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70 वर्षों में कहीं भूल तो नहीं गये चीता को, रफ्तार है इसकी पहचान, जानें और भी बहुत कुछ…

Cheetah has not forgotten somewhere in 70 years, speed is its identity

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

शेर, बाघ और तेंदुए की तरह बिल्ली प्रजाति का जानवर है चीता। फिर भी कुछ मायनों में अपने कुल के जानवरों यह सबसे अलग है। चीता भले ही शेर की तरह नहीं दहाड़ता है, लेकिन इस ‘बिग म्याऊं’ की गुर्राहट भी खून सुखाने के लिए काफी है। देश के आजाद होने से पहले देश में लाख के आसपास इनकी आबादी थी, लेकिन अंग्रेजों और राजे-रजवाड़ों के शिकार शौक ने इनका समूल नाश कर दिया। हालत यह कि 1948 तक देश से चीतों का पूरी तरह सफाया हो गया। 1952 में भारत सरकार ने घोषणा कर दी कि अब देश में एक भी चीता नहीं है। वैसे पहले भी चीतों को भारत में पुनर्वासित करने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सपना साकार कर दिया है और नामीबिया से लाये गये 8 चीता शावकों को मध्यप्रदेश के नेशनल पार्कों में छोड़ा गया है। यानी अब भारत के जंगलों में भी फिर से इनकी रोमांचित कर देने वाली रफ्तार दिखाई देगी।

चीता शब्द संस्कृत शब्द ‘चित्रकाय’ से आया है जिसका अर्थ होता है बहुरंगी शरीर वाला। बिल्ली कुल का यह प्राणी अफ्रीका और मध्य ईरान में मुख्यतः पाया जाता है। चीता अपनी तेज रफ्तार दुनिया में जाना जाता है। 120 किमी प्रति घंटे तक की गति प्राप्त कर लेता है और एक बार में 460 मी. तक की दूरी तय कर सकता है और मात्र तीन सेकेंड के अंदर यह अपनी रफ्तार में 103 किमी प्रति घंटे का इज़ाफ़ा कर लेता है, जो अधिकांश सुपरकार की रफ्तार से भी तेज़ है। धरती पर इससे तेज दौड़ना वाला कोई दूसरा प्राणी नहीं है। विडाल (बिल्ली) वंश का यह एकलौता प्राणी है जिसके पंजे बंद नहीं होते हैं और जिसकी वजह से इसकी पकड़ कमज़ोर रहती है। इसलिए शिकार के लिए यह पकड़ पर नहीं, वार करने पर ज्यादा निर्भर रहता है। एक गलती चीते को तेंदुआ मान लेने की गलती भी लोग करते हैं। जबकि चीता और तेंदुआ दोनों भिन्न हैं।

कहां पायी जाती है कौन-सी प्रजाति

एशियाई चीता (एसिनोनिक्स जुबेटस वेनाटिकस) : एशिया (अफगानिस्तान, भारत, ईरान, इराक, इजरायल, जॉर्डन, ओमान, पाकिस्तान, सऊदी अरब, सीरिया, रूस)

उत्तर पश्चिमी अफ्रीकी चीता (एसिनोनिक्स जुबेटस हेक) : उत्तर पश्चिमी अफ्रीका (अल्जीरिया, जिबूती, मिस्र, माली, मॉरिटानिया, मोरक्को, नाइजर, ट्यूनीशिया और पश्चिमी सहारा) और पश्चिमी अफ्रीका (बेनिन, बुर्किना, फासो, घाना, माली, मॉरिटानिया, नाइजर और सेनेगल)

एसिनोनिक्स जुबेटस राइनेल : पूर्वी अफ्रीका (केन्या, सोमालिया, तंजानिया और युगांडा)

एसिनोनिक्स जुबेटस जुबेटस : दक्षिणी अफ्रीका (अंगोला, बोत्सхуйवाना, रिपब्लिक ऑफ द कांगो, मोजाम्बिक, मलावी, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जाम्बिया, जिम्बाब्वे और नामीबिया)

एसिनोनिक्स जुबेटस सोमेरिंगी : केंद्रीय अफ्रीका (कैमरून, चाड, सेन्ट्रल अफ्रीकी रिपब्लिक, इथोपिया, नाइजीरिया, नाइजर और सूडान)

आकार-प्रकार

चीते का शरीर काफी छरहरा होता है। इसके शरीर पर काले रंग के मोटे-मोटे गोल धब्बे होते हैं। पूंछ में धब्बे होते हैं और पूंछ के अंत में चार से छह काले गोले होते हैं। चीते का सिर छोटा किन्तु आंखें बड़ी-बड़ी आंखों होती हैं। इसके काले रंग के ‘आंसू चिह्न’ इसके आंख के कोने वाले भाग से नाक के नीचे उसके मुंह तक होते हैं जिसके सहारे व वह अपनी आंखों से सूर्य की रौशनी को दूर रखता है। इसके कारण वह काफी दूर तक देख सकता है जिससे उसे शिकार में काफी सहायता होती है। एक वयस्क चीता औसतन 36 से 65 किग्रा का होता है। शरीर की लंबाई 115 से 135 सेमी होती है इसकी पूंछ 84 सेमी लम्बी होती है। दौड़ने के समय उसकी पूंछ दिशा बदलने में काफी मदद करती है। चीता की कंधे तक की ऊंचाई 67 से 94 सेमी होती है। नर चीते मादा चीते से आकार में थोड़े बड़े होते हैं और इनका सिर भी थोड़ा बड़ा होता है।

प्रजनन

चीतों की नस्ल उन क्षेत्रों में अधिक पनपती हैं जहां मैदानी और काफी बड़ा इलाका होता है। साथ ही जहां शिकार की संख्या अधिक होती है। चीता खुले मैदानों और अर्धमरूभूमि, घास का बड़ा मैदान और मोटी झाड़ियों के बीच में रहना ज्यादा पसंद करता है, हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में इनके रहने का स्थान अलग-अलग होता है। मादा चीता बीस से चौबीस महीने के अंदर व्यस्क हो जाती है जबकि नर चीते में एक वर्ष की आयु में ही परिपक्वता आ जाती हैं, हालांकि नर चीता तीन वर्ष की आयु से पहले संभोग नहीं करता और संभोग पूरा साल भर होता है। मादा चीता स्वच्छंद प्रवृत्ति की होती हैं, यही वजह है कि उसके बच्चों के बाप भी अलग-अलग होते हैं। मादा चीता गर्भ धारण करने के बाद एक से लेकर नौ बच्चों को जन्म दे सकती है। औसतन ये तीन से पांच बच्चों को जन्म देती है। चीते का बच्चा अपने जन्म के तेरहवें से लेकर बीसवें महीने के अंदर अपनी मां का साथ छोड़ देता है। एक आज़ाद चीते की आयु बारह जबकि पिंजड़े में कैद चीते की अधिकतम उम्र बीस वर्ष तक हो सकती है।

स्वभाव

चीतों का सामाजिक ढांचा अद्भुत और अनोखा होता है। नर चीते की तुलना में मादा चीते अकेली रहती हैं। हालांकि मां और पुत्री के कुछ जोड़े थोड़े समय के लिए एक साथ जरूर रहते हैं।  बच्चों की परवरिश करते समय को छोड़ दिया जाए तो मादा चीता अकेली रहती हैं। चीते के बच्चे के शुरुआती अट्ठारह महीने काफी महत्वपूर्ण होते हैं, इस दौरान बच्चे अपनी मां से जीने का हुनर सीखते हैं, मां उन्हें शिकार करने से लेकर दुश्मनों से बचने का गुर सिखाती है। जन्म के डेढ़ साल बाद मां अपने बच्चों का साथ छोड़ देती है, उसके बाद ये बच्चे अपन भाइयों का अलग समूह बनाते हैं, ये समूह अगले छह महीनों तक साथ रहता है। दो वर्षों के बाद मादा चीता इस समूह से अलग हो जाती है जबकि नर चीते हमेशा साथ रहते हैं।

दूसरी तरफ नर चीते आमतौर पर अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ रहते हैं, अगर परिवार में एक ही नर चीता है तो वह दूसरे परिवार के नर चीतों के साथ मिलकर एक समूह बना लेते हैं, या फिर वो दूसरे समूहों में शामिल हो जाता है। इन समूहों को संगठन भी कह सकते हैं।  नर चीते एक निश्चिति परीधि में रहना पसन्द करते हैं। मादा चीता अपने रहने के लिए कोई क्षेत्र निर्धारित नहीं करती। मादा चीता उन स्थानों पर रहने को प्राथमिकता देती हैं, जहां घर जैसा एहसास होता है, इसे होम रेंज कह सकते हैं। इन स्थानों पर परिवार के दूसरे मादा सदस्यों जैसे उसकी मां, बहनें और पुत्री साथ साथ रहते हैं।

स्वरोच्चारण

चीता शेर की तरह गुर्राता नहीं है। इसकी आवाज बड़ी बिल्ली की तरह घुरघुराहट लिए होती है, लेकिन उसकी मध्यम आवाज भी सांसें रोक देने के लिए काफी हैं। अभी भी कुछ लोगों चीते को बड़ी बिल्लियों की सबसे छोटी प्रजाति के रूप में मानते  हैं।चीता शेर की तरह दहाड़ नहीं सकता, लेकिन इसकी गुर्राहट किसी भी तरह शेर से कम भयावह नहीं होती। अलग-अलग अवस्थाओं में चीते की आवाज़ को भिन्न-भिन्न होती है-

चिर्पिंग – चीता अपने साथियों और मादा चीता अपने बच्चों की तलाश के दौरान जोर-जोर से आवाज़ लगाती है जिसे चिर्पिंग कहते हैं। चीते का बच्चा जब आवाज़ निकालता है तो ये चिड़ियों की चहचहाट जैसा स्वर पैदा करता है। इसे चिर्पिंग कहते हैं।

चरिंग या स्टटरिंग – यह वोकलिज़ेशन सामाजिक बैठकों के दौरान चीता द्वारा उत्पन्न किया जाता है। नर और मादा चीते जब मिलते हैं तो उनके स्वर में हकलाहट आ जाती है, ये भाव एक दूसरे के प्रति दिलचस्पी, पसंद और अनिश्चितता का सूचक होते हैं।

गुर्राहट – चीता जब नाराज़ होता है तो ये गुर्राने लगता है, इसके नथुनों से थूक भी निकलने लगती है, ऐसे स्वर चीते की झल्लाहट को दर्शाते हैं, चीता जब खतरे में होता है तब भी इसी तरह के स्वर निकालता है।

आर्तनाद – खतरे में घिरे चीते को जब बचकर निकलने की सूरत नज़र नहीं आती तो उसकी फुफकार चिल्लाहट में बदल जाती है।

घुरघुराहट – मादा चीता जब अपने बच्चों के साथ होती है, बिल्ली जैसी आवाज़ निकालती है (ज्यादातर बच्चे और उनकी माताओं के बीच). घुरघुराहट जैसी ये आवाज़ आक्रामकता और शिथिलता दोनों का आभास कराती है।

आहार और शिकार

चीता मूलतः मांसाहारी होता है, ये अधिकतक स्तनपायी के अन्तर्गत 40 किग्रा (1,400 औंस) जानवरों का शिकार करता है। उसकेशिकार में थॉमसन चिकारे, ग्रांट चिकारे, एक प्रकार का हिरण और इम्पला शामिल हैं। बड़े स्तनधारियों के युवा रूपों जैसे अफ्रीकी हिरण और ज़ेबरा और वयस्को का भी शिकार कर लेता जब चीते अपने समूह में होते हैं। चीता खरगोश और एक प्रकार की अफ्रीकी चिड़िया गुनियाफॉल का भी शिकार करता है। आमतौर पर बिल्ली का प्रजातियों वाले जानवर रात को शिकार करते हैं, लेकिन चीता दिन का शिकारी है।

चीता पहले अपने शिकार के पीछे चुपके चुपके चलता है, फिर अचानक उसका पीछा करना शुरू कर देता है, ये सारी प्रक्रिया मिनटों के अंदर होती है, अगर चीता अपने शिकार को पहले हमले में नहीं पकड़ पाता तो फिर वह उसे छोड़ देता है। यही कारण है कि चीता के शिकार करने की औसतन सफलता दर लगभग 50% है।

शिकार के बाद चीता काफ़ी देर तक आराम करता है। कभी-कभी तो आराम की अविधि आधे घंटे या उससे भी अधिक हो सकती है। चीता अपने शिकार को पीछा करते समय मारता है, फिर उसके बाद शिकार के गले पर प्रहार करता है, ताकि उसका दम घुट जाए, चीता के लिए चार पैरों वाले जानवरों का गला घोंटना आसान नहीं होता। इस दुविधा से पार करने के लिए ही वो इनके गले के श्वासनली में पंजों और दांतो से हमला करता है।

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