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Vikramshila: बिहार में खतरे में राष्ट्रीय धरोहर: बुद्ध की धरोहरों को बचाने की कब आयेगी ‘बुद्धि’

Vikramshila

Vikramshila :भगवान बुद्ध से बिहार की पहचान है, लेकिन बिहार सरकार इस पहचान को नष्ट कर देना चाहती है. बिहार को भगवान बुद्ध की ज्ञान-स्थली के रूप में जाना जाता है. देश की सरकारों को जब अपनी ब्रांडिंग करनी होती है तब उनके पोस्टरों में भगवान बुद्ध उनके ‘ब्रांड एम्बेसडर’ नजर आयेंगे. पर क्या भगवान बुद्ध से जुड़े स्थानों की उपेक्षा कर उनकी ब्रांडिंग कर पायेंगे? बिहार के विक्रमशिला की उपेक्षा ऐसा ही कुछ कह रही है. Vikramshila की अंतरराष्ट्रीय पहचान है, लेकिन जब वहां पहुंचना ही मुश्किल हो जाये तब इसकी पहचान पर ग्रहण लगना स्वाभाविक है. और आज ऐसा ही हो रहा है. बिहार में सड़कों का जाल बिछा होने का दावा बिहार के सीएम नीतीश कुमार सार्वजनिक मंचों से अक्सर करते रहते हैं. उनका दावा है कि आज सड़कें ऐसी बन रही हैं कि राज्य के किसी भी कोने से राजधानी आने में चार से छह घंटे का वक्त लगेगा. लेकिन आप एक बार पटना से विक्रमशिला का सफर कर लें तो सीएम नीतीश के दावों पर से विश्वास उठ जाएगा. भले ही नीतीश पूरे बिहार में सड़कों का जाल बिछा रहे हो, लेकिन लगता है उनके मास्टर प्लान में बुद्ध-स्थल शामिल नहीं हैं.

पटना से Vikramshila जाने में 4 घंटे की जगह लग रहे 12 घंटे
देश के प्रसिद्ध बौद्ध-स्थलों की चर्चा होती है तो Vikramshila का नाम पहली पंक्ति में आता है. सरकार द्वारा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बौद्ध सर्किट को विकसित करने के लिए बड़ी योजना बनाई जाती रही है, लेकिन सीएम के दावे के उलट 4 से 6 घंटे में राजधानी समेत बिहार के किसी भी कोने में पहुंचने की जगह  Vikramshila जाने में 12 घंटों का वक्त लग रहा है. भागलपुर जाने के बाद Vikramshila  जाने के लिए लोगों को ये पता ही नहीं चलता है कि सड़क पर चल रहे हैं या फिर गड्ढों पर. जो पर्यटक वहां जाना चाहते भी हैं, वे एक बार जाने के बाद दोबारा जाने का नाम नहीं लेते, अन्य पर्यटकों में भी इसके प्रति नकारात्मकता आ रही है.

‘राष्ट्रीय पहचान’ पहचान बचाने को मोहताज
पश्चिम चंपारण के रामपुरवा में भी प्रसिद्ध बौद्ध स्थल है. वहां जाने के लिए भी पर्यटकों के पास कोई सुविधा नहीं है. रामपुरवा में सम्राट अशोक के दो स्तंभ हैं जो अपने आप में अनोखे हैं. एक स्तंभ का शीर्ष भाग राष्ट्रपति भवन, दिल्ली और दूसरे का शीर्ष भाग इंडियन म्यूजियम, कोलकाता की शोभा बढ़ा रहे हैं. बौद्ध स्थलों का भ्रमण करने के लिए जो पर्यटक बिहार आते हैं रामपुरवा जाना उनके लिए नामुकिन-सा लगता है. बेतिया से करीब 70 किमी उत्तर में यह पर्यटन स्थल है, लेकिन नरकटियागंज से यहां तक जाने में काफी परेशानी होती है. 2017 के बाढ़ में एक पुलिया बह गयी थी. जिसकी अभी तक मरम्मत नहीं हो पायी है.

अशोक स्तंभ पानी में बहते-बहते बचा
पश्चिम चंपारण जिले में दूसरा अशोक स्तंभ लोरिया में है. जिसकी बगल से एक सड़क गुजरती है. 4 साल पूर्व यह सड़क टूट गई. पानी के तेज बहाव में अशोक स्तंभ ही बहते-बहते बचा है, लेकिन अभी तक उस सड़क को बांधकर पानी के बहाव को रोका नहीं गया है. इस सड़क पर पुल का निर्माण हो रहा था जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के हस्तक्षेप के बाद रोक दिया गया है. अगर यहां पानी के बहाव को रोका नहीं गया तो कभी भी अशोक स्तंभ पानी की तेज धार में बह सकता है. प्राकृतिक-धरोहर-सेनानी रामशरण अग्रवाल ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक और पटना के अधीक्षण पुरातत्वविद् से आग्रह किया है कि इन स्थलों की रक्षा की जाये. साथ ही उन्होंने भारत सरकार के भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा है.

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