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डूबती नैया को बचाने की जुगत में Congress, झारखंड -बिहार के संगठन का भी बदलेगा चेहरा

Congress

Desk :  सबसे बुरे दौर से गुजर रही देश की सबसे पुरानी पार्टी इन दिनों अपनी पुरानी पहचान फिर से बनाने के लिए पसीना बहा रही है। लगातार दो लोकसभा चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करने वाली Congress की सरकार पांच राज्यों में सिमट कर रह गई है। अब चूंकि 2024 में लोकसभा चुनाव और यूपी और पंजाब में विधानसभा चुनाव भी होने हैं, लेकिन कांग्रेस की मुश्किलें खत्म होने के नाम नहीं ले रही हैं। राज्यों में गुटबाजी चरम पर है। पंजाब कांग्रेस के विवाद को करीब एक माह तक चली कोशिशों के बाद अभी सुलझाया गया है। पार्टी ने नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपी है। वहीं दूसरे राज्यों में आंतरिक कलह जोर पकड़ने लगी है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों की नियुक्ति है।

यूपी Congress में भी सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा है. वहां भी एक- एक कर नेता कांग्रेस छोड़बीजेपी का दामन थाम रहे हैं। पार्टी का आंतरिक झगड़ा असम, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड सहित कई दूसरे प्रदेशों में चल रहा है। बिहार का अंदाजा तो इसी से लगाया जा सकता है कि पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा की है। ताकि, किसी तरह का विवाद न हो।

पश्चिम बंगाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी से प्रदेश कांग्रेस के कई नेता नाराज हैं। वह चौधरी को हटाकर नया अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं। पर नया अध्यक्ष कौन हो, इसको लेकर एक राय नहीं है। सभी अपनी-अपनी दावेदारी कर रहे हैं।

बिहार और झारखण्ड कांग्रेस में भी गुटबाजी और अंतर्कलह

बिहार और झारखण्ड की बात करें तो राज्यों में इसकी स्थिति पिछलग्गू वाली हो गई है. जहां झारखण्ड में कांग्रेस जेएमएम की पिछलग्गू बनी हुई है, वहीं बिहार में राजद की. बिहार कांग्रेस के अंदर जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसकी प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। पार्टी आलाकमान बिहार कांग्रेस के नए अध्यक्ष पद पर किसी तेज तर्रार और अनुभवी व्यक्ति को आसीन करने के संबंध में फैसला ले सकती है।

कौन होगा वर्तमान बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का विकल्प

कांग्रेस अध्यक्ष बदले जाने की जानकारी मिलने के साथ ही बिहार कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने अपनी दावेदारी के लिए दिल्ली दरबार में दौड़ लगानी शुरू कर दी है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डा. मदन मोहन झा की जगह किसे लिया जाए, इसके लिए आलाकमान जाति समीकरणों के साथ ही ऐसे चेहरे की ओर देख रहा है जिस पर भरोसा कर पार्टी की कमान सौंप सके। पार्टी जानती है कि निकट भविष्य में बिहार में चुनाव संभावित नहीं, लिहाजा वह ऐसे चेहरे पर विचार कर ही है जिसकी बिहार में पकड़ बेहतर हो और राजद से जिसके संबंध में बेहतर हो। ऐसे मापदंड पर खुद को खरा मानने वाले नेता दिल्ली तक चक्कर लगा रहे हैं।

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए ये हैं रेस में

पार्टी सूत्रों की मानें, तो बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए तारिक अनवर का नाम सबसे आगे चल रहा है। तारिक सोनिया और राहुल गांधी के चहेते नेता होने के साथ ही पार्टी के केरल प्रभारी भी हैं। तारिक अनवर के अलावा नाम जो पार्टी के नेताओं की जुबान पर है वह नाम है पार्टी के कद्दावर नेता डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह का जो भूमिहार जाति से आते हैं। हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं में उनके नाम पर असहमति है.

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कुटुंबा विधायक डा. राजेश राम भी हैं चर्चा में 

अध्यक्ष पद की रेस में एक और नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है और वह नाम है पार्टी के दो बार के विधायक डा. राजेश राम का। कुटुंबा से दो बार पार्टी के लिए जीत दर्ज कराने वाले राजेश राम काफी पुराने नेता हैं और अनुसूचित जाति से आते हैं. ये लगातार Congress में बने रहे हैं।

झारखंड कांग्रेस नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर इनके नाम आ रहे सामने 

झारखंड में लगातार हाशिये पर जा रही कांग्रेस को 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में नया जीवन मिला। मजबूत क्षेत्रीय पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ तालमेल करने के कारण उसके 16 विधायक जीतने में सफल हुए। हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्रिमंडल में चार अहम पदों की जिम्मेदारी भी मिली।

झारखंड Congress में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कुछ नाम सामने आ रहे हैं, उनमें सुबोधकांत सहाय का नाम सबसे आगे है। इसके अलावा डॉ. अजय और खूंटी चुनाव में सबको चौंकाने वाले कालीचरण मुंडा का नाम भी अध्यक्ष पद के लिए चल रहा है। कालीचरण मुंडा पिछला लोकसभा चुनाव लहर के बावजूद महज एक हजार के करीब मतों से हारे थे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को कांटे की टक्कर दी थी।

 दोबारा अध्यक्ष बनने की होड़ में डॉ अजय कुमार

झारखंड कांग्रेस के अंदर प्रदेश अध्यक्ष को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गयी है। नेता दिल्ली दरबार में लॉबिंग कर रहे हैं। केंद्रीय नेताओं के पास गोटी सेट करने में जुटे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार की वापसी के बाद प्रदेश कांग्रेस में एक नया एंगल बन गया है। डॉ अजय कुमार दोबारा अध्यक्ष बनने की होड़ में हैं।

दूसरी ओर, महागामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह हाल के दिनों में दिल्ली दरबार में मजबूती के साथ उभर कर सामने आयी हैं. युवा Congress से लेकर विधायक तक की सफर में सांगठनिक कामकाज से दिल्ली के नेताओं को प्रभावित भी किया है हाल के दिनों में राजनीतिक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बढ़ी है.

विधायक विक्सल को केंद्रीय नेतृत्व आगे कर सकता है 

दीपिका पांडेय केंद्रीय नेताओं के लगातार संपर्क में हैं. केंद्रीय नेतृत्व ने दीपिका पांडेय को केंद्रीय सचिव को जवाबदेही दी है. ऐसे में अटकलें हैं कि शायद प्रदेश में मौका ना मिले. वहीं, डॉ इरफान अंसारी जैसे विधायक भी अपने हिसाब से घेराबंदी कर रहे हैं. लेकिन, दिल्ली में उनकी स्थिति बहुत मजबूत नहीं है. इसके अलावा कांग्रेस विधायक व युवा कांग्रेस में जिलाध्यक्ष रहे विक्सल कोंगाड़ी का नाम भी एक खेमा से आ रहा है. विधायक विक्सल को केंद्रीय नेतृत्व आगे कर चौंका सकता है.

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