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Bageshwar Dham: बागेश्वर धाम के बाबा सोलह आने सच-पंडित रामदेव पांडेय

Bageshwar Dham: बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) के बाबा धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री (Baba Dhirendra Krishna Shastri)  के दावों की सच्चाई जो भी हो, लेकिन उनकी शक्ति को लेकर छिड़ी बहस में अब झारखंड के विद्वान पंडित आचार्य भी शामिल हो गए हैं। रांची के सुप्रसिद्ध ज्योतिष ज्ञाता और ब्राह्मण पंडित रामदेव पांडेय (Pandit Ramdev Pandey) ने अपने लेख के जरिये बागेश्वर धाम के चर्चित बाबा धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के बारे में जो कुछ लिखा है उसे समाचार प्लस झारखण्ड बिहार बिना एडिट किए आपके सामने रख रहा है….

अटूट गुरू भक्ति, हनुमत सिद्धी , कर्ण पिशाचनी साधना, गरीबों की सेवा और प्रबल हिन्दुत्व की पराकाष्ठा है – धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री/ बागेश्वर धाम बाबा:- ।। जन्म कर्म च दिव्यम् च ।।

पितृ के सत्कर्म:- बाढ़े पुत पिता के धरमे@ जहां अनेकों पिता, दादा ,नाना धन संजोने के लिए परिवारवाद, बेमानी,शैतानी, फरेब ,झूठ , हड़पने , सरकारी भष्टाचार, घूस, नजराना जमीन , दौलत के लिए और यह धन जन हड़पने का सहारा लेते हैं और अपनी औलाद के लिए पितृ दोष छोड़ जाते हैं , धर्म नहीं अधर्म और पाप की पूंजी चकाचौंध  में दे जाते हैं , भले गरीब परिवार में जन्म हो, पर पापी परिवार में न हो नहीं तो उपर के पीढ़ी  का संचित पाप धन, नाम सम्पत्ति भोगने वाले को भोगना पडता‌ है , यही परिवार के बैक स्पोर्ट है,

**तो कुछ परिवारों ने ग़रीबी में,लालच मे धर्म परिवर्तन कर लिया है, इन सबके लिए दृष्टांत है धीरेन्द्र जी के दादा, पापा जी ग़रीबी झेली पर हनुमद् भक्ति में डूबा रहा परिवार

**जिसने आज भारत ही नहीं विदेशों में भी जय जयकार करा दिया, यह सिर्फ वर्तमान नहीं धीरेन्द्र जी का पूर्व जन्म का करम है कि जिस देश के हम गुलाम थे उस देश के पार्लियामेंट में धर्म ध्वज लहराकर आए हैं,

**इनका परिवार तीन पीढ़ियों  से श्री हनुमान जी का भक्त है , और गरीबी‌ में जीवन जी कर हनुमान जी पर विश्वास रखा है, यह पीढियों की संयोजित आस्था है, यहां पितृ आशीर्वाद है , सत्कर्म है, बागेश्वर धाम बाला जी की स्थापना और भक्ति इनके दादा जी से आगे बढ़ी है .

** बुन्देलखण्ड ग़रीबी का अभिप्राय रहा है आज भी पर धर्म ध्वज पताका शास्त्री परिवार लहराता रहा है , अपने आसपास के लोगों के लिए धर्मान्तरण को रोका , भण्डारा भोज चलाकर गरीबों की सेवा होती रही इन्होने दिखा दिया नर सेवा ही नारायण सेवा है , विवेकानन्द जी यही कहा था .

**हनुमान जी जीवित हैं  यह तो विश्व ने देख लिया है कि दुनिया भर के हिन्दू विरोधी और मीडिया औंधे मुंह गिर गयी, मीडिया ट्रायल हुई,

**अखिल भारतीय अन्ध श्रद्धा निर्मूलन समिति के श्याम मानव की पोल खुल गयी कि वह हिन्दू विरोधी हैं  , वह ईसाईयों के चारा लोला को चुनौती क्यों नहीं देता है , वह 3000 खर्च कर नागपुर से रायपुर 600 किलोमीटर आने की हिम्मत क्यों नहीं कर पा रहा है , वह 30 लाख की रट नागपुर में क्यों लगा रहा है ?

श्याम मानव को दानव बनने से बाबा धीरेंद्र और हनुमान जी ने रोक दिया ,बाबा और लोकप्रिय हो गये, वामपंथियों का विष हनुमान जी पी गये _

* सीता शोक हलाहल जाना*
शम्भु तीए किए विष पाना ।।

मैंने भी हनुमान साधना खुद यजमान से कराकर विपति से बाहर आते देखा है – सद्गुरु

श्री धीरेन्द्र जी को चित्रकूट में सूररदास श्री श्री रामभद्राचार्य जैसे यशस्वी प्रकाण्ड विद्वान जो चित्रकूट में दिव्यांग विश्वविद्यालय बनाया तो तुलसीदास जी के रामायण के कुछ बिंदु पर फेर बदल करने की सलाह रखी.

** इनके शिष्य बनकर आश्रम पद्धति से शिक्षा, संस्कार और ईश्वरीय शक्ति पाया जो करोड़ों रुपये चुसने वाले कान्वेंट भी नहीं कर पा रहे हैं ,ऐसा चमत्कार तो ओलो लुईया वाले की बस की बात है , चार बार सजदा करने वालों की.

* भगवान राम की कर्मभूमि चित्रकूट को इनके पिताजी ने भी अपने पुत्र की शिक्षा भूमि के रुप में चयन करना एक बड़ी चिंतन और चुनौती ताकि काशी,प्रयाग और वृन्दावन को छोड़कर चित्रकूट का चयन भी राम कृपा से हुई.

**यह वही चित्रकूट है जहां तुलसी दास जी को रघुवीर राम ने 15 वी सदी में तिलकोत्सव किया .

** यही चित्रकूट है जहां हनुमान जी ने राम जी का दर्शन कराया तुलसी दास जी को.
15/7/1996 छतरपुर मध्यप्रदेश, पुरोहित पिता राम कृपाल गर्ग, माता सरोज गर्ग के घर में जन्मे बाबा धीरेंद्र जी 2012 से दरवार लगा रहे हैं , हनुमान जी का गदा लेकर , हर कोई देवास लगाने वाले भी कुछ ऐसा ही करते हैं , जिसे देवास लगाना, देवकली, डलिया लगाना आदि कहते हैं, इस परम्परा को बाबा ने हाईटेक तरीके से रखा चूंकि अंग्रेजी की जानकारी जबरदस्त है, अध्ययनशील हैं , तो मार्केटिंग भी हुई.

** अब गरीबों और जरुरत मंदो के लिए अंशदान कर भण्डारा करने लगे , इसे नर सेवा नारायण सेवा हो गयी,

**इनके चाचा का परिवार अपने बच्चों को कुन्दन बनाने में पिछड़ गये और आसपास के दरबार लगाने वाले भी तो जलने लगे , चाचा के परिवार से भी प्रतिस्पर्धा करनी पडी.

* बडे गुरू श्री रामभद्राचार्य जी का आशीर्वाद**

गुरु कृपा तो रामभद्राचार्य जी की हुई पर कभी कभी जब कोई बहुत नामवर हो जाता है तो वह अपनी सहजता से सबों को गुरु मान लेता है , वहीँ  दूसरी सरी ओर कई नामवर लोग भी अपनी नजदीकियां या शिष्य बता दिया करते हैं , दोनों में  शिष्य को सफलता ही मिलती है , बड़े दूर तक व्यक्ति का नाम प्रचारित हो जाता है, गुरुओं का आशीर्वाद भी मिलते जाना धीरेन्द्र जी को सफल बनाया. बालक की पितृ भक्ति, विश्वास और लगन ने अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाई है, ऐसे सद्गुण बालपन से बालक में दिए गये.

* कट्टर हिन्दूत्व का स्वर्णिम काल *

सतानन प्रकृति ईश्वरीय शक्ति भक्ति को मानती है, इस तरह भगवान अपना दौर लाते हैं – यह आप 2014से अब तक देख सकते हैं, मोदी, अदालत, वकील जैन बन्धु, पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ, राणा, आदि दर्जनों नाम हैं  जो स्वर्णिम हिन्दूत्व के प्रखर ध्वज वाहक है, प्रकृति वाहक है धर्म ध्वज की.

** दैवीय शक्तियां और सिद्धि-

हनुमान जी आठ सिद्धि और नव निधी के दाता हैं यह तो धीरेन्द्र शास्त्री प्रकरण में दुनिया ने देख लिया है, हनुमंत सिद्धि है , इसी सिद्धि से रोग शोक आपत्ति विज्ञप्ति आम जन का ठीक करते हैं , भण्डारा के गरीबों के भोजन से भी यह सिद्ध मिला.

* कर्णपिशाचनी सिद्धि**

यह कठिन तांत्रिक सिद्धियां में एक है , इसमें कान में पिशाचनी किसी भी व्यक्ति के भूत काल को बता देती है , यह वाम पंथ की सिद्धि है जिसमें पूजन क्रम में पंचमकार से पूजन होता है , इसे साधना काल में करना जरुरी है , यह साधना युवाकाल और बसन्त ऋतु में अधिक फलदायी है , इसे ही भूत प्रेत की सिद्धि भी कहते हैं , यह 14/25/108 दिनों की होती है ,एक बार ‌सिद्धि न होने पर बार बार कर सकते हैं , साबर मंत्र, तांत्रिक मंत्र से यह सिद्ध होता है , हम जानते हैं कि कर्ण पिशाचनी सिद्धि सिर्फ वाम तंत्र से होती है ,

अघोर साधक भैरवा नन्द कपालिक चक्रतीर्थ महा श्मशान उज्जैन , नारायण दत श्री माली की पुस्तक तांत्रिक सिद्धियां, चण्डी प्रकाशन प्रयागराज , आदि के पास से मैंने  यही पाया है ,

इस सिद्धि में सिद्धि प्राप्त करने के बाद जो भी वस्तु से सिद्धि होती है उसे साधक को साथ रखना होता है, वरना यह सिद्धि काम नहीं करती है.

इसे आधुनिक विज्ञान पारा साइको से परिभाषित करती है , वैज्ञानिक तरीके से भी यह शक्ति मिलती है.

* सिद्धि जन अन्य देवी देवता मां बगलामुखी, शिव ,अघोर साधना , ध्यान आदि से भी प्राप्त करते हैं, इसी सिद्धि को। बुद्ध प्राप्त कर मोक हुए, जीसस लिभड इन इण्डिया में एक रुसी लेखक ने लिखा यही सिद्धि प्राप्त कर ईशु मसीह ने चमत्कार किए, चन्द्रा स्वामी भी इसी सिद्धि से लैस थे , ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ के कमर दर्द को ठीक कर दिया था ,

** सत्य साईं बाबा पुट्टापरती आंध्र प्रदेश, को भी इसी तरह की शक्ति प्राप्त थी , नीम करोली बाबा आदि भी सिद्ध थे, नानक साहब को इतनी शक्ति थी की पृथ्वी को ही घुमा दिया था और प्रकृति में कोई बदलाव नहीं आया, सनातन मे करोड़ो सिद्धि है और रहेगी,

ये भी पढ़ें : जज्‍बे को सलाम, देशभक्ति की मिसाल हैं आदिवासी टाना भगत

 

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