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Deoghar DC को नहीं हटाने के ल‍िए निर्वाचन आयोग से पुनर्विचार का आग्रह करेगी सरकार, आखिर क्यों बने हैं सरकार के चहेते?  

Deoghar DC

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस झारखंड – बिहार
सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी अनामिका गौतम को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। हाईकोर्ट ने अनामिका गौतम के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने का आदेश दिया है। अनामिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने सोमवार को यह निर्देश दिया था। इसके पूर्व अदालत ने उनके खिलाफ चल रही जांच प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। बता दें कि देवघर जिला प्रशासन ने एलोकेसी धाम की जमीन की खरीद को कपटपूर्ण मानते हुए देवघर के टाउन थाने में गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी अनामिका गौतम पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

डीसी के आदेश पर दर्ज की गई थी एफ़आइआर 

डीसी की इस कार्रवाई के खिलाफ अनामिका गौतम की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। सोमवार को सुनवाई के दौरान अनामिका गौतम के वकील प्रशांत पल्लव ने कोर्ट को बताया कि इस तरह के मामले में पहले भी हाईकोर्ट ने प्राथमिकी को निरस्त करने का आदेश दिया था। वहीं जब यह मामला कोर्ट में लंबित है तो उपायुक्त को इस तरह की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

DC को लेकर राज्य सरकार निर्वाचन आयोग से पुनर्विचार का आग्रह कर सकती है

देवघर DeogharDC को हटाने के मामले में राज्य सरकार(State Government) निर्वाचन आयोग(Election Commission) से पुनर्विचार का आग्रह कर सकता है। कार्मिक विभाग(Personnel Department) इससे संबंधित एक संचिका मुख्य सचिव तक बढ़ाई है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार संचिका(File) में पुनर्विचार करने के लिए आग्रह करने वो पहली प्राथमिकता देते हुए दो और सुझाव दिए गए हैं। माना जा रहा है कि दोनों सुझाव विधिक परामर्श के आधार पर संचिका में शामिल है।

राज्य सरकार इस फैसले को कोर्ट में दे सकती है चुनौती

पुनर्विचार करने को लेकर आग्रह के अलावा राज्य सरकार निर्वाचन आयोग के फैसले को मानने से इनकार भी कर सकती है। ऐसा करने से टकराव की स्थिति तो होगी ही, दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच इस तरह की स्थिति से देश में बेहतर संदेश भी नहीं जाएगा। अंत में राज्य सरकार इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दे सकती है।

निर्देश मिले अब 8 दिन हो गए हैं

ज्ञात हो कि विगत 6 दिसंबर को निर्वाचन आयोग ने देवघर के उपायुक्त को 15 दिनों के अंदर हटाने का निर्देश दिया था और इस निर्देश को मिले वे अब 8 दिन हो गए हैं। इस मसले पर राज्य सरकार महाधिवक्ता से परामर्श लेकर आगे बढ़ रही है। खबर है कि मुख्य सचिव में सोमवार को उच्चाधिकारियों के साथ इस मसले पर बैठक कर पत्र लिखने का निर्णय लिया और कार्मिक विभाग की ओर से यह पत्र मुख्य सचिव ही लिखेंगे।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह बताया 

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने चुनाव आयोग के इस कदम को राज्य सरकार के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बता चुका है. वहीं, झारखंड की सरकार में सहयोगी पार्टी कांग्रेस भी मानती है कि चुनाव आयोग के इस फैसले से कहीं न कहीं आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह जरूर खड़ा हो गया है।

चुनाव आयोग ने मंजूनाथ भजंत्री को गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दूबे पर एक ही दिन में 5 थानों में एफआइआर दर्ज कराने के मामले में दोषी माना है. पूर्व में आयोग ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए देवघर डीसी से पूछा था कि आदर्श आचार संहिता उल्लंघन मामले में गोड्‌डा सांसद पर 6 महीने की देरी से क्यों FIR दर्ज कराई गई?

कांग्रेस का स्टैंड 

जहां झामुमो ने इसे राज्य सरकार के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया में आयोग का हस्तक्षेप बताया है. वहीं कांग्रेस का कहना है कि फैसले से कहीं न कहीं आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह जरूर खड़ा हो गया है. कांग्रेस ने कहा कि अभी झारखंड में कहीं चुनाव भी नहीं है, ऐसे में यह बेहद जरूरी हो गया है कि संवैधानिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र पर व्यापक बहस हो।

 सरकार की चापलूसी करने का लगता रहा है आरोप 

देवघर उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री व गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे में कभी नहीं बनी। सांसद व उनकी धर्मपत्नी से जुड़ी जमीन-मकान को लेकर विवाद की जांच के उपरांत समय-समय पर करायी गयी प्राथमिकियों ने दूरी को और बढ़ाने का काम किया है। इसके साथ ही देवघर उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री पर विपक्ष हमेशा सरकार की चापलूसी करने और सत्ताधारी दल के नेताओं को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाता रहा है। उन पर जमीन से जुड़े कई मामलों को डील करने का भी आरोप लगा है । चुनाव आयोग द्वारा उन्हें हटाए जाने के निर्देश पर जमशेदपुर पूर्वी विधायक सरयू राय भी कह चुके हैं  कि देवघर उपायुक्त के बारे में चुनाव आयोग का निर्णय एक बड़ी घटना है। झारखंड के प्रशासनिक अधिकारी इसे सबक समझें। नियुक्ति के समय ली गई शपथ का पालन करें।  लोक सेवक का दायित्व निभायें, निजी सेवक की तरह आचरण से परहेज़ करें। संविधान, नियम, क़ानून के हिसाब से काम होगा तो राज्य आगे बढ़ेगा।
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