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कटिहार में बाजार बना राख का ढेर, 300 से ज्यादा दुकानें राख, करोड़ों का नुकसान

बिहार के कटिहार जिले के कुरसेला हाट में भीषण आग से 300 से अधिक दुकानें जल गईं। शादी सीजन के लिए कर्ज लेकर भरा सामान राख हो गया। करोड़ों के नुकसान के बाद दुकानदारों ने मुआवजे की मांग की।

बिहार के कटिहार जिले के कुरसेला हाट में रविवार शाम अचानक लगी भीषण आग ने तबाही मचा दी। आग की चपेट में आकर 300 से अधिक दुकानें जलकर राख हो गईं। इस हादसे में करीब 6 से 7 करोड़ रुपये की संपत्ति के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

कर्ज लेकर भरा था लगन का सामान, सब कुछ जलकर खाक

स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि लगन (शादी सीजन) को देखते हुए उन्होंने कर्ज लेकर दुकानों में सामान भरा था। कई लोगों ने बंधन बैंक समेत अन्य वित्तीय संस्थानों से लोन लिया था। रोज की कमाई से परिवार का खर्च चलाने के साथ वे साप्ताहिक किस्त भी जमा करते थे।

अब दुकानें जल जाने के बाद उनकी आय का एकमात्र साधन खत्म हो गया है। ऐसे में लोन की किस्त चुकाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पीड़ित दुकानदार प्रशासन से मुआवजा और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं, ताकि वे दोबारा अपना रोजगार शुरू कर सकें।

हर तरफ बर्बादी का मंजर

सोमवार सुबह कुरसेला के नए हाट में चारों तरफ राख और जले हुए मलबे का ढेर दिखाई दिया। कहीं-कहीं राख से धुआं उठ रहा था और दुकानदार मायूस चेहरों के साथ अपने उजड़े कारोबार को निहार रहे थे।

नगर पंचायत क्षेत्र के बीचो-बीच स्थित दुर्गा हाट पूरी तरह से तबाह हो चुका है। यह बाजार लगभग 20 किलोमीटर के ग्रामीण इलाकों के लिए प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता है।

दुकानदारों का दर्द

  • रंजीत चौधरी (कपड़ा कारोबारी): “आग लगने पर सामान बाहर निकाल रहे थे, लेकिन निकला हुआ सामान भी लोग उठा ले गए। करीब पांच लाख का नुकसान हुआ।”

  • सोनू कुमार (कपड़ा दुकानदार): “ग्रुप लोन लेकर दुकान चला रहा था। आग में करीब चार लाख का नुकसान हुआ।”

  • मो. अजहर (कपड़ा दुकानदार): “एक-एक रुपया जोड़कर दुकान बनाई थी। आग ने सब खत्म कर दिया, लगभग पांच लाख का नुकसान हुआ।”

लगन की खुशी मातम में बदली

दुकानदारों का कहना है कि शादी सीजन की तैयारी में उन्होंने उधार लेकर माल भरा था, लेकिन आग ने उनकी सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया। अब उनके सामने परिवार का पालन-पोषण और कर्ज चुकाने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।

प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है। पीड़ितों को राहत और मुआवजा देने की मांग तेज हो गई है।

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