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UP Election 2022: ‘भगवान भरोसे’ भाजपा, या बोलेगा योगी का काम, ‘तालिबान’ से भाजपा मजबूत

‘भगवान भरोसे’ भाजपा, या बोलेगा योगी का काम, ‘तालिबान’ से भाजपा मजबूत

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

भाजपा के वर्षों के प्रयासों का परिणाम है कि राम लला अयोध्या में शान से विराजमान हैं। राम ने इसका फल भी भाजपा को दिया है। भाजपा उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश की सत्ता में विराजमान है तो यह ‘राम कृपा’ ही है। इसलिए भाजपा आगे भगवान राम को छोड़ दे ऐसा नहीं हो सकता। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यहां हर पार्टी रेस में है। जाति से लेकर धर्म के मुद्दे चुनाव में हावी होने लगे हैं। हर पार्टी अपनी-अपनी तरह से चुनावी समर के लिए तैयार हैं, लेकिन लगता है भाजपा विशेष तैयारी किये बैठी है। भाजपा वैसे तो योगी आदित्यनाथ के काम के सहारे मैदान में उतरेगी। भगवान राम तो साथ रहेंगे ही, अब तो सोमनाथ मंदिर का बड़ा प्रोजेक्ट भी बड़े काम का साबित होने वाला है। हां, अफगानिस्तान में तालिबान भी भाजपा को ऊर्जा देने का काम करने वाला है। ऐसा इसलिए कि विरोधी ही तालिबान का समर्थन कर भाजपा को ‘मजबूत’ करने में लग गये हैं।

भाजपा के एजेंडे में धार्मिक योजनाएं

अभी हाल ही में दिल्ली में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उत्तर प्रदेश 2022 चुनाव का जो रोडमैप तैयार किया है, उससे स्पष्ट है कि  भाजपा ‘योगी ब्रांड’ के भरोसे चुनावी मैदान में उतरने वाली है। इस मौके पर भाजपा ने एक बुकलेट जारी किया है। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते साढ़े चार साल में किए गए विकास कार्यों की गाथा भी है, किसानों को लुभाने का प्लान भी है और साथ में हैं वे धार्मिक योजनाएं जिनका उत्तर प्रदेश की धर्म-प्रेमी जनता पर सीधा असर पड़ता है। इस बुकलेट से भाजपा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को धार देना का भी काम करेगी। बुकलेट में योगी सरकार के कार्यकाल में हुए अब तक हुए भव्य धार्मिक आयोजनों, धार्मिक महत्व रखने वाले जिलों के विकास कार्यों के बारे में बताया गया है। प्रयागराज में कुंभ का भव्य व सफल आयोजन हो, मथुरा में कृष्णोत्सव का आयोजन, गंगा यात्रा योजना, काशी विश्वनाथ धाम के विकास कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी है। अयोध्या में राम मंदिर के साथ-साथ जिले के संपूर्ण विकास कार्य, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बारे में भी बताया गया है। इसके जरिए सरकार जन-जन तक यह संदेश पहुंचाना चाहती है कि भाजपा ने संस्कृति की धरोहरों को लेकर सरकार ने गंभीरता से कार्य किए हैं।

राम के सहारे सत्ता में विराजमान

आज देश की गद्दी पर भाजपा के शीर्ष नेता नरेन्द्र मोदी विराजमान हैं तो इसकी वजह भी ‘राम’ हैं। याद होगा, 1984 में भाजपा ने सिर्फ 2 लोकसभा सीटें जीती थीं, लेकिन राम मंदिर की बदौलत 36 साल बाद यानी 2019 में भाजपा की 303 सीटें हो गयी थीं। इन 36 सालों में भाजपा ने देश को धार्मिक एकता में पिरोने का कठिन काम किया है, यह उसी का नतीजा है। पूरे देश में उत्तर प्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां जातिगत मुद्दों के साथ धार्मिक भावनाएं ज्यादा असर करती हैं। कल्याण सिंह के नेतृत्व में 1991 और 1997 में भाजपा सरकार का उत्तर प्रदेश में आना इसका बड़ा उदाहरण तो है ही, 2017 में प्रचंड बहुमत से बनी भाजपा सरकार भी यही कहानी कह रही है।

किसानों को साधने की कोशिश

उत्तर प्रदेश इस समय कृषि कानूनों को लेकर किसानों के आन्दोलन का गढ़ बना हुआ है। किसानों को लुभाना भी भाजपा का बड़ा लक्ष्य है। किसान आंदोलन ने खासतौर पर पश्चिम यूपी के जिलों में प्रभाव डाला है। विपक्ष भी इसे लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है। इसकी काट के लिए सरकार किसानों के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा पेश करेगी। जैसे किसान सम्मान-निधि के जरिए 48 लाख किसानों को किया गया 1.4 लाख करोड़ रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान। 3 लाख युवाओं को संविदा पर दी गई नौकरी, 4.25 लाख युवाओं को दी गई सरकारी नौकरी, 82 लाख एमएसएमई इकाइयों की स्थापना आदि भी शामिल है।

एक सर्वे से भाजपा में उत्साह

हाल के एक सर्वे ने 52 फीसद लोगों को भरोसा है कि उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ जीतेंगे और मुख्यमंत्री बनेंगे। वहीं 37 फीसद का मानना है कि ऐसा नहीं होगा। बता दें, हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुए जिला पंचायत चुनाव में 75 में से भाजपा ने 67 सीटें जीती थीं। इस जीत ने भाजपा का हौसला बढ़ाया है। इसकी वजह यह भी है कि यह पंचायत चुनाव ऐसे समय में हुआ था जब उत्तर प्रदेश की सीमा पर महीनों से किसानों का जोरदार आन्दोलन चल रहा है।

तालिबान का समर्थन विरोधी पार्टियों को पड़ न जाये भारी

अफगानिस्तान में तालिबान के आने से भारत में भी लोगों की चिंताएं बढ़ गयी हैं। लोगों को लग रहा है कि अफगानिस्तान में तालिबानी शासन स्थापित होने से भारत सहित पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में आतंकी घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। मगर भाजपा नेताओं का मानना है कि सोशल मीडिया पर लोग जिस तरह की भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं उसका सियासी लाभ उसे मिल सकता है। समाजवादी पार्टी के एक सांसद ने तालिबानों की तुलना स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों से कर सियासी बवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि इस सांसद पर एनएसए की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। भाजपा को लग रहा है कि समाजवादी पार्टी नेता के इस तरह के बयानों से जनता में उसके विरोध में नाराजगी बढ़ेगी जिसका उसे सियासी लाभ मिल सकता है। माना जा रहा है कि अफगानिस्तान और तालिबान भी जल्दी ही भाजपा के चुनावी एजेंडे का हिस्सा बन सकते हैं।

धार्मिक मुद्दे पर विरोधी भी बदल रहे हैं रणनीति

निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने तक उत्तर प्रदेश में राम मंदिर दूसरी पार्टियों के लिए एक अछूत मुद्दा था। लेकिन अब ‘अछूतों’ को राम मंदिर में प्रवेश से कोई परहेज नहीं है। सपा हो या बसपा, अयोध्या जाकर रैली करना या फिर राम मंदिर, हनुमानगढ़ी जैसे स्थानों के दर्शन करने से ये बचते रहे हैं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश की सियासत बदल गयी है और अयोध्या हर पार्टी का ‘बड़ा स्टॉपेज’ बन गया है। मायावती की बहुजन समाज पार्टी से लेकर अखिलेश की समाजवादी पार्टी तक के नेता अब अयोध्या जा रहे हैं। बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने तो ब्राह्मणों को लुभाने के लिए प्रबुद्ध सम्मेलन की शुरुआत अयोध्या से ही की थी। सपा और बसपा ने राजनीतिक लाभ के लिए ही सही, अयोध्या के धार्मिक और सामाजिक महत्व को समझना शुरू कर दिया है। अयोध्या में भाजपा के ही नही, दूसरी पार्टियों के कार्यकर्ताओं के मुंह से ‘जय श्री राम’ के नारे गूंजने लगे हैं।

यह भी पढ़ें: कल्याण सिंह के पार्थिव शरीर पर तिरंगे के ऊपर BJP का झंडा, कांग्रेस- TMC ने जताई आपत्ति, जानें क्या कहती है राष्ट्रीय ध्वज संहिता

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