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Bypoll Election Results 2021: क्या संदेश लेकर आए हैं उपचुनाव के नतीजे

Bypoll Election Results 2021: क्या संदेश लेकर आए हैं उपचुनाव के नतीजे

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस झारखंड-बिहार

Bypoll Election Results 2021: देश के 14 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 29 विधानसभा और तीन लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे मंगलवार को घोषित हुए। उपचुनाव में सबसे आश्चर्यचकित कर देने वाले परिणाम पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश से आए हैं. वहां लोकसभा की 1 और विधानसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव कराए गए. सत्ताधारी बीजेपी (BJP) को सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है. हिमाचल में मिली हार के पीछे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने महंगाई (Inflation) को वजह बताया है. उपचुनाव के ये नजीते विपक्षी के लिए संजीवनी का काम कर सकते हैं. खासकर उन राज्यों में जहां अगले साल चुनाव होने हैं. उत्तर प्रदेश में विपक्ष तेल की बढ़ती कीमतों और खाद्य पदार्थों की महंगाई और अर्थव्यवस्था की हालत को मुद्दा बना रहा है.

हिमाचल की हार से बीजेपी में चिंता की लहर

इन परिणामों को अगले साल 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है. हिमाचल की हार से बीजेपी में चिंता की लहर दौड़ गई है. हिमाचल की एक लोकसभा सीट और तीन विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराए गए. इन चारों सीटों को कांग्रेस ने जीत लिया है. मंडी लोकसभा सीट पर चुनाव तो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के ही नेतृत्व में लड़ा गया. जुब्बल-कोटखाई में तो बीजेपी जमानत भी नहीं बचा पाई है. हिमाचल के ये परिणाण इसलिए भी बीजेपी के लिए परेशानी पैदा करने वाले हैं कि वहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

भाजपा और उसके सहयोगियों ने उत्तर-पूर्व में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया

भाजपा और उसके सहयोगियों ने उत्तर-पूर्व में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने चार राज्यों की सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की। असम में पांच सीटों पर उपचुनाव हुए थे। सत्तारूढ़ भाजपा ने तीन पर जीत हासिल की। उसके सहयोगी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने अन्य दो सीटों पर जीत हासिल की।

मेघालय में सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के उम्मीदवारों ने तीन में से दो सीटों पर जीत हासिल की, जबकि सहयोगी, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी), तीसरी सीट पर विजेता बनी। मिजोरम में, सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के उम्मीदवार के लालदावंगलियाना ने एकमात्र उपचुनाव जीता।

नागालैंड में, सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) ने शामटोर-चेसोर विधानसभा क्षेत्र को बरकरार रखा और अपने उम्मीदवार एस केओशू यिमचुंगर को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया।

राजस्थान के परिणाम बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए दूरगामी होंगे

राजस्थान की धारवाड़ और वल्लभनगर सीट पर उपचुनाव कराए गए. दोनों सीटें कांग्रेस के खाते में गई हैं. दोनों ही जगह बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है. राजस्थान में खेमों में बंटी कांग्रेस और बीजेपी के लिए ये परिणाम दूरगामी होंगे. पश्चिम बंगाल में 4 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की है. इनमें से दो सीटें वो हैं, जहां मई में हुए चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी.

पश्चिम बंगाल में टीएमसी का शानदार प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल में हुए उपचुनाव में टीएमसी ने शानदार प्रदर्शन किया है। मार्च-अप्रैल में हुए चुनाव में बीजेपी जिस दिनहाटा सीट पर 57 और शांतिपुर पर 15,878 वोटों से जीत हासिल की थी, वहां इस उपचुनाव में क्रमश: 160,000 और 64,675 वोटों से चुनाव हार गई। इन निर्वाचन क्षेत्रों में इसलिए उपचुनाव हुए, क्योंकि यहां के विजेताओं ने अपनी लोकसभा सीटों को बरकरार रखने के लिए विधायकों के रूप में शपथ नहीं ली थी। दिनहाटा सीट को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने जीता था।

कर्नाटक में बोम्मई को बड़ा झटका

कर्नाटक में, मुख्यमंत्री बोम्मई को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि कांग्रेस ने उनके गृह जिले हंगल निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल की। कांग्रेस प्रत्याशी श्रीनिवास माने 7373 मतों से जीते। सिंदगी में भाजपा ने कांग्रेस को 30,000 से अधिक मतों से हराकर शानदार जीत हासिल की।

तेलंगाना में भाजपा ने जीती हुजूराबाद सीट

तेलंगाना में, भाजपा ने सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) से हुजूराबाद विधानसभा सीट छीन ली। भाजपा के टिकट पर उपचुनाव लड़ने वाले राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एटाला राजेंदर ने टीआरएस उम्मीदवार गेलू श्रीनिवास यादव को 23,865 मतों से हराया।

बिहार में, जद (यू) ने दोनों विधानसभा सीटों को बरकरार रखा

बिहार में, जद (यू) ने कुशेश्वर स्थान और तारापुर दोनों विधानसभा सीटों को बरकरार रखा। राजद द्वारा एक हाई-वोल्टेज आक्रमण और पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद को चुनाव प्रचार के लिए उतारने के बावजूद उसे सफलता नहीं मिली। कुशेश्वर स्थान में जद (यू) उम्मीदवार अमन भूषण हजारी ने राजद के गणेश भारती को 12,695 मतों से हराया। तारापुर में जद (यू) उम्मीदवार राजीव कुमार सिंह 3,821 मतों चुनाव से जीते।

अभय सिंह चौटाला ने एलेनाबाद सीट बरकरार रखी

सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले की बडवेल विधानसभा सीट को 90,533 मतों के रिकॉर्ड अंतर से बरकरार रखा। वहीं हरियाणा में इनेलो के अभय सिंह चौटाला ने अपने भाजपा प्रतिद्वंद्वी गोबिंद कांडा को 6,739 मतों से हराकर एलेनाबाद सीट बरकरार रखी। ग्रामीण जाट बहुल सीट से यह उनकी पांचवीं विधानसभा जीत है।

मध्य प्रदेश में 32 साल की अवधि के बाद एक सीट जीती

भाजपा ने मध्य प्रदेश में दो सीटों- जोबत और पृथ्वीपुर (दोनों कांग्रेस के गढ़) पर जीत हासिल की और उपचुनाव में खंडवा की लोकसभा सीट को बरकरार रखा। जबकि कांग्रेस ने 32 साल की अवधि के बाद एक सीट रायगांव से जीती।

उपचुनावों का संदेश

भाजपा के लिए पश्चिम बंगाल, राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र से भी अच्छी खबर नहीं आई है, और न ही वह कर्नाटक के परिणाम से बहुत संतोष कर सकती है,भाजपा के लिए सुखद खबरें असम और मध्य प्रदेश से हैं, जहां उसका जलवा बरकरार है। असम में बिखरे हुए विपक्ष ने भाजपा का काम आसान कर दिया और उसके नेतृत्व में सत्तारूढ़ गठबंधन ने वहां एकतरफा जीत हासिल की है, तो वहीं मध्य प्रदेश में भी उसकी मजबूत पकड़ बनी हुई है। हालांकि, लोकसभा की तीन सीटों में से दो पर कांग्रेस और उसकी सहयोगी शिव सेना की जीत से विपक्ष का हौसला बढे़गा, और एनडीए इस परिणाम को नजरअंदाज नहीं कर सकता। यकीनन, लोकसभा में अंकगणित पर इससे कोई खास असर नहीं पड़ने वाला, पर ये परिणाम लोगों की आकांक्षाओं को परिलक्षित तो करते ही हैं।

नतीजों से आगे की राजनीतिक दिशा तय होगी

ये थे तो उपचुनाव लेकिन इनका असर आने वाले 5 राज्यों के चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है. वो इसलिए क्योंकि ये उपचुनाव एक-दो राज्य नहीं बल्कि देश के 15 राज्यों में हुए थे. अगले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं और इन उपचुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल भी माना जा रहा था. इन उपचुनाव के नतीजों से आगे की राजनीतिक दिशा तय होगी, क्योंकि इससे देश का मूड पता चल गया है. कोरोना की दूसरी लहर के कहर के बाद हुए इन उपचुनावों में केंद्र सरकार का ज्यादा विरोध भी देखने को नहीं मिला. हालांकि, महंगाई जैसे मुद्दे थोड़े हावी दिखे.

तेजस्वी यादव के लिए गहरे संदेश हैं परिणाम

अक्सर,  उपचुनावों में राज्यों में सत्तारूढ़ पार्टियों का दबदबा होता है, और इस चुनाव में भी हिमाचल और कर्नाटक को छोड़ दें, तो आम तौर पर यही रुख दिखा है, मगर बिहार की दो सीटों को जिस तरह से राजद ने अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था, उनके परिणामों में तेजस्वी यादव के लिए गहरे संदेश हैं। उन्होंने लालू यादव तक को इन सीटों के चुनाव प्रचार के लिए उतार दिया था, लेकिन वह अपने गठबंधन को एकजुट नहीं रख पाए। अब चुनाव परिणाम बता रहे हैं कि कांग्रेस के भी चुनाव लड़ने और दोनों दलों के नेताओं की आपसी तू तू-मैं मैं को मतदाताओं ने सहजता से नहीं लिया है। बिहार में एक तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन मजबूती से साथ था, तो दूसरी तरफ राजग में फूट थी। उपचुनावों के परिणाम जहां कांग्रेस को बता रहे हैं कि मध्य प्रदेश क्यों उसके लिए मुश्किल है, तो भाजपा को महंगाई, किसान आंदोलन को गंभीरता से लेने के लिए आगाह भी कर रहे हैं।


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