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EC का बड़ा फैसला! राजनीतिक पार्टियों के चंदे में नहीं चलेगा कालाधन, घटा दी कैश लेने की सीमा!

Big decision of EC! Black money will not run in the donations of political parties

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

नये मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे को लेकर एक्शन में हैं। उनका ध्यान इस ओर है कि कैसे राजनीतिक पार्टियों के मिलने वाले कालेधन का खात्मा किया जाये। उन्होंने इसकी शुरुआत भी कर दी। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कानून मंत्री किरेन रिजीजू को पत्र लिखकर चंदे की मिलने वाली राशि के कानून में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। अगर उनका यह प्रस्ताव मान लिया जाता है तो राजनीतिक दलों कों एक-एक पैसे का हिसाब देना पड़ सकता है।

चुनाव आयोग ने नकद चंदे की अधिकतम सीमा 20 हजार रुपये से घटाकर 2 हजार रुपये करने का प्रस्ताव दिया है। इतना ही नहीं, राजनीतिक दलों को मिलने वाले कुल चंदे में नकद की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत या 20 करोड़ रुपये तक सीमित करने की बात कही गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने किरेन रिजीजू को लिखे पत्र में जन प्रतिनिधित्व कानून में कुछ संशोधन की मांग करते हुए कहा कि आयोग की सिफारिशों का मकसद राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की व्यवस्था में सुधार करना और पारदर्शिता लाना है।

देनी होगी चंदे की पूरी जानकारी

राजनीतिक दलों को अभी 20 हजार रुपये से ऊपर वाले चंदों का खुलासा करना होता है। अगर आयोग के प्रस्ताव को विधि मंत्रालय की मंजूरी मिल जाने के बाद 2000 रुपये से अधिक सभी चंदों के बारे में राजनीतिक दलों को जानकारी देनी होगी। निर्वाचन आयोग यह भी चाहता है कि चुनावों के दौरान उम्मीदवार चुनाव के लिए अलग से बैंक खाता खोलें और सारा लेनदेन इसी खाते से हो। साथ ही चुनावी खर्च के ब्यौरे में इसकी जानकारी दी जाए।

गैर मान्यता प्राप्त दलों पर अंकुश

पिछले दिनों चुनाव आयोग ने गैर मान्यता प्राप्त दलों पर अंकुश लगाने के लिए कठोर कार्रवाई की है। चुनाव आयो ने 284 ऐसे दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। बता दें जांच एजेंसियों ने पिछले दिनों देशभर में 250 से ज्यादा ऐसी पार्टियों के कार्यालयों पर छापेमारी की जिन्होंने अपना रजिस्ट्रेशन तो करा रखा था, लेकिन वे गैर मान्यता प्राप्त पार्टियों की श्रेणी में थे। इन पार्टियों का काला सच सामने आया कि ये पार्टियां कालाधन को सफेद धन में बनाने का अड्डा बनी हुई हैं। जांच एजेंसियां ऐसी फर्जी पार्टियों पर अभी भी सख्त कार्रवाई कर रही हैं।

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