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Chhath Parv 2021: खरना आज, जानें इसका महत्व और पूजन विधि

Chhath Parv 2021: Kharna today

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस झारखंड- बिहार
Chhath Parv 2021: नहाय -खाय के साथ छठ का महापर्व प्रारंभ हो गया है. अब दूसरे दिन यानी आज खरना की पंरपरा निभाई जाएगी. खरना कार्तिक शुक्ल की पंचमी को मनाया जाता है. खरना का मतलब होता है शुद्धिकरण. इसे लोहंडा भी कहा जाता है. खरना के दिन छठ पूजा का विशेष प्रसाद बनाने की परंपरा है. छठ पर्व बहुत कठिन माना जाता है और इसे बहुत सावधानी से किया जाता है. कहा जाता है कि जो भी व्रती छठ के नियमों का पालन करती है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

महत्व

इस दिन व्रती शुद्ध मन से सूर्य देव और छठ मां की पूजा करके गुड़ की खीर का भोग लगाती हैं. खरना का प्रसाद काफी शुद्ध तरीके से बनाया जाता है. खरना के दिन जो प्रसाद बनता है, उसे नए चूल्हे पर बनाया जाता है. व्रती इस खीर का प्रसाद अपने हाथों से ही पकाती हैं. खरना के दिन व्रती महिलाएं सिर्फ एक ही समय भोजन करती हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से शरीर से लेकर मन तक शुद्ध हो जाता है.

खरना की पूजन विधि

इस दिन महिलाएं और छठ व्रती सुबह स्नान करके साफ सुथरे वस्त्र धारण करती हैं और नाक से माथे के मांग तक सिंदूर लगाती हैं. खरना के दिन व्रती दिन भर व्रत रखती हैं और शाम के समय लकड़ी के चूल्हे पर साठी के चावल और गुड़ की खीर बनाकर प्रसाद तैयार करती हैं. फिर सूर्य भगवान की पूजा करने के बाद व्रती महिलाएं इस प्रसाद को ग्रहण करती हैं.
उनके खाने के बाद ये प्रसाद घर के बाकी सदस्यों में बांटा जाता है. इस प्रसाद को ग्रहण करने के बाद ही व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है. मान्यता है कि खरना पूजा के बाद ही घर में देवी षष्ठी (छठी मइया) का आगमन हो जाता है.

बुधवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य

निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं बुधवार की शाम नदी, तालाब किनारे पहुंचकर देकर 12 प्रकार की सब्जी, फल समर्पित कर छठी माता से परिवार की सुख समृद्धि की कामना करेंगी। रातभर जागरण में छठी मइया के गुणगान में भजन कीर्तन करेंगी। महादेवघाट में बनारस से आ रही नृत्य मंडली के कलाकार नृत्य की प्रस्तुति देंगे।

गुरुवार को समापन

बुधवार की सारी रात भजन कीर्तन के बाद गुरुवार की सुबह चार बजे से नदी, तालाब के किनारे पहुंचकर व्रती महिलाएं सूर्योदय होने का इंतजार करेंगी। जैसे ही सूर्य उदय होने की बेला आएगी, फल, सब्जी अर्पित करके जल से अर्घ्य देंगी। इसी के साथ चार दिवसीय पूजन का समापन होगा।

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