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Bihar Politics : बिहार के सियासी पिच पर क्या लालू ला पाएंगे हरियाली?

Bihar Politics : बिहार के सियासी पिच पर क्या लालू ला पाएंगे हरियाली?

न्यूज़ डेस्क/ समाचार प्लस झारखंड- बिहार
Bihar Politics : छह साल के बाद लालू यादव चुनावी मंच पर नजर आ रहे हैं. बिहार के कुशेश्वरस्थान और तारापुर विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए 30 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि दो नवंबर को नतीजे आएंगे. 2020 के बिहार चुनाव के बाद पहली बार उपचुनाव हो रहे हैं, जिसके चलते सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने ही पूरी ताकत लगा रखी है. जेडीयू के पक्ष में एनडीए एकजुट है जबकि महागठबंधन बिखरा हुआ है. कांग्रेस और आरजेडी एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं और दोनों ही पार्टियों के बीच जुबानी जंग जारी है.

 करीब छह साल के बाद किसी चुनावी सभा को संबोधित किया

बिहार उपचुनाव में जीत के लिए सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है. लालू यादव करीब छह साल के बाद किसी चुनावी सभा को संबोधित किया है, जिसे लेकर आम लोगों के साथ-साथ राजनीतिक दलों की भी नजर है. लालू का चुनाव प्रचार करने का अपना अंदाज है और तेवर है, लेकिन लंबे समय से बीमारी के चलते अस्वस्थ चल रहे हैं.

लालू यादव के चाहने वालों में उत्साह देखने को मिल रहा

लालू यादव के चुनावी मैदान में उतरने से सियासत भी गरमायी हुई  है. राजद के कार्यकर्ताओं व समर्थकों और लालू यादव के चाहने वालों में उत्साह देखने को मिल रहा है. लालू यादव बिहार की राजनीति में इसलिए लोकप्रिय हैं कि उनका बोलने का अंदाज जमीनी और तंज भरा होता है. वह बोलते हैं तो जनता से सीधे संवाद के लिए ठेठ अंदाज अपनाते हैं. बीते दिनों जब वह लंबे अंतराल के बाद पटना पहुंचे थे तो कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्त चरण दास को ‘भकचोन्हर’ (बुद्धिहीन) कह दिया था. इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.

दोनों सीटों को बहुत महत्वपूर्ण मान रहे लालू 

लालू यादव दावा कर चुके हैं कि दोनों सीटों पर आरजेडी की जीत होगी. जनता नीतीश कुमार की सरकार से ऊब चुकी है. उनका कहना भी है कि बीमार होने के बावजूद भी बिहारवासियों का मोह उन्हें खींच लाया. लालू यादव इन दोनों सीटों को बहुत महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला

तारापुर व कुशेश्वरस्थान विधानसभा सीटों के लिए 30 अक्तूबर को मतदान होगा। यहां अब केंद्र व बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए, राजद और कांग्रेस के बीच मुकाबला होगा।

लालू ने धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं किया

लालू ने हमेशा धारा के विपरीत राजनीति की है और उन्होंने धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं किया जिसका खामियाज़ा उन्हें कई बार उठाना पड़ा. जहां उनके साथी नीतीश कुमार समय के साथ पाला बदलते रहे, लालू अपनी विचारधारा पर मजबूती से अड़े रहें. यह चीज लालू को देश के अन्य नेताओं से अलग करती है.

दलितों-पिछड़ों कि सहानुभूति  ज्यादा मिलने की संभावना

पहले की तुलना में उन्हें दलितों-पिछड़ों कि सहानुभूति भी ज्यादा मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि कोरोना महामारी ने पिछले एक साल में उनकी जिन्दगी को काफी तबाह किया है.

आज भी लालू की पक्की पकड़

जनता पर उनकी पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लालू के जेल में रहने के बावजूद RJD 75 सीटें जीत गया. यह कोई मामूली बात नहीं हैं कि जिस पार्टी के अध्यक्ष जेल में बंद हों वो पार्टी सीटों के मामले में सत्तारूढ़ JDU से भी आगे निकल जाए.

कांग्रेस राजद के संबंध बिगड़े

राजद व कांग्रेस के संबंध अब पहले की तरह नहीं रह गए हैं। कांग्रेस कुशेश्वरस्थान सीट मांग रही थी, लेकिन राजद ने उपचुनाव की दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए। इससे कांग्रेस खफा हो गई और उसने महागठबंधन छोड़ दिया। अब कांग्रेस भी तारापुर व कुशेश्वर स्थान सीटों पर उपचुनाव लड़ रही है। बता दें कि सभी पार्टियों ने तारापुर और कुशेश्वरस्थान स्थान की सीट जीत हासिल करने के लिए अपनी ताकत झोंक दी है। देखना होगा कि 30 अक्टूबर को जनता किसके पक्ष में वोट करती है। वहीं दो नवंबर को नतीजे घोषित होंगे।

ये भी पढ़ें : Lalu Yadav Tarapur Rally : छह साल बाद चुनावी मैदान में दिखे लालू, कहा – सांप्रदायिक ताकतों के आगे हार नहीं मानी

 

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