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Bihar: ‘12 करोड़ के बिहार में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं’ काम करने लगा है महागठबंधन का ‘बूस्टर डोज’!

Bihar: 'Such incidents keep happening in 12 crore Bihar'

‘कुशासन राज’ का कोई नहीं ‘मांझी’?

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

बेगूसराय में दो गुंडों ने सड़कों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर 1 को तो मार डाला और 10 को घायल कर दिया। बिहार के एक पूर्व मुख्यमंत्री हैं, जो इस घटना पर अब चुप हो गये हैं। जबकि बिहार में एक दुष्कर्म की खबर आयी तब इन्हीं पूर्व सीएम ने भक से अपना मुंह खोला और बकवास कर डाला, ‘12 करोड़ के बिहार में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं।‘ अब बेगूसराय की घटना पर वह पूर्व सीएम साहब चुप इसलिए हैं कि क्या बयान दें, शायद यही कि, ’12 करोड़ के बिहार में ऐसी घटनाएं तो पहले से होती आ रही हैं।’ बिहार में इन दिनों बढ़ी आपराधिक घटनाओं के लिए कई लोग नीतीश कुमार को दोषी ठहरा रहे हैं कि वह लाचार हो गये हैं। ‘किससे’ कारण लाचार हो गये हैं? लाचारी-वाचारी बेकार की बातें हैं, फिलहाल उनके पास यह सोचने का वक्त कहां है? इस समय उनका पूरा फोकस देश की गद्दी पर लगा हुआ है, फिर बिहार जैसा ‘छोटा-मोटा तकिया’ उन्हें कहां से दिखेगा। हां, अगर बिल्ली के भाग्य से पीएम वाला छींका टूट गया तो देख लेंगे कभी-कभार बिहार को। अभी तो उनका पूरा ध्यान प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनने की जोड़-तोड़ में लगा हुआ है। शायद इसी कारण बिहार के अपराधी खुल्ला सांड़ हो गये हैं। और हम खामख्वाह सीएम नीतीश को दोषी ठहराये जा रहे हैं।

बेगूसराय की सड़कों पर यह जो तांडव हुआ, वह बिहार सरकार का कोई जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम नहीं था, अपराधी हैं तो दबंगई होगी ही। अपना रौब दिखाया और फिर ऐसे अन्तर्धान हो गये कि पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पा रही है। और हम भी पुलिस को नाहक कोसे जा रहे हैं कि वह नाकाम हो गयी है। एक दिन है तो एक रात है। भला दिन और रात एक साथ आमने-सामने हो सकते हैं? फिर हम सरकार में शामिल पार्टियों को कोस रहे हैं कि उनकी बोलती क्यों बंद हो गयी है। अपनी सरकार है तो चुप तो रहेंगे ही। अपनी सरकार में अपने दामन में झांकने की फुर्सत किसे है? जब केन्द्र सरकार के राज में कोई गड़बड़ नजर आयेगी, भाजपा शासित राज्यों में कोई गड़बड़ी होगी तब दूरबीन लेकर सरकार के छोटे-छोटे दाग को ढूंढ निकालेंगे।

फिर इन अपराधियों ने आखिर किया ही क्या? सड़कों पर 30-40 किलोमीटर का ‘सैर-सपाटा’। थोड़ी-मोड़ी गोलीबारी कर डाली। ऐसा तो बिहार में होता रहता है। इससे ज्यादा तो बिहार में शादियों में गोली-बारी हो जाती है। कभई-कभार उसमें भी लोग मर जाते हैं। कभी तो इतना हाय-तौबा नहीं होता। भाजपा का राज था तो थोड़े दिन शांत रह लिये तो यह भी लोगों को अखर रहा है? बिहार में महागठबंधन की सरकार में इन्हें थोड़ा ‘बूस्टर डोज’ मिल गया है तो हाथ-पांव तो थोड़ा फड़केंगे ही! बाकी यह तो बिहार है, यहां तो यह सब होता रहता है।

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