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CM Hemant Soren चाहते हैं Deoghar AIIMS में मिले स्थानीय लोगों को रोजगार

CM Hemant Deoghar AIIMS

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देवघर AIIMS में राज्यवासियों के कम मिले रोजगार पर चिंता व्यक्त की है। सीएम हेमंत ने नये केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख एल. मांडविया को एक पत्र लिखकर देवघर AIIMS में बाहरी लोगों की नियुक्ति और राज्यवासियों की उपेक्षा पर अपनी पीड़ा उजागर की है।

सीएम हेमंत ने स्पष्ट कहा कि AIIMS जैसे प्रमुख संस्थानों की स्थापना से क्षेत्र विशेष को कई फायदे मिलते हैं। ये संस्थान चिकित्सा, देखभाल में उत्कृष्टता प्रदान करने के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा को उच्चतम गुणवत्ता प्रदान करते हैं। ऐसे संस्थानों से बड़े पैमाने पर रोजगारों का सृजन भी होता  है। देवघर AIIMS  की स्थापना का विशेष लाभ राज्य के स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा है। जबकि झारखंड सरकार अपने राज्य वासियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

सीएम हेमंत ने आगे लिखा कि हमने झारखंड राज्य स्थानीय उम्मीदवारों का रोजगार विधेयक, 2021 पेश किया है, जिसमें सरकार का लक्ष्य स्थानीय लोगों के लिए 30,000 रुपये तक के वेतन के साथ निजी क्षेत्र में 7596 आरक्षण है।

देघवर AIIMS में राज्य से बाहर के कर्मचारी मुख्य चिंता

मुख्यमंत्री की मुख्य चिंता देवघर AIIMS में झारखंड के बाहर के कर्मचारी हैं। उन्होंने लिखा, यह जनता के हित के लिए अनुकूल नहीं है। अतः जहां तक संभव हो देवघर AIIMS में स्थानीय लोगों को तरजीह दें। ताकि उन्हें ऐसे कर्मचारी मिल सकें जो उस समुदाय को बेहतर ढंग से समझ सकें और उन्हें सेवा दे सकें। ऐसा करने से देवघर AIIMS अपने राज्य को आर्थिक उत्थान में योगदान दे सकेगा।

मुख्यमंत्री हेमंत ने नये केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से अनुरोध किया कि इस अत्यंत अत्यावश्यक और महत्व के मामले पर गंभीरता पूर्वक  विचार करें और देवघर AIIMS  में झारखंड के स्थानीय लोगों का नियोजन सुनिश्चित करें।

देवघर AIIMS राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित होगा

देवघर AIIMS राज्य के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उम्मीद है कि 2022 तक एम्स पूरी तरह से बन कर तैयार हो जाएगा। इससे चिकित्सा क्षेत्र में पिछले संताल परगना समेत पूरे राज्य को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सकेगी। यही नहीं, बिहार और बंगाल के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा आसानी से मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि झामुमो आज सत्ता में है. उनके नेता को स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव विनोद कुमार मिश्र द्वारा 15 जनवरी 2015 को स्वास्थ्य सचिव भारत सरकार को प्रेषित पत्र का अवलोकन करना चाहिए जिसमें देवघर एम्स की स्थापना का स्पष्ट उल्लेख किया गया है.

श्री कुमार ने कहा कि हेमंत सरकार किसी संस्थान का नाम बदल कर, कहीं उद्घाटन में शिलापट लगा कर, कहीं केंद्र की योजना का नाम बदल कर अपनी उपलब्धि गिनाने में जुटी हुई है.

आगे उन्होंने कहा कि अच्छा तो होता कि हेमन्त सरकार अपने बलबूते कुछ योजनाओं को चालू करती तो राज्य की जनता का कुछ भला भी होता और मुख्यमंत्री का नाम भी होता. परंतु यह सरकार कुछ करना नहीं चाहती केवल झूठा ढिंढोरा पीटना जानती है.

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