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Pegasus के जरिये जासूसी पर केंद्र सरकार की सफाई, भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने का प्रयास

केन्द्र सरकार ने इजरायली कंपनी के Pegasus स्पाईवेयर के जरिये देश के कतिपय विश‍िष्‍ट लोगों की कथित जासूसी पर सफाई दी है। लोकसभा में आज विपक्ष ने जिन मुद्दे को लेकर हंगामा किया उसमें Pegasus स्पाईवेयर के जरिये कराई जा रही जासूसी भी प्रमुख मुद्दा था। केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्‍पष्‍ट किया है। लोकसभा में ‘Pegasus प्रोजेक्‍ट को लेकर कहा, पहले भी WhatsApp पर Pegasus के इस्तेमाल को लेकर इसी तरह के दावे किए गए थे। उनका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। यह सिर्फ भारतीय लोकतंत्र और इसकी स्थापित संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश लगती है। केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कल रात एक वेब पोर्टल द्वारा एक बेहद सनसनीखेज रिपोर्ट में कई आरोप लगाए गए थे। यह रिपोर्ट संसद के मानसून सत्र से महज एक दिन पहले आना महज संयोग नहीं हो सकता।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रिपोर्ट में 50,000 फोन नंबर्स के लीक होने की बात कही गयी है। आरोप है कि इन फोन नंबरों से जुड़े लोगों की जासूसी की जा रही है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा में एक फोन नंबर की मौजूदगी से यह पता नहीं चलता है कि डिवाइस पेगासस से संक्रमित था या इसे हैक करने की कोशिश की गई।

‘Pegasus’ से राहुल गांधी और प्रशांत किशोर की जासूसी?

स्पाईवेयर ‘Pegasus’ के जरिये जिन लोगों की जासूसी की बातें सामने आ रही हैं, उनमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के नाम भी शामिल हैं। बताया जा रहा कि राहुल के खिलाफ इसका इस्तेमाल 2019 लोकसभा चुनाव से पहले किया गया था। दिलचस्प बात ये है कि राहुल के कम से कम दो नंबर को निशाना बनाया गया। नये केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी पेगासस से निशाना बनाये जाने की बात भी सामने आ रही है।

क्या है स्पाइवेयर Pegasus?

  • हाल ही में व्हाट्सएप के ज़रिये इज़रायली स्पाइवेयरपेगासस की मदद वैश्विक स्तर पर चर्चित लोगों की जासूसी की खबरें आ रही हैं।
  • पेगासस एक स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर है, जिसे इज़रायली साइबर सुरक्षा कंपनी NSO ने विकसित किया है।
  • पेगासस स्पाइवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जो उपयोगकर्त्ताओं के मोबाइल और कंप्यूटर से गोपनीय एवं व्यक्तिगत जानकारियां चोरी करता है अथवा उन्हें नुकसान पहुंचाता है।
  • इस स्पाइवेयर के नए संस्करण में लिंक की भी आवश्यकता नहीं होती है। पेगासस स्पाइवेयर इंस्टॉल होने के बाद फोन से जुड़ी सारी जानकारियां प्राप्त हो जाती हैं।
  • यह स्पाइवेयर प्रयोगकर्त्ता को इसके होने का आभास भी नहीं होने देता। पेगासस स्पाइवेयर ब्लैकबेरी, एंड्रॉयड, आईओएस (आईफोन) और सिंबियन-आधारित उपकरणों को प्रभावित कर सकता है।
  • पेगासस स्पाइवेयर ऑपरेशन पर पहली रिपोर्ट वर्ष 2016 में सामने आई, जब संयुक्त अरब अमीरात में एक मानवाधिकार कार्यकर्त्ता को निशाना बनाया गया था।

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