अमेरिका के कुख्यात यौन अपराधी और लड़कियों की तस्करी के आरोपी जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) की फाइल्स सामने आने के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। भले ही एपस्टीन का निधन हो चुका हो, लेकिन उसके ई-मेल्स, दस्तावेज़ों और तस्वीरों के सार्वजनिक होने से कई प्रभावशाली और चर्चित नाम सुर्खियों में आ गए हैं।
अमेरिकी सरकार द्वारा इन फाइल्स को सार्वजनिक किए जाने के बाद यह मामला सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर भारत सहित कई देशों की राजनीति पर भी साफ नजर आ रहा है।
🇮🇳 Epstein Files में भारतीय नाम, राजनीति गरमाई
एपस्टीन फाइल्स में जिन नामों का जिक्र सामने आया है, उनमें भारत के उद्योगपति अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा कई अन्य अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के नाम भी दस्तावेज़ों में दर्ज होने की बात कही जा रही है।
इन नामों के सामने आने के बाद भारत में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्ष सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब मांग रहा है।
🏛️ विदेश मंत्रालय की सफाई, आरोपों को बताया बेतुका
मामले को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) ने सफाई देते हुए कहा है कि एपस्टीन फाइल्स में सामने आए आरोप बेतुके और आधारहीन हैं। सरकार का कहना है कि इन दावों का कोई ठोस प्रमाण नहीं है और इन्हें राजनीतिक रूप से तूल दिया जा रहा है।
हालांकि, विपक्ष इस सफाई से संतुष्ट नहीं दिख रहा और संसद से लेकर मीडिया तक लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
🔍 हरदीप सिंह पुरी को लेकर क्या हैं आरोप?
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2014 में जेफरी एपस्टीन ने अपनी असिस्टेंट को जल्द भारतीय वीजा दिलाने के लिए हरदीप सिंह पुरी से मदद मांगी थी। उस समय हरदीप सिंह पुरी भारतीय विदेश सेवा (IFS) से सेवानिवृत्त होकर भाजपा में शामिल हो चुके थे।
आरोप है कि पुरी ने अपने डिप्लोमैटिक संपर्कों और चैनलों का उपयोग कर इस वीजा प्रक्रिया को प्राथमिकता दिलाई, जिससे एपस्टीन की असिस्टेंट को जल्दी वीजा मिल गया।
📧 ई-मेल्स में कई बातचीत और मुलाकातों का दावा
मामला सिर्फ वीजा तक सीमित नहीं बताया जा रहा है।
एपस्टीन के ई-मेल्स के हवाले से दावा किया गया है कि 2014 से 2017 के बीच दोनों के बीच कई बार संवाद हुआ। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि हरदीप सिंह पुरी ने न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में स्थित एपस्टीन के आलीशान घर पर कम से कम तीन बार मुलाकात की।
एक ई-मेल मैसेज में यह कथित पंक्ति भी सामने आई है—
👉 “जब तुम अपने एक्सोटिक आइलैंड से वापस आओ, तब मिलते हैं।”
⚖️ विपक्ष का हमला, जवाब की मांग तेज
इन दावों के सामने आने के बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि
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मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए
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सरकार को पूरे तथ्य देश के सामने रखने चाहिए
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एपस्टीन फाइल्स में आए हर नाम की भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए
वहीं सरकार का रुख साफ है कि बिना प्रमाण के लगाए गए आरोपों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
📌 Epstein Files विवाद: अब आगे क्या?
फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच फंसा हुआ है।
👉 क्या अमेरिका की ओर से और दस्तावेज़ सामने आएंगे?
👉 क्या भारत सरकार कोई आधिकारिक जांच शुरू करेगी?
👉 क्या विपक्ष का दबाव बढ़ेगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं।