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Cryptocurrency News: शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरेंसी पर विधेयक ला सकती है सरकार, जानें आखिर यह क्रिप्टोकरेंसी है क्या ?

Cryptocurrency News: शीतकालीन सत्र में विधेयक ला सकती है सरकार

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस झारखंड -बिहार
क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को लेकर सोमवार संसदीय पैनल की पहली बैठक हुई. जयंत सिन्हा की अगुवाई में हुई इस बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि क्रिप्टोकरेंसी को पूरी तरह से बैन नहीं किया जा सकता है. इसे सही तरीके से रेग्युलेट करने की जरूरत है. बैठक में कुछ सदस्यों ने क्रिप्टोकरेंसी में निवेशकों के निवेश की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जाहिर की है. संसदीय स्थाई समिति के सदस्यों ने सरकार के अधिकारियों से उनके समक्ष उपस्थित होकर क्रिप्टोकरेंसी को लेकर उनकी चिंताओं को दूर करने को कहा है.

29 नवंबर से शुरू होगा शीतकालीन सत्र

सरकार संसद के 29 नवंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में Cryptocurrency पर विधेयक ला सकती है. सूत्रों ने यह जानकारी दी. क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है. इसका इस्तेमाल निवेशकों को भ्रामक दावों के साथ आकर्षित करने और आतंक के वित्तपोषण के लिए किए जाने की आशंका है.

समिति के सदस्यों ने सरकारी अधिकारियों से की ये मांग

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, क्रिप्टोकरेंसी को लेकर हुई इस मीटिंग में शामिल हुए वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य चाहते हैं कि अब इस पूरे मामले में सरकारी अधिकारी सामने आएं और अपनी-अपनी उनकी चिंताओं पर अपनी राय दें. बताते चलें कि क्रिप्टो फाइनेंस को लेकर निवेश क्षमता और जोखिमों के बारे में विभिन्न पक्षों की दिलचस्पी और चिंताएं हाल के दिनों में तेजी से बढ़ी हैं. यह संसदीय समिति आईआईएम अहमदाबाद के शिक्षाविदों से भी सुझाव लेगी.

अभी क्रिप्टोकरेंसी को रेग्युलेट करने का नियम नहीं

अभी देश में क्रिप्टो करेंसी को लेकर कोई विशेष नियमन नहीं हैं. न ही देश में इस पर प्रतिबंध ही लगा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को क्रिप्टो करेंसी पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी. इससे संकेत मिलता है कि सरकार इस मुद्दे से निपटने को सख्त नियामकीय कदम उठा सकती है.

कैबिनेट से मंजूरी के बाद पेश किया जाएगा विधेयक

सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक निवेशक संरक्षण पर केंद्रित होगा क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी जटिल संपत्ति वर्ग में आती है. केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद सरकार का इस विधेयक को शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह में पेश करने का इरादा है.

सरकार और RBI जता चुके हैं चिंता

वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण ने अगस्त में कहा था कि उन्हें क्रिप्टोकरेंसी विधेयक पर मंत्रिमंडल की मंजूरी का इंतजार है. सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दोनों हाल के महीनों में क्रिप्टोकरेंसी पर चिंता जता चुके हैं. संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर को शुरू होकर 23 दिसंबर को संपन्न होगा.

क्रिप्टोकरेंसी है क्या?

Cryptocurrency दो शब्दों से मिलकर बना शब्द है. Crypto जोकि लैटिन भाषा का शब्द है जो cryptography से बना है और जिसका मतलब होता है, छुपा हुआ/हुई. जबकि Currency भी लैटिन के currentia से आया है, जो कि रुपये-पैसे के लिए इस्तेमाल होता है. तो क्रिप्टोकरेंसी का मतलब हुआ छुपा हुआ पैसा. या गुप्त पैसा. या डिजिटल रुपया.  आमतौर पर क्रिप्टोकरेंसी एक तरह का डिजिटल पैसा है, जिसे आप छू तो नहीं सकते, लेकिन रख सकते हैं. यानी यह मुद्रा का एक डिजिटल रूप है. यह किसी सिक्के या नोट की तरह ठोस रूप में आपकी जेब में नहीं होता है. यह पूरी तरह से ऑनलाइन होता है.

हर देश की अपनी मुद्रा (Currency) है. जैसे कि भारत के पास रुपया, अमेरिका के पास डॉलर, सउदी अरब के पास रियाल, इंग्लैंड के पास यूरो है. हर देश की अपनी-अपनी करेंसी हैं. यानी एक ऐसी धन-प्रणाली जो किसी देश द्वारा मान्य हो और वहां के लोग इसके इस्तेमाल से जरूरी चीजें खरीद सकते हों. यानी जिसकी कोई वैल्यू हो, करेंसी (Currency) कहलाती है.

किसने बनाई और क्यों बनाई?

बहुत सारे लोग मानते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी 2009 में सतोशी नाकामोतो ने शुरू किया था, लेकिन ऐसा नहीं है. इससे पहले भी कई निवेशकों ने या देशों ने डिजिटल मुद्रा पर काम किया था. यूएस ने 1996 मुख्य इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड बनाया था, ऐसा गोल्ड जिसे रखा नहीं जा सकता था, लेकिन इससे दूसरी चीजें खरीदी जा सकती थीं. हालांकि 2008 इसे बैन कर दिया गया. वैसा ही 2000 की साल में नीदरलैंड ने पेट्रोल भरने के लिए कैश को स्मार्ट कार्ड से जोड़ा था.

Bitcoin सबसे महंगी Virtual Currency

आसान भाषा में कहें तो क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल कैश प्रणाली है, जो कम्प्यूटर एल्गोरिदम पर बनी है. यह सिर्फ डिजिट के रूप में ऑनलाइन रहती है. इस पर किसी भी देश या सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है. शुरुआत में इसे अवैध करार दिया गया था. लेकिन बाद में Bitcoin की बढ़ती लोकप्रियता के चलते इसे कई देशों में लीगल कर दिया गया है. कुछ देश तो अपनी खुद की क्रिप्टोकरेंसी ला रहे हैं. Bitcoin दुनिया की सबसे महंगी वर्चुअल करेंसी है.

कैसे काम करती है Cryptocurrency?

पिछले कुछ सालों से क्रिप्टोकरेंसी मुद्राओं की लोकप्रियता बढ़ी है. इन्हें ब्लॉकचेन सॉफ़्टवेयर के ज़रिए इस्तेमाल किया जाता है. ये डिजिटल मुद्रा इनक्रिप्टेड यानी कोडेड होती हैं. इसे एक डिसेंट्रेलाइज्ड सिस्टम के जरिए मैनेज किया जाता है. इसमें प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल सिग्नेचर द्वारा वेरिफिकेशन होता है. क्रिप्टोग्राफी की मदद से इसका रिकॉर्ड रखा जाता है. क्षितिज बताते हैं कि इसके जरिए खरीदी को क्रिप्टो माइनिंग (Cryptocurrency Mininig) कहा जाता है क्योंकि हर जानकारी का डिजिटल रूप से डेटाबेस तैयार करना पड़ता है. जिनके द्वारा यह माइनिंग की जाती है, उन्हें माइनर्स कहा जाता है.

क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारिक एक वर्चुअल करेंसी है जो क्रिप्टोग्राफी द्वारा सुरक्षित है. यह सारा काम पावरफुल कंप्यूटर्स के जरिए होता है. क्षितिज तो यहां तक कहते हैं कि इसके कोड को कॉपी करना लगभग नामुमकिन है.

कैसे होता है लेन-देन?

क्रिप्टोकरेंसी में जब भी कोई ट्रैंजेक्शन होता है तो इसकी जानकारी ब्लॉकचेन में दर्ज की जाती है, यानी उसे एक ब्लॉक में रखा जाता है. इस ब्लॉक की सिक्योरिटी और इंक्रिप्शन का काम माइनर्स का होता है. इसके लिए वे एक क्रिप्टोग्राफिक (Cryptographic) पहेली को हल कर ब्लॉक के लिए उचित Hash (एक कोड) खोजते हैं.जब कोई माइनर पुख्ता hash खोजकर ब्लॉक सिक्योर कर देता है तो उसे ब्लॉकचेन से जोड़ दिया जाता है और नेटवर्क में दूसरे नोड (Compuers) के जरिए उसे वेरिफाई किया जाता है. इस प्रक्रिया को आम सहमति (consensus) कहा जाता है. अगर consensus हो गया समझिए ब्लॉक के सिक्योर होने की पुष्टि हो गई. वह सही पाया जाता है तो उसे सिक्योर करने वाले माइनर को क्रिप्टोक्वॉइन (cryptocoin) दे दिए जाते हैं. यह एक रिवार्ड है जिसे काम का सबूत माना जाता है.

कितने तरह की होती हैं?

अब दिमाग में एक सवाल यह भी उठ रहा है कि यह डिजिटल रूप में है तो कितने तरह की होती है. इसको लेकर क्षितिज पुरोहत बताते हैं कि देखा जाये तो कुल 1800 से ज्यादा क्रिप्टो मुद्राएं उपलब्ध हैं. जिन्हें आप Bitcoin के अलावा भी इस्तेमाल कर सकते हैं. एथेरियम (ETH), लिटकोइन (LTC), डॉगकॉइन (Dogecoin) फेयरकॉइन (FAIR), डैश (DASH), पीरकॉइन (PPC), रिपल (XRP) हैं.

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