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Dengue झारखंड और बिहार की नयी आफत, बिहार में ज्यादा प्रकोप, झारखंड भी बरत रहा सावधानियां

Dengue is the new disaster of Jharkhand and Bihar, more outbreaks in Bihar

नीतीश सरकार अब हुई गंभीर, 4 सदस्यीय कमिटी की गठित

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

डेंगू (Dengue) यह कभी देश की राजधानी दिल्ली का ठिकाना हुआ करता था। आज इसने अपने पांव पसारने शुरू कर दिये हैं। बिहार में इसका बड़ा प्रकोप शुरू हो चुका है, लेकिन झारखंड में भी परेशानियां बढ़नी शुरू हो गयी हैं। बिहार की राजधानी पटना समेत कई जिलों में डेंगू कहर बरपा रहा है। डेंगू से अब तक सात लोगों की मौत भी हो चुकी है। बिहार के अस्पतालों में इसके मरीजों की बढ़ती संख्या बता रही है कि यहां अब एक नई महामारी का रूप लेने लगा है। बिहार में डेंगू के बढ़ते मरीजों की संख्या से नीतीश कुमार सरकार अब गंभीर हुई है। राज्य सरकार ने बिहार में डेंगू के पैर पसारने के कारणों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। यह समिति राज्य में डेंगू के फैलने की समीक्षा के बाद रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।

बिहार में दवाओं की कमी

बिहार में डेंगू के मरीज बढ़ रहे हैं, दूसरी ओर इसके लिए आवश्यक दवाओं की कमी की शिकायतें भी आ रही हैं। पीएमसीएच में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन की तरफ से पैरासिटामॉल भी नहीं दिया जा रहा है। मरीजों के परिजनों को दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है। दवा व्यापारी भी मान रहे हैं कि राजधानी में जब से डेंगू का कहर बढ़ा है, पैरासिटामॉल, एंटीबायोटिक, एंटी इंफेक्शन और मल्टीविटामिन जैसी दवाओं की मांग 60 प्रतिशत तक बढ़ गई है यही कारण है कि बाजार में ही दवाओं का अकाल हो गया है।

झारखंड में भी बढ़ रहीं डेंगू की परेशानियां

बिहार ही नहीं, झारखंड भी डेंगू से परेशान है। हर दिन डेंगू के नये मरीज सामने आ रहे हैं पिछले चार-पांच दिनों में रिम्स में भर्ती मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। डेंगू के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य महकमा सक्रिय है। उसने रिम्स में डेंगू के लिए अलग वार्ड बनाने का निर्देश भी दिया है। साथ ही बेड की अलग व्यवस्था करने का भी निर्देश दे दिया गया है ताकि डेंगू के मरीजों को सामान्य मरीजों से अलग रखा जा सके। रांची के अलावा कोडरमा, गढ़वा, गया, पुरुलिया के लोग डेंगू से ग्रसित हैं। चिकित्सकों को मरीजों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका है। डेंगू के मरीजों में सबसे बड़ी समस्या प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है।  इसके कारण और ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम अपनी तरफ से तैयार

डेंगू को लेकर राज्य का स्वास्थ्य महकमे ने अपनी तैयारी कर रखी है। रांची सिविल सर्जन डॉ बिनोद कुमार के अनुसार डेंगू के लिए अलग वार्ड बनाये गये हैं ताकि सभी मरीजों को आइसोलेशन में भर्ती किया जा सके। राज्य में सबके लिए पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। जिन डेंगू के मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, उन्हें गाइडलाइन के अनुसार दवाएं दी जा रही हैं। वहीं रांची नगर निगम ने भी मलेरिया के साथ डेंगू से निबटने के लिए कमर कस ली है। बरसात से थोड़ी राहत मिलने के बाद वार्ड-वार्ड में घूम कर नगरकर्मी कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं। रांची को चार जोन में बांटकर फॉगिंग किये जाने की बात भी नगर निगम ने कही है। फिर भी डेंगू का बढ़ता प्रसार चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विभाग की अपनी जो भी तैयारियां हों, लोगों को व्यक्तिगत रूप से भी सावधान रहने की जरूरत है और सरकार की ओर से जो भी दिशा-निर्देश जारी

निजी स्वास्थ्य केंद्रों में भी आ रहे डेंगू के मरीज

रांची के निजी जांच केंद्रों पर भी हर दिन डेंगू के लक्षण वाले मरीज पहुंच रहे हैं। हालांकि अधिकतर में डेंगू की पुष्टि नहीं हो रही है। लेकिन 1000 से 1200 रुपये में एक घंटे में मिल जाने से उनमें रोग या या नहीं इसकी पुष्टि हो जाती है। हालांकि रिम्स भी एक दिन में ही रिपोर्ट दे दे रहा है। रांची में डेंगू ही नहीं चिकनगुनिया के भी सैकड़ों मरीजों की पुष्टि हो चुकी है।

डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया में अंतर

डेंगू, मलेरिया और चिगनगुनिया तीनों मच्छर जनित बीमारियां हैं। इनके लक्षणों में थोड़ी समानता भी है और थोड़ी विषमता भी है। इन्हीं विषमताओं के कारण ही इनका स्वरूप बदल जाता है। लोग सिर्फ मच्छर की बीमारी मान कर अक्सर गलतियां कर बैठते हैं जिसके परिणाम घातक भी हो सकते हैं। मलेरिया एनोफिलीज मच्छर के कारण होता है जबकि, डेंगू और चिकनगुनिया एडीज मच्छर द्वारा फैलने वाला रोग है। जबकि डेंगू और चिकनगुनिया दोनों कीट-जनित वायरल रोग हैं, मलेरिया प्लास्मोडियम के कारण होने वाली एक परजीवी बीमारी है, और यह संक्रमित मच्छरों के माध्यम से फैलता है।

डेंगू

डेंगू एडीज मच्छर द्वारा फैलने वाला रोग है। DEN-1, DEN-2, DEN-3 और DEN-4 चार मुख्य वायरस हैं जो बीमारी का कारण बनते हैं

डेंगू बुखार के लक्षण

  • तेज बुखार, 105ºF तक
  • गंभीर मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द
  • भयानक सरदर्द
  • लाल चकत्ते जो छाती, पीठ या पेट पर शुरू होते हैं और अंगों और चेहरे तक फैलते हैं
  • आंखों के पीछे दर्द
  • मतली और उल्टी
  • दस्त
मलेरिया

मलेरिया मच्छर जनित संक्रामक रोग है जो प्लास्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है। जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है।

मलेरिया के लक्षण

  • मलेरिया के लक्षण जटिल मलेरिया और गंभीर मलेरिया हैं।
  • जटिल मलेरिया- ठंड लगना या कंपकंपी के साथ ठंड का अहसास, सिरदर्द, बुखार और उल्टी, कभी-कभी दौरे पड़ना, थकान या थकान के साथ सामान्य स्थिति में पसीना आना।
  • गंभीर मलेरिया- बुखार और कंपकंपी/ ठंड लगना, बिगड़ी हुआ चेतना, सांस लेने में तकलीफ और गहरी सांस लेना।
चिकनगुनिया

‘चिकनगुनिया’ शब्द का अर्थ है ‘झुक कर चलना’। संक्रमित मादा, “एडीस इजिप्टी” से चिकनगुनिया वायरस फैलता है, जिसे आमतौर पर ‘पीला बुखार मच्छर’ कहा जाता है।

चिकनगुनिया के लक्षण

  • तेज बुखार (40 डिग्री सेल्सियस या 104 डिग्री फारेनहाइट) जो आमतौर पर दो दिनों तक रहता है और फिर अचानक समाप्त हो जाता है
  • धड़ या अंगों पर वायरल चकत्ते
  • कई जोड़ों को प्रभावित करने वाले जोड़ों का दर्द (दो साल तक)
  • अन्य गैर-विशिष्ट वायरल लक्षण जैसे सिरदर्द, भूख न लगना आदि।
  • डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया में क्या समानता है?
  • चिकनगुनिया और डेंगू उष्णकटिबंधीय बुखार हैं जिनमें लगभग सामान्य लक्षण, कारक एजेंट (मच्छर-जनित वायरल रोग), भौगोलिक वितरण और ऊष्मायन अवधि शामिल हैं। मलेरिया एक परजीवी संक्रमण है जिसमें चिकनगुनिया और डेंगू के समान लक्षण होते हैं।

यह भी पढ़ें: Bihar में अब होगा बवाल, नीतीश सरकार मानती है कश्मीर अलग देश, 7वीं कक्षा के पेपर में पूछ दिया ऐसा सवाल

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