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अब आया सिद्धू पहाड़ के नीचे, कांग्रेस न मनाएगी, न बात करेगी, तलाश रही विकल्प!

सिद्धू को कांग्रेस न मनाएगी न बात करेगी तलाश रही विकल्प!

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

पंजाब के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना अब नवजोत सिंह सिद्धू को भारी पड़ रहा है। बार-बार कांग्रेस की मेहबानियों को सिद्धू ने शायद पार्टी की कमजोरी समझ ली थी। लेकिन इस बार उनका दांव ‘उल्टे बांस बरेली’ हो गया है। सिद्धू की नादानियों (धमकियों) को कांग्रेस बार-बार नजरअंदाज कर रही थी। लेकिन इस बार कांग्रेस ने सिद्धू के विरुद्ध कड़ा रुख अपना लिया है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह प्रकरण के बाद सिद्धू को गलतफहमी हो गयी थी कि पार्टी के अंदर वह जैसा चाहेंगे वैसा करेंगे, पार्टी उनके ‘साथ’ है। लेकिन इस बार उनका ‘दांव’ उल्टा पड़ चुका है।

पंजाब में सियासी घमसान के बीच सिद्धू ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से इस्तीफा तो दे दिया है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि पार्टी आलाकमान को सिद्धू का यह रवैया नागवार गुजरा है। इस प्रकरण पर आलाकमान कड़ा रवैया अपनाते हुए सिद्धू को मनाने का कोई प्रयास नहीं कर रहा है। यहां तक कि अपनी तरफ से बातचीत की कोई पहल का भी प्रयास नहीं कर रहा है। पार्टी शायद सिद्धू को अपने निर्णय पर विचार करने का मौका देना चाहती है, इसीलिए उसने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। भले ही आलाकमान ने सिद्धू का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है, लेकिन  पंजाब में नये प्रदेश अध्यक्ष के लिए मंथन शुरू हो चुका है। सूत्रों की मानें तो इस दौड़ में रवनीत सिंह बिट्टू का नाम भी सामने आ चुका है।

आलाकमान की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस प्रकरण को लेकर पंजाब प्रभारी हरीश रावत बुधवार को चंडीगढ़ जाने वाले थे, लेकिन फिलहाल उनका दौरा टल गया है। यानी इस बार कांग्रेस नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर हुई किरकिरी को बर्दाश्त नहीं करेगी।

कैबिनेट की बैठक से भी मिलेगा संकेत

बुधवार को सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने कैबिनेट की बैठक बुलाई है। कैबिनेट में शामिल होने वाले मंत्रियों से भी उनके रुख का अंदाजा लगेगा। खबरों की मानें तो आज की कैबिनेट में जो मंत्री नहीं आएंगे, उन पर भी कार्रवाई हो सकती है।

सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का कैप्टन अमरिन्दर ने किया था विरोध

सिद्धू आज कांग्रेस के सर पर नाचने का प्रयास कर रहे हैं तो इसमें भी कहीं न कहीं पार्टी भी दोषी है। कांग्रेस को कैप्टन अमरिंदर सिंह पसन्द नहीं थे, यह बात तो ठीक है, लेकिन सिद्धू को उसने बेवजह की तरजीह दी। सिद्धू को जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा रहा था तब कैप्टन अमरिन्दर ने इसका विरोध किया था, इसके बावजूद सिद्धू को इसी साल 23 जुलाई को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। अब तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। सिद्धू के इस्तीफे के बाद उनके समर्थन में चन्नी सरकार के मंत्री सहित कई बड़े नेताओं के इस्तीफों की झड़ी लग गयी। सिद्धू के करीबी माने जाने वाली एक मंत्री के साथ ही अन्य तीन कांग्रेसी नेताओं ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया।

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