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Bhai Dooj: रक्षाबंधन की तरह भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का त्योहार भाई दूज

Bhai Dooj

Bhai Dooj: दीपावली पांच दिनों का महापर्व है। धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलता है। इस पांच दिवसीय दीपावली का पांचवां पड़ाव भैया दूज होता है। इस वर्ष 6 नवम्बर, शनिवार को भाई दूज है। भाई दूज का त्यौहार भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को दर्शाता है जिसे हर जगह बहुत श्रद्धा और प्रेम-भाव के साथ मनाया जाता है। भाई दूज रक्षा-बंधन की तरह भाई-बहन के अत्यंत प्रेम को समर्पित है। देश के कई हिस्सों में इस दिन को ‘यम द्वितीय’ के रूप में मनाने की परम्परा है।

Bhai Dooj की कथा

कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पूर्व काल में यमुना ने यमराज को अपने घर पर सत्कारपूर्वक भोजन कराया था। उस दिन नारकी जीवों को यातना से छुटकारा मिला और उन्हें तृप्त किया गया। वे पाप-मुक्त होकर सब बंधनों से छुटकारा पा गये और सब के सब यहां अपनी इच्छा के अनुसार सन्तोषपूर्वक रहे। उन सबने मिलकर एक महान् उत्सव मनाया जो यमलोक के राज्य को सुख पहुंचाने वाला था। इसीलिए यह तिथि तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से विख्यात हुई।

जिस तिथि को यमुना ने यम को अपने घर भोजन कराया था, उस तिथि को जो मनुष्य अपनी बहन के हाथ का उत्तम भोजन करता है उसे उत्तम भोजन समेत धन की प्राप्ति भी होती रहती है।

बहनें कैसे मनाती है Bhai Dooj

दीपावली पर्व के पांचवें दिन पड़ने वाले भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों के लिए भोजन का आयोजन करती हैं और उन्हें अपने घर पर आमंत्रित करती हैं। गोबर से ‘भाई दूज परिवार’ की रचना कर, उनको तिलक लगाकर, पूजा-अर्चना कर और भाई को स्नेहपूर्वक भोजन ग्रहण करवाकर उनकी लम्बी उम्र की कामना की जाती है। बदले में भाई अपनी बहनों को विभिन्न उपहार देते हैं। यह भी कहा जाता है कि यमुना ने अपने भाई यमराज से यह वचन लिया था कि भाई-दूज मनाने से यमराज के डर से मुक्ति मिलती है और साथ ही सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होती है।

अलग-अलग हिस्सों में भाई दूज के अलग नाम

रक्षा बंधन हो या भाई दूज, इनमें भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास की भावना झलकती है। भारत के हर क्षेत्र में इसे अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। भले ही मानाने का तरीका अलग हो, मुख्य सूत्र भाई बहन का प्रेम ही होता है। भाई दूज को भारत के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नाम से जाना जाता है। बंगाल में इसे भाई फोटा, महाराष्ट्र में भाउ बीज, नेपाल में भाई टिक्का तो वही गुजरात में इसे भाव-बिज कहा जाता है।

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