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सरकार के तीन साल पूरे, CM Hemant Soren ने गिनाई उपलब्धियां, विपक्ष को भी निशाने पर लिया

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झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की सरकार के 3 वर्ष पूरे हो गए हैं. इस दौरान हेमंत सरकार की उपलब्धियों की चर्चा भी हो रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने 3 साल के कार्यकाल को ऐतिहासिक बताया है. उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने अपने कार्यकाल में आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों के कल्याण के लिए कई काम किए हैं. उन्होंने 1932 के खतियान आधारित स्थानीयता नीति को भी अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक कहा.

कोरोना की वजह से सरकार का गोल्डन टाइम हुआ प्रभावित

तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) ने कहा कि इस सरकार ने तीन साल भले ही पूरा किया है. लेकिन गोल्डन टाइम कोरोना संक्रमण के कारण बर्बाद हो गए. हालांकि, पिछले एक साल में जनहित में एक से बढ़कर एक निर्णय लिए और योजनायें बनाई. इसका लाभ आने वाले सालों में दिखेगा. उन्होंने कहा कि इस सरकार ने जो चुनौतियां झेली हैं, वह पिछले 20 सालों में किसी सरकार ने झेला होगा. इसके बावजदू हमारे लक्ष्य नहीं डगमगाये. उन्होंने कहा कि  कोरोना ने एक बार फिर से दस्तक दे दी है. ये एक चिंता का विषय है और हमने अब लोगों को ध्यान में रखते हुए काम करना है. हम ना हतोत्साहित हुए है और ना ही अपने लक्ष्य से हटें हैं. हमने लोगों से जो भी वादे किये हैं, हम उसे पूरा करेंगे.

आने वाले दिनों में झारखंड की छवि बदलेगी

उन्होंने आगे कहा कि राज्य गठन होने के बाद कोई भी ऐसी नीति नहीं बनी जिससे राज्य विकास की ओर जा सके. लेकिन हमारी सरकार ने ऐसे कार्य हुए हैं जिससे आने वाले दिनों में झारखंड की छवि बदलेगी और लोग अपने हुनर दक्षता काबिलियत और मेहनत के बल पर आगे बढ़ेंगे. हमारी सरकार बेहतर रास्ते और व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध है.

सिर्फ आदिवासियों की राजनीति नहीं करता

स्थानीय और नियोजन नीति को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा इस नीति का मकसद था कि कैसे सामान्य वर्ग को आरक्षण मिल सके. विपक्ष कहता है कि हम सिर्फ आदिवासियों की राजनीति करते हैं लेकिन ऐसा नहीं है. राज्य के हर वर्ग और हर तबके के लोग हमारी जिम्मेदारी है और इसी को लेकर ये नियोजन नीति लाई गई थी. यहां SC-ST सभी सुरक्षा घेरे में आते हैं. लेकिन 40% ऐसे हैं जो सामान्य वर्ग हैं. यही सामान्य वर्ग को मजबूत करने की हमारी मंशा थी. उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ आदिवासियों की राजनीति नहीं करता हूं. हर वर्ग कि लोगों को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है. कोर्ट ने जो निरस्त किया है, उसका कानूनी आकलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि पूर्व के सरकार में 2016 में शिक्षक बहाली की नियुक्ति में 75 परसेंट लोग बाहर के थे.

‘हर नियुक्ति होगी’

नौकरियों को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण क्षेत्र के नौजवान सबसे अधिक नौकरियां आर्मी में जाते हैं. रेलवे में और बैंकों में हमारे ग्रामीण क्षेत्र के जवान बड़े पैमाने में प्रतिनियुक्त होते थे, लेकिन आज उन सारी नौकरियों की हालत किसी से छुपी नहीं है. केंद्र सरकार के निर्णय से देश में क्या वातावरण पैदा हुआ, यह सब लोगों ने देखा. आखिर कब तक आप किसी को दबा कर रख सकते हैं. एक्शन का रिएक्शन होगा. आज केंद्र की नीतियों की वजह से स्थिति ऐसी उत्पन्न हुई है कि चपरासी की नियुक्ति में ग्रेजुएट और पीएचडी का नौजवान फॉर्म भर रहे हैं. लेकिन हमारे नौजवानों का भविष्य खराब ना हो इसे लेकर भी हमारी चिंताएं हैं. हमने उनको आश्वस्त किया है कि हर नियुक्ति होगी. जो आरक्षित कोटे के लोग हैं वह सुरक्षित हैं.

महिलाओं का उत्पीड़न मेरे लिए ही नहीं, देश के लिए चिंता का विषय

राज्य में महिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं पर हेमंत सोरेन ने कहा, महिलाओं का उत्पीड़न मेरे लिए ही नहीं, देश के लिए चिंता का विषय है. कई वर्षों से महिलाओं का उत्पीड़न होता आ रहा है. वर्तमान में चेहरा बदला हुआ है और घृणात्मक उत्पीड़न हो रहा है.

कुछ अधिकार और हक राज्य के स्थानीय लोगों को ही मिलने चाहिए

उन्होंने कहा कि नौजवानों का भविष्य खराब ना हो, उनकी भी हमें चिंता है. आरक्षित लोग, बिना स्थानीयता नीति या नियोजन नीति के भी सुरक्षित हैं. नियोजन और नियुक्तियों में बाहरी लोग कम-से-कम आएं, इस पर विचार करेंगे.हेमंत सोरेन ने कहा, कुछ अधिकार और हक राज्य के स्थानीय लोगों को ही मिलने चाहिए. थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरियों में भी राज्य के बाहर से लोग आने लगें तो इससे बड़ा दुर्भाग्य उस राज्य के लिए क्या हो सकता है. कानून में गरीब आदिवासी,दलित,पिछड़ों को चुननेवाले कौन हैं? कितने जजेज हैं आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग से हैं, ये भी बता दीजिए.

आदिवासी और दलित के विकास को लेकर कही ये बात

आदिवासी और दलित के विकास को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जेल में कितने आदिवासी, पिछड़े और दलित बंद हैं? आदिवासी और दलित के विकास के लिए संविधान में शक्तियां दी गई . इसके बावजूद वह बढ़ नहीं पा रहे हैं? उसके पीछे क्या वजह है? हमने जो बिल पास किया था. उसे नौवीं अनुसूची में डालने के लिए कहा था ताकि खुराफाती लोग इसे कोर्ट में जाकर उसको चुनौती ना दे पाएं और इस पर और सुरक्षा कवच लगा पाए.

‘आदिवासी रेजिमेंट’ पर बोले आदिवासियों को सम्मान मिले

पूर्वी क्षेत्र के मुख्यमंत्रियों की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह से पंजाब और बिहार रेजीमेंट्स की तरह आदिवासी रेजीमेंट्स के गठन करने की मांग की बात पर उन्होंने कहा कि आदिवासियों को सम्मान मिले. इनका इतिहास संघर्षशील रहा है. इसके अलावा बीजेपी पर निशाना साधते हुए  उन्होंने कहा कि हमें क्या करना है यह बीजेपी के दफ्तर में निर्णय नहीं होगा. हम लोग किसी के दबाव में नहीं आते. हर चुनाव में जीत का दावा करते हैं, लेकिन अब उनकी कश्ती नदी किनारे लग गई है. हमें कब क्या करना है यह हम तय करेंगे क्योंकि साल 2000 में जो करना था वो तो बीजेपी ने किया नही है.

चुनाव आयोग के लिफाफे को लेकर कही ये बात 

चुनाव आयोग के लिफाफे वाले प्रकरण के जिक्र पर उन्होंने कहा कि क्या सच है वो राज्यपाल ही जानें. मैंने हाथ जोड़ कर कहा था कि गुनहगार हूं तो सजा दो और अगर गुनहगार नहीं है, तो आशीर्वाद दो. थर्ड फ्रंट के मामले को लेकर उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक हालात में मेरी नजर है और पल-पल राजनीतिक हालात बदलते हैं. अभी पूर्वानुमान करना जल्दबाजी है.

ये भी पढ़ें: Hemant सरकार ने पूरे किए तीन साल, बांटेंगे 1200 करोड़ रुपए की सौगात

 

 

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