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Coal Crisis : झारखंड में गहराया बिजली संकट, क्या पर्व पर पसरेगा ‘अंधेरा’!

Coal Crisis : झारखंड में गहराया बिजली संकट, क्या पर्व पर पसरेगा 'अंधेरा'!

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस झारखंड -बिहार

झारखंड में बिजली का संकट गहराता जा रहा है। इसका असर स्पष्ट दिख रहा है। आपूर्ति में कमी के कारण राज्य में लोड शेडिंग करनी पड़ रही है। शुक्रवार की शाम में स्थिति में थोड़ा सुधार अवश्य नजर आया, लेकिन फिलहाल संकट समाप्त होने के आसार नजर नहीं नहीं आ रहे हैं । ऊर्जा विकास निगम का कहना है कि राज्य को डिमांड के मुकाबले काफी कम बिजली सेंट्रल पूल से मिल रही है। नेशनल पावर एक्सचेंज में भी बिजली की कमी है।

कोयले की घोर कमी

पूरे देश में बिजली की कमी बताई जा रही है। इसकी वजह से नेशनल पावर एक्सचेंज में बिजली की प्रति यूनिट दर में वृद्धि हो गई है। सामान्य तौर पर पांच रुपये प्रति यूनिट में मिलने वाली बिजली दर प्रति यूनिट 20 रुपये हो गई है। इससे झारखंड बिजली वितरण के समक्ष परेशानी आ गई है। बिजली संकट की बड़ी वजह विद्युत उत्पादक संयंत्रों को कोयले की घोर किल्लत है। झारखंड के बिजली उत्पादक संयंत्रों के पास भी सीमित कोयले का भंडार है। राज्य सरकार ने बढ़ी दर पर नेशनल पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदने की पहल की है, लेकिन इसकी उपलब्धता नहीं है।

लगभग 2200 मेगावाट है झारखंड में बिजली की मांग

झारखंड में बिजली की मांग लगभग 2200 मेगावाट है। राज्य के विद्युत उत्पादक संयंत्रों से अधिकतम 500 मेगावाट तक बिजली उपलब्ध होती है। बाकी का डिमांड सेंट्रल पूल के जरिए उपलब्ध कराई जाने वाली बिजली से होती है। इसमें डीवीसी और एनटीपीसी की इकाइयों के जरिए बिजली आती है। इसका एक बड़ा हिस्सा रेलवे को भी जाता है।

अन्य जिलों में भी पड़ रहा असर

बिजली संकट का असर राजधानी रांची से लेकर अन्य जिलों में है। शुक्रवार को रांची में लगभग 80 मेगावाट बिजली की कमी हुई। इसके कारण कई इलाकों में लोड शेडिंग की गई। रांची में रोजाना की खपत लगभग 250 मेगावाट है। लोड शेडिंग की वजह से अन्य जिलों में बिजली आठ से दस घंटे गायब रही।

एनटीपीसी से सस्ती बिजली नहीं मिल पा रही

कोयला संकट के कारण झारखंड को एनटीपीसी से मिलने वाली सस्ती बिजली नहीं मिल पा रही है। एनटीपीसी की विद्युत उत्पादन इकाइयां कोयले का संकट झेल रही है और इसकी वजह हजारीबाग के बड़कागांव स्थित पकरी बरवाडीह कोयला ब्लॉक से उत्पादन बाधित होना है। विभिन्न राजनीतिक दलों के विरोध के कारण यहां कोयला खनन का कार्य ठप पड़ गया है। अगर यह सुचारू हो गया तो एनटीपीसी के विद्युत उत्पादक संयंत्र के कोयले की किल्लत दूर हो जाएगी। झारखंड का एनटीपीसी, कहलगांव से बिजली खरीदने को लेकर समझौता है। बिजली दर भी काफी कम है। यहां से 500 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो सकती है।

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