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Jharkhand Central University में वाद-विवाद व पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, सुदूरपूर्व के देशों के साथ आर्थिक एवं राजनयिक संबंधों से रूबरू हुए छात्र

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Jharkhand Central University: झारखण्ड केंद्रीय विश्वविद्यालय (Jharkhand Central University) में गांधी स्टडी सेंटर के द्वारा महात्मा गांधी, उनके विचार और दर्शन पर वाद – विवाद प्रतियोगिता , लेख -लेखन प्रतियोगिता एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. वाद विवाद प्रतियोगिता में विभिन्न विभागों के 10 बच्चों ने “गांधीजी की अति अहिंसावादिता हिंसा से भी ज्यादा हिंसक थी ” विषय पर अपने विचार व्यक्त किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आयोजित की गई । वादविवाद प्रतियोगिता के अलावा “गांधीजी का जीवन : आज के युवा के लिए एक सन्देश ” विषय पर लेख लेखन एवं “गांधीजी के जीवन, गांधीजी के विचार एवं गांधी दर्शन” विषय पर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में छात्रों ने बढ़ चढ़कर  हिस्सा लिया। वाद विवाद , लेख लेखन एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में लगभग 40 छात्रों ने भाग लिया और तार्किक तरीके से अपने विचार व्यक्त किये।

“ज्यादा से ज्यादा छात्रों एवं शिक्षकों को जोड़ा जाएगा”

प्रतियोगिता के आयोजक शशि कुमार मिश्रा, संहिता सुचरिता एवं तुलसी दास माझी ने बताया कि झारखण्ड केंद्रीय विश्वविद्यालय में गाँधी स्टडी सेंटर के तहत ज्यादा से ज्यादा छात्रों एवं शिक्षकों को जोड़ा जाएगा,  ताकि गाँधी दर्शन अध्ययन के दायरे को विश्वविद्यालय में एक नया आयाम दिया जा सके।

उदारीकरण की नीति के बाद के परिदृश्य पर हुई चर्चा 

झारखण्ड केंद्रीय विश्वविद्यालय सुदूरपूर्व भाषा विभाग एवं अंतरराष्ट्रीय छात्र एवं शोध प्रकोष्ठ के द्वारा भारत के पूर्व राजनयिक एवं दक्षिण कोरिया में भारत के राजदूत रहे स्कंद रंजन तायल का रीसेंट डाइनामिज़्म इन इंडिया-ईस्ट एशिया इकनोमिक एंड डिप्लोमेटिक डेवलपमेंट पर व्याख्यान का आयोजन किया। मिस्टर तायल ने 1991से लेकर 2022 तक हुए आर्थिक एवं राजनयिक प्रगति पर रोशनी डालते हुए कहा की भारत और सुदूरपूर्व के देशों के साथ कुछ गतिरोध को छोड़ दें, तो बहुत तेजी के साथ प्रगति हुई है। उन्होंने 1991 के उदारीकरण की नीति के बाद भारत और चीन , कोरिया, जापान, सिंगापुर इत्यादि देशों के साथ आर्थिक एवं राजनयिक संबंधों में आये बदलाव के ऊपर अपनी बात रखी।

“आपसी संबंध में गति आना जरुरी”

एशियाई समिट की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि  किस तरह से भारत, चीन और कोरिया एवं अन्य पूर्वी देशों के आपसी सम्बन्ध में गति आना जरुरी है। उन्हें दक्षिण कोरिया के बीच हुए कम्प्रेहैन्सिव इकनोमिक पार्टर्नशिप एग्रीमेंट की प्रगति पर भी बात की।

कोरियाई भाषा जानने वालों की पड़ेगी जरूरत-तायल 

एम्बेसडर तायल ने बच्चों प्रश्न देते हुए कहा कि  भारत को चीन और दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले पावर डिप्लोमेसी पर और ज्यादा ध्यान देना होगा और उसके लिए चीनी भाषा और कोरियाई भाषा जानने वाले लोगों की बहुत ज्यादा जरुरत है और भविष्य में और ज्यादा जरुरत पड़ेगी।

व्याख्यान का ये है उद्देश्य 

व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य विश्विद्यालय के छात्रों और शोधार्थियों को भारत और सुदूरपूर्व के देशों के साथ आर्थिक एवं राजनयिक संबंधों में हो रहे प्रगति और पनप रहे गतिरोध से रूबरू करना था। इस व्याख्यान में डीन अकादमिक अफेयर्स प्रोफ. मनोज कुमार, सुदूरपूर्व विभाग के सभी शिक्षक एवं लगभग 150 छात्र उपस्थित थे।

इनकी रही भूमिका 

वाद -विवाद प्रतियोगिता में डॉ. सुचेता सेन चौधरी , डॉ. नागपावन डॉ. सुशील शुक्ला में लेख लेखन में डॉ. रंजीत , डॉ. चंद्रशेखर द्विवेदी एवं डॉ. राजेश तथा पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में डॉ. कोंचोक ताशी , डॉ. भूपेंद्र एवं डॉ. रवि रंजन जज की भूमिका निभाई।

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