की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
📅 5 मई को होगी अगली सुनवाई
खंडपीठ ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 मई की तिथि निर्धारित की है।
👉 अगली सुनवाई में:
- रांची DC की सशरीर उपस्थिति
- प्रधान सचिव से जवाब
- नियुक्ति में देरी के कारणों की विस्तृत समीक्षा
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी राय ने अपनी दलीलें पेश कीं।
🔍 आगे क्या होगा?
अब सभी की नजरें 5 मई की सुनवाई पर टिकी हैं। यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि:
- क्या प्रशासन अपनी गलती स्वीकार करता है?
- क्या कोर्ट कोई कड़ा आदेश या कार्रवाई करता है?
👉 यह मामला केवल एक नियुक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही और पारदर्शिता का है।
📢 निष्कर्ष
झारखंड हाईकोर्ट का यह सख्त रुख साफ संदेश देता है कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह फैसला आने वाले समय में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।