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रांची के RIMS में 10 दिनों से पड़ा है Canadian Photographer का शव, Refrigerator खराब होने से सड़ रही है लाश, प्रशासन की बड़ी लापरवाही

मार्कस लेदर डेल (Marcus Leather Dale)

Ranchi : मैक्लुस्कीगंज में 23 अप्रैल को आत्महत्या कर मरने वाले 70 वर्षीय अमेरिकी नागरिक मार्कस लेदर डेल (Marcus Leatherdale) का शव उनके दोस्त को सौंपा जाएगा. जिला प्रशासन को अमेरिकी दूतावास से एक ई-मेल मिला है और प्रक्रिया शुरू कर दी है।

समाचार प्लस से बात करते हुए, मैकलुस्कीगंज में कैलाश बंगले के मालिक कैलाश यादव, जहां मार्कस रुके थे, उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि जिला प्रशासन को अमेरिकी दूतावास से एक ई-मेल मिला है और वे शव को उन्हें सौंप देंगे।

मार्कस के करीबी दोस्त कैलाश प्रसाद यादव ने कहा, “मैंने शुक्रवार को रांची में डीसी कार्यालय में अधिकारियों से मुलाकात की और कहा गया है कि रांची एसएसपी को सौंपने के संबंध में एक पत्र भेजा जाएगा।”

मैक्लुस्कीगंज थाना प्रभारी जंग बहादुर राणा ने कहा, ‘यादव को वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को बुलाया था और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद हम शव को उन्हें सौंप देंगे।’

dead body of canadian photographer marcus leather dale is rotting in ranchi rims
dead body of canadian photographer marcus leather dale is rotting in ranchi rims

 

हालाँकि, शरीर का क्षय जारी है क्योंकि रिम्स के मुर्दाघर में प्रशीतन इकाई अभी भी खराब है।
यादव ने कहा, “24 अप्रैल को (शव परीक्षण के बाद) शरीर सड़ना शुरू हो गया था क्योंकि रेफ्रिजरेशन ठीक से काम नहीं कर रहा था। मुर्दाघर के एक कर्मचारी ने पुष्टि की कि मार्कस का शरीर अच्छी स्थिति में नहीं है। रिम्स के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ शैलेश त्रिपाठी ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ हिरेंद्र बिरुआ से संपर्क करने के लिए कहा, जिन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया। 25 अप्रैल को, जब समाचार प्लस ने मुर्दाघर के रेफ्रिजरेशन के बारे में पूछताछ की, तो डॉ त्रिपाठी ने स्वीकार किया कि इसमें समस्याएँ थीं।

आज सुबह समाचार प्लस से दोबारा बातचीत में कैलाश प्रसाद यादव ने बताया की उन्हें तड़के सुबह DC कार्यालय से कॉल आया था की वो सम्बंधित थाने में बात कर लें. जिसके बाद जब कैलाश ने थाने में बात की तो थानेदार ने उन्हें एक बार फिर आवेदन देने को कहा, कैलाश ने लिखित आवेदन थाने में जमा करा लिया है लेकिन वो अपने दोस्त मार्कस लेदर डेल के शव के साथ जो अमानवीय व्यवहार RIMS प्रबंधन की और से किया जा रहा है उसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा है की मेरे दोस्त ने जो किया वो गलत है लेकिन उनके जाने के बाद उनके शव के साथ जो हो रहा है वो उससे भी ज्यादा गलत है.

यूं तो झारखंड के मंत्री सूबे के सबसे बड़े अस्पताल कहे जाने वाले रिम्स की तारीफों के पूल बांधते थकते नज़र नहीं आते, लेकिन एक विदेशी नागरिक के शव को लगभग 10 दिनों तक अमानवीय स्थिति में छोड़ने की जिम्मेदारी किसके सिर पर होगी। अगर एक विदेशी नागरिक के शव के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है तो ये सोचने वाली बात की झारखंड के लोगों के साथ किस तरीके का व्यवहार होगा, रिम्स प्रबंधन को इस और अपना ध्यान आकर्षित करने की जरुरत है.

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मार्कस लेदर डेल (Marcus Leatherdale)

 

 

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