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सीबीएसई की एक मार्क्स पॉलिसी खारिज, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने छात्रों को दिया बेस्ट मार्क्स चुनने का विकल्प

CBSE One Marks Policy Rejected

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई स्टूडेंट्स को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई स्टूडेंट्स को अपना बेस्ट मार्क्स चुनने का विकल्प दे दिया है। शीर्ष अदालत ने सीबीएसई की एक मार्क्स पॉलिसी को खारिज कर छात्रों को यह राहत दी है। कोर्ट का यह फैसला सीबीएसई की कक्षा 10वीं और 12वीं दोनों बोर्ड परीक्षाओं पर लागू होगा।

कोरोना महामारी के दौरान सीबीएसई ने सभी छात्रों के लिए एक मार्क्स पॉलिसी तय की थी। इस आधार पर मिले अंक से बहुत से छात्र संतुष्ट नहीं थे। उनकी नाराजगी को देखते हुए सीबीएसई ने उन्हें सुधार परीक्षा की अनुमति दी थी। इस परीक्षा के बाद कई छात्रों का ‘मार्क्स सुधार’ तो हो गया, लेकिन कई छात्रों को मुख्य परीक्षा से कम अंक मिले। इसी पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई के उस नियम को खारिज किया है जिसके मुताबिक सुधार परीक्षा में मिले नंबर ही आखिरी माने जाते। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह विकल्प विद्यार्थियों के पास रहेगा कि वह मुख्य परीक्षा और सुधार परीक्षा दोनों में से कौन-सा अंक लेना चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने यह फैसला दिया है। बेंच ने कहा कि सीबीएसई ने सुधार परीक्षा में मिले अंकों को ही अंतिम मानने की नीति के पीछे कोई तर्क नहीं दिया है। स्टूडेंट्स सिर्फ अपने ओरिजिनल मार्क्स बरकरार रखना चाहते हैं, जो उन्हें मुख्य परीक्षा में मिले। अगर इंप्रूवमेंट एग्जाम देने के बाद मार्क्स कम हो गये तो वह मुख्य परीक्षा में मिले अंकों को रख सकता है।

यह भी पढ़ें: OBC-EWS आरक्षण के आधार पर ही होगी NEET-PG की काउंसलिंग, Supreme Court का Supreme Decision

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