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देवघर : आज भी कौतूहल का विषय बना है दरार वाली चट्टान पर हनुमान जी का चित्र, हैरान कर देंगी तपोभूमि की ये रोचक बातें

देवघर : आज भी कौतूहल का विषय बना है दरार वाली चट्टान पर हनुमान जी का चित्र, हैरान कर देंगी तपोभूमि की ये रोचक बातें

देवघर से शैलेन्द्र मिश्र की रिपोर्ट

विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैजनाथ धाम देवघर से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तपोवन की कहानी भगवान शिव और रावण से जुड़ी हुई है। तपोवन में कई ऋषि मुनियों ने सालों साल तक यहां तप किया है। इसमें दशानन रावण का भी नाम शामिल है।

रावण ने की थी यहां तपस्या

कहा जाता है कि कैलाश पर्वत से जब रावण शिवलिंग को लंका ले जा रहे थे, उस समय रावण को लघुशंका लगी इस वजह से उसने शिवलिंग को देवघर में ही रख दिया। रावण ने पुनः शिवलिंग उठाने का प्रयास किया, लेकिन शिव द्वारा दिए गए वचन के अनुसार एक बार शिवलिंग को जमीन में रखने के बाद पुनः उठाना सम्भव नहीं था, फिर भी रावण ने उसे उठाने का प्रयास किया। जब रावण शिवलिंग नहीं उठा पाया तो पुनः तपोवन में तपस्या करना शुरू कर दिया।

हनुमान जी ने भंग की थी रावण की तपस्या 

कहा जाता है कि हनुमान जी ने रावण की तपस्या भंग करने के उद्देश्य से पहाड़ों पर तांडव मचाया। उन्होंने रावण पर गदे से प्रहार किया जिससे रावण की तपस्या भंग हो गयी। रावण ने जिस गुफा में तपस्या की थी, वो गुफा आज भी मौजूद है।

… जब हनुमान जी ने पत्थर तोड़ कर माता सीता को दिया प्रमाण 

ऐसा कहा जाता है कि रावण की तपस्या को हनुमान जी द्वारा भंग किए जाने के बाद भगवान राम, लक्ष्मण और सीता जब वनवास के लिए जा रहे थे, उस समय वो तपोवन भी आए थे। हनुमान जी ने उन्हें रावण के बारे में बताया और कहा कि उन्होंने रावण की तपस्या भंग की है, तो सीता माता बोलीं आप ने रावण की तपस्या भंग की है, इसका क्या प्रमाण है। उत्तर में हनुमान जी ने कहा कि वह पहाड़ के सभी पत्थरों में विराजमान हैं। माता सीता ने जब इस बात को साबित करने को कहा तो हनुमान ने अपनी कनिष्ठ अंगुली से एक पत्थर को दो भागों में तोड़ कर दिखा दिया, वह पत्थर आज भी यहां मौजूद है। एक पत्थर में दोनों ओर हनुमान की प्रतिमा बनी हुई है।

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