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‘रामचरितमानस नफरत फैलाने वाला ग्रंथ’, बिहार के शिक्षा मंत्री का विवादित बयान

image source : social media

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर (Bihar Education Minister)  ने ‘रामचरितमानस’ को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताया है. राजधानी पटना में नालंदा ओपन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने रामचरितमानस को समाज को बांटने वाला ग्रंथ (Ramcharitmanas hate book) बताया. बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर (Bihar Education Minister Chandrashekhar) ने बुधवार को कहा कि मनुस्मृति, रामचरितमानस और बंच आफ थॉट्स जैसी किताबों को जला देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन किताबों ने नफरत फैलाई है। लोगों को सदियों पीछे धकेलने का काम किया है।

एनओयू के दीक्षांत समारोह के दौरान कहीं उक्त बातें

उन्होंने (Bihar Education Minister) एनओयू के दीक्षांत समारोह के दौरान कहा कि देश में जाति ने समाज को जोड़ने के बजाए तोड़ा है। इसमें मनुस्मृति, गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक माधव सदाशिव गोलवलकर लिखित बंच ऑफ़ थॉट्स ने 85 प्रतिशत लोगों को सदियों तक पीछे रखने का काम किया है।

‘ये ग्रंथ नफरत फैलाते हैं’

शिक्षा मंत्री ने  कहा कि इन्हीं के कारण देश के राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को मंदिरों में जाने से रोका गया। ये ग्रंथ नफरत फैलाते हैं। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने इनका प्रतिरोध किया था। उन्होंने मनुस्मृति को जलाने का काम किया था। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में लिखा गया है कि अधम जाति में विद्या पाए, भयहु यथा अहि दूध पिलाए।उन्होंने इसका अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि नीच जाति के लोग शिक्षा ग्रहण कर जहरीले हो जाते हैं, जैसे दूध पीकर सांप हो जाता है।

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