नई दिल्ली: झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की ओर से बनाए गए DGP नियुक्ति नियमों और वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए केंद्र की अर्जी स्वीकार करते हुए इसे गंभीरता से लिया है। The Times of India

प्रकाश सिंह फैसले से टकराव का सवाल

केंद्र का कहना है कि झारखंड सरकार ने DGP की नियुक्ति के लिए 2025 में जो नियम बनाए, वे सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं। इस मामले में शीर्ष अदालत ने DGP के चयन की प्रक्रिया और पुलिस प्रमुख के कार्यकाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे। 

छह महीने की सेवा का मुद्दा

विवाद का प्रमुख बिंदु अधिकारी की बची हुई सेवा अवधि है। केंद्र की दलील है कि DGP पद के लिए ऐसे अधिकारी का चयन किया जाना चाहिए, जिसके पास कम से कम छह महीने की सेवा शेष हो। वहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में DGP पद के लिए चयनित अधिकारी के न्यूनतम दो वर्ष के कार्यकाल की व्यवस्था भी बताई गई है। 

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी असर

तदाशा मिश्रा को झारखंड का DGP 30 दिसंबर 2025 को नियुक्त किया गया था, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति अगले ही दिन निर्धारित थी। केंद्र ने इसी आधार पर उनकी नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत बताया है। इससे पहले केंद्र ने राज्य सरकार से उनकी नियुक्ति रद्द कर नए DGP की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने को कहा था। 

अब सुप्रीम कोर्ट यह जांच करेगा कि झारखंड सरकार के 2025 के DGP नियुक्ति नियम वैध हैं या नहीं और तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर इन नियमों का क्या प्रभाव पड़ता है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष होने वाली है। 

स्रोतों के अनुसार, केंद्र ने झारखंड के पिछले DGP की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि राज्य में DGP नियुक्ति की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप होनी चाहिए।