डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू), रांची के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में गुरुवार को ‘कम्प्यूटेशनल एस्पेक्ट्स ऑफ पोएट्री’ (कविताओं के गणनात्मक पहलू) विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सीसीपी लैब, बीआईटी मेसरा और डीएसपीएमयू के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत किया गया। व्याख्यान में कविता के भीतर मौजूद विभिन्न पैटर्न, उनके विश्लेषण और काव्य अध्ययन में कंप्यूटर की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएसपीएमयू के खोरठा विभागाध्यक्ष एवं टीआरएल समन्वयक डॉ. विनोद कुमार ने की, जबकि संचालन विश्वविद्यालय के हो विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जय किशोर मंगल ने किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बीआईटी मेसरा के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरज कुमार सिंह थे।

कविता के विश्लेषण में कंप्यूटर की भूमिका पर जोर

मुख्य वक्ता डॉ. नीरज सिंह ने अपने व्याख्यान में कविताओं में अंतर्निहित पैटर्न और उनके गणनात्मक विश्लेषण के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने कविता के अध्ययन में कंप्यूटर और गणनात्मक तकनीकों की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि इनकी मदद से कविताओं की संरचना, उनमें मौजूद पैटर्न और विभिन्न विशेषताओं का विश्लेषण किया जा सकता है।

व्याख्यान में साहित्य और कंप्यूटर विज्ञान के बीच अंतर्विषयक संबंधों को समझने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान कविता के पारंपरिक अध्ययन को आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण से देखने और साहित्यिक विश्लेषण में नई संभावनाओं पर विचार किया गया।

रांची विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने भी रखे विचार

कार्यक्रम में रांची विश्वविद्यालय की खोरठा विभागाध्यक्ष डॉ. कुमारी शशि और खोरठा विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिनेश कुमार दिनमणि ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए अकादमिक संवाद को समृद्ध किया।

इस अवसर पर डीएसपीएमयू के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से डॉ. सुशीला कुमारी, डॉ. निताई चंद्र महतो, कुड़ुख विभाग की डॉ. सुनीता कुमारी और डॉ. सीता कुमारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।