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Cricket vs Politics: भारत-पाकिस्तान T20 World Cup फाइनल में पहुंच जायें तब क्या करेंगे राजनीति करने वाले?

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित ताजा आतंकी घटनाओं पर देश गुस्से में है। यह समझा जा सकता है। मगर इसको लेकर T20 World Cup में भारत और पाकिस्तान (India vs Pakistan) मैच को खत्म कर देने की राजनीति करना कितना उचित है। भारत और पाकिस्तान (India vs Pakistan) मैच नहीं होने की बात सबसे पहले भाजपा के फायर ब्रिगेड गिरिराज सिंह ने की थी। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान ने कश्मीर और सीमा पर जो हालात बना दिये हैं, उसके बाद भारत को उसके साथ मैच नहीं खेलना चाहिए। देश के कई नेताओं ने गिरिराज सिंह की तरह ही भारत और पाकिस्तान मैच पर पूर्ण विराम लगाने की बात कही है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने टी-20 विश्व कप में भारत और पाकिस्तान को लेकर सवाल भी पूछ दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा ‘क्या मोदी जी ने नहीं कहा था कि फौज मर रही है और मनमोहन सिंह की सरकार बिरयानी खिला रही है। अब 9 सैनिक मर गये और आप T20 खेलेंगे? पाकिस्तान कश्मीर में भारतीयों की जान से T20 खेल रहा है।’

देशभक्ति के लिए कही गयी हर बात सिर आंखों पर! लेकिन सिर्फ राजनीतिक चश्मे से हर बात का आंकलन सही नहीं है। सर्वप्रथम, यह कोई भारत और पाकिस्तान शृंखला नहीं है। अगर ऐसा होता तब इसका हर स्तर पर विरोध किया जाना चाहिए था। चाहे यह शृंखला भारत में होती, चाहे वह पाकिस्तान में होती या किसी तटस्थ देश में होती, हर परिस्थिति में स्वीकार नहीं होती। T20 World Cup एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है। जिन कारणों से भारत इस टूर्नामेंट का हिस्सा है, उन्हीं कारणों से पाकिस्तान भी यह टूर्नामेन्ट खेल रहा है। थोड़ी देर के लिए यह मान लिया जाये कि पाकिस्तान के विरुद्ध भारत को यह मैच छोड़ देना चाहिए। और भारत यह मैच छोड़ देता है यानी वाकओवर दे देता है। पाकिस्तान को मुफ्त में जीत और अंक दोनों हासिल हो जायेंगे। भारत न सिर्फ एक मैच हार जायेगा, बल्कि अंक भी गंवा बैठेगा। इसका असर टूर्नामेंट पर भी पड़ेगा। चलिये यह भी मान लेते हैं कि पाकिस्तान के विरुद्ध मैच नहीं खेलने के भारत के निर्णय को आईसीसी मान भी लेती है और किसी तरह की कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करती है। लेकिन क्या इसी टूर्नामेंट में यही स्थिति दोबारा नहीं आयेगी? लीग चरण में अंक गंवाने के बाद भारत किसी तरह सेमीफाइनल और फाइनल में पहुंच जाता है और यहां दोबारा उसे पाकिस्तान के साथ भिड़ना पड़ जाये, तब क्या होगा? तब क्या ये राजनेता दोबारा पीएम मोदी और बीसीसीआई पर चढ़ दौड़ेंगे? तब क्या फिर भारत पाकिस्तान को वाकओवर दे दे और अपनी आंखों के सामने पाकिस्तान को विजेता होता देखता रहे? ऐसा किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए। यह युद्ध नहीं है, फिर भी भारत का मैच से न तो पीछे हटने की इजाजत है और न ही पाकिस्तान के आगे हथियार डालने की। ऐसा किसी भी भारतवासी को मंजूर नहीं होगा। भारत पाकिस्तान से आंखों में आंखें मिलाकर खेले, उसे मैदान में परास्त करे, इससे देश का मान बढ़ेगा। देश के चंद लोगों के राजनीतिक लाभ के लिए ‘हथियार डालने’ के सुझावों से नहीं।

भारत हर स्तर पर पाकिस्तान का विरोध कर ही तो रहा है

जिन्हें यह लगता है कि भारत पाकिस्तान के साथ मैच खेलने के लिए मरा जा रहा है, उन्हें कुछ बातें भी जान लेना जरूरी है कि भारत ने खेलों में पाकिस्तान से दूरी बना कर रखी हुई है। भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी मुकाबला One Day World Cup 2019 में हुआ था। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के विरुद्ध आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2021 में खेलने की बात उठी थी। लेकिन बीसीसीआई ने यह टेस्ट सीरीज खेलने से इनकार कर दिया था। पाकिस्तान ने इसकी शिकायत आईसीसी से भी की, लेकिन बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली ने पाकिस्तान से सीरीज खेलने से साफ इनकार कर दिया।

विश्व का सबसे बड़ा T20 शो आईपीएल भी एक बहुत बड़ा उदाहरण है। आईपीएल में दुनिया भर के क्रिकेटर खेलते हैं। लेकिन पाकिस्तान के खिलाड़ियों की इस टूर्नामेंट में इंट्री नहीं है। पाकिस्तान को इस बात का मलाल भी रहता है, लेकिन भारत ने कभी इसकी परवाह नहीं की है। लेकिन यह सिर्फ राजनीति करने वालों को कौन समझाये? विश्वास करें, 24 अक्टूबर को भारत और पाकिस्तान (India vs Pakistan) मैच होगा और जरूर होगा।

यह भी पढ़ें: Indian vs Pakistan: ‘अबकी बार, भारत की हार’, ‘मुंगेरी लाल का हसीन सपना’ पाकिस्तान फिर देखा एक बार

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