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Congress Protest News: कांग्रेस की ‘काली’गरी! महंगाई पर ड्रामेबाजी करने वाली कांग्रेस भूल गयी इंदिरा गांधी के राज का वह महंगाई वाला गाना

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Congress Protest News: आज कांग्रेस इतनी लाचार हो गयी है, उसे समझ नहीं आ रहा है कि उसके लिए क्या सही है या उसे करना क्या चाहिए। हालत यह है कि शीर्ष नेतृत्व की बेबसी पार्टी के दूसरे नेताओं और कार्यकर्ताओं को भुगतनी पड़ रही है। उन्हें जब-तब अपने सारे काम-धाम छोड़ कर सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। आज का ही ले लीजिए, काले कपड़ों में कांग्रेसी सदन से लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं। इन कांग्रेसियों से कोई पूछे कि विरोध-प्रदर्शन करने के लिए काले कपड़े पहनने की क्या जरूरत होती है? काला कपड़ा ही जब विरोध का प्रतीक है, तो उसे सिर्फ पहन लेना ही पर्याप्त है, उसके बाद ‘हुड़दंग’ करने की क्या जरूरत है।

सच्चाई इससे अलग है। कहने को तो कांग्रेस महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सड़कों पर उतरी है। मगर, महंगाई के नाम पर विरोध तो बहाना है, सबको पता है कि विरोध क्यों हो रहा है। विरोध की जड़ में ईडी की कार्रवाई है। दुविधा यह है कि अपने आप को पाक-साफ कहने वालों को खुद के ‘सच्चा’ होने का ही भरोसा नहीं कि तो फिर ईडी उन्हें पाक-साफ कैसे जाने दे सकती है। कांग्रेसी और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अच्छी तरह समझ चुका है कि ‘पानी अब सिर से ऊपर’ जा चुका है। लेकिन क्या वाकई में इस हुड़दंग करने का कोई फायदा होगा? थोड़ी देर के लिए मान लिया जाये कि ‘नेशनल हेराल्ड’ में फंसे कांग्रेस के शीर्ष नेता कल को जेल चले जाते हैं तो क्या फिर कांग्रेस के पास सड़कों पर सिर्फ ‘रोने’ के अलावा और कोई काम नहीं रह जायेगा?

यह भी मान लेते हैं कि कांग्रेस आज सचमुच में सिर्फ महंगाई के नाम पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। तो क्या महंगाई सिर्फ आज और सिर्फ आज का ही मुद्दा है। देश के तमाम कांग्रेसियों के साथ उसके तमाम बड़े नेताओं को अच्छी तरह याद दिला देना चाहता हूं कि भारतीय फिल्मों में लाखों गानों में दो गाने ऐसे हैं जो महंगाई के ऊपर गाये गये हैं। लेकिन इत्तेफाक देखिये, ये दोनों गाने कांग्रेस के राज में ही बने और खूब बजे। एक गाना 1974 में आयी फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ का है- ‘… बाकी कुछ बचा तो महंगाई मार गयी’। इस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का तीसरा कार्यकाल चल रहा था। और दूसरा गाना है 2010 में आयी आमीर खान की फिल्म ‘पीपली लाइव’ का है- ’सखी सैंया तो खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाये जात है’। इस समय देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे और यह उनका दूसरा काल चल रहा था। हैरत की बात है कि इन दोनों गानों के अलावा महंगाई के ऊपर कभी और कोई गाना नहीं बना है और महंगाई का रोना रो कौन रहे हैं- कांग्रेसी।

महंगाई है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। हम सभी इसकी चपेट में है। कांग्रेस के लिए ज्यादा बेहतर होगा कि वह महंगाई पर गाल बजाना बंद करके महंगाई की परिस्थितियों को अच्छी तरह से समझे और जनता को उससे रूबरू कराये तभी यह माना जायेगा कि एक राष्ट्रीय पार्टी होने की वह अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभा रही है। वरना, 70-80 के दशक की यह जनता नहीं है। सच्चाई क्या है और ड्रामेबाजी क्या है, उसे खूब पता है।

यह भी पढ़ें: ED ने कांग्रेस को महंगाई याद दिलाई, क्या हैं इस ‘हल्ला बोल’ के मायने?

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