रांची में प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजा कर इस वर्ष अच्छी बारिश और बेहतर फसल होने की भविष्यवाणी की है।
परंपरा के अनुसार हुई पूजा-अर्चना
ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच मुख्य पाहन जगलाल पाहन, दीपक हेमरोम, रौशन हेमरोम, कुलदीप हेमरोम और अंतो हेमरोम अपने आवास से पूजा सामग्री लेकर सरना स्थल पहुंचे।
सूप में सरई फूल, दीप, अक्षत और सिंदूर लेकर वे पारंपरिक वेशभूषा में जुलूस के रूप में निकले।
घड़ों के जल से किया गया आकलन
सरना स्थल पर पहुंचकर पाहन ने परंपरा के अनुसार तीन बार परिक्रमा की और दो घड़ों में रखे जल की पूजा की।
इसी जल स्तर के आधार पर उन्होंने इस वर्ष अच्छी बारिश और खेती-बाड़ी के लिए अनुकूल मौसम का संकेत दिया।
देवी-देवताओं की आराधना
पूजा के दौरान सरना मां, इष्ट देव, जल देवता, ग्राम देवता और सूर्य भगवान सिंगबोंगा की विधिवत आराधना की गई।
घड़ों पर अक्षत और सिंदूर चढ़ाकर दीप प्रज्ज्वलित किया गया।
सुख-समृद्धि की कामना
पूजन के उपरांत देश-दुनिया में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।
मुख्य पाहन ने कहा कि इस वर्ष किसानों के लिए समय अच्छा रहेगा और अच्छी पैदावार की उम्मीद है।
परंपरा और आस्था का पर्व
बीते दिन सरना स्थल पर ढोल-नगाड़ों के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई थी। सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य और विश्वास का प्रतीक है, जो हर साल लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ता है।