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Jharkhand नल जल योजना में पिछड़ा, केन्द्र के 2617 करोड़ में से खर्च कर सका 166 करोड़, बिहार थोड़ा बेहतर

Status of Nal Jal Yojana in Jharkhand Bihar

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 में देशभर में 3.8 करोड़ परिवारों तक स्वच्छ पानी पहुंचाने का उद्देश्य ‘हर घर नल’ योजना के अंतर्गत निर्धारित किया गया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा वर्ष 2022-23 के बजट में इस योजना के अंतर्गत 60 हजार करोड रुपए आवंटित किए गए हैं। जिसके माध्यम से प्रत्येक घर तक नल का साफ पानी उपलब्ध करवाया जाएगा। पिछले 2 वर्षों में इस योजना के माध्यम से 5.5 करोड़ घरों तक नल का जल पहुंचाया गया है। इस योजना को 2019 में आरंभ किया गया था। इसके अलावा इस योजना के माध्यम से देश के नागरिकों के जीवन-स्तर में भी सुधार आएगा। इस योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्र के वे सभी नागरिक प्राप्त कर सकते हैं जिनके घर तक पीने का पानी उपलब्ध नहीं है।

यह है पूरे देश की स्थिति। अब जरा झारखंड और बिहार की चर्चा कर लें कि यहां कि सरकारें अपने नागरिकों को नल जल योजना का कितना लाभ दे पायी हैं। पहले चर्चा झारखंड की। झारखंड के 24 जिलों में अब तक 11 लाख घरों में ही नल जल कनेक्शन यानी ‘हर घर, नल जल योजना’ की सुविधा मिल पायी है। 15 अगस्त 2019 में 3,45,165 घरों में ही शुद्ध पीने के पानी का कनेक्शन दिया गया था। अब यह बढ़कर करीब 11 लाख हो गया है। यानी 2019 के बाद ग्रामीण इलाकों में रहनेवाले 18.47 फीसदी लोगों को ही टैप वाटर कनेक्शन से पानी की सुविधाएं मिल रही हैं। राज्य के 29,756 गांवों में से सिर्फ 785 गांवों को ही शत-प्रतिशत नल जल कनेक्शन का लाभ मिला है। कहने को तो राज्य सरकार पेयजल और स्वच्छता विभाग की तरफ से 59.23 लाख लोगों को नल जल कनेक्शन देने के लिए 6 हजार करोड़ की निविदा की तैयारियां की जा रही हैं। पेयजल और स्वच्छता विभाग के 35 प्रमंडलों में प्रमंडलवार निविदाएं निकाली जायेंगी। अब तक 2000 करोड़ रुपये की निविदाएं आमंत्रित की जा चुकी हैं। लेकिन 2019 के बाद से अब तक सिर्फ 12.64 प्रतिशत लोगों को ही नल जल कनेक्शन की सुविधा दी गयी है। साहेबगंज, सिमडेगा, गिरिडीह, चतरा में एक भी कनेक्शन नहीं चालू वित्तीय वर्ष में नहीं दिया गया है। इस पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने चिंता जतायी है।

2021-22 में केंद्र सरकार ने 2617.81 करोड़ का आवंटन किया। इसमें से झारखंड सरकार सिर्फ 166.78 करोड़ ही खर्च कर पायी। हालांकि राज्य सरकार दावा कर रही है कि उसने अब तक योजना में 409.13 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। बताते चलें कि योजना के तहत 50 फीसदी सेंट्रल शेयर केंद्र से मिलता है। झारखंड सरकार को 50 फीसदी राशि अपने हिस्से का लगानी पड़ती है।

बिहार में क्या है नल जल की योजना की स्थिति?

अब थोड़ी चर्चा बिहार की। बिहार की स्थिति झारखंड से कुछ बेहतर है। बेहतर इसलिए भी की खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयास की तारीफ कर चुके हैं। बिहार सरकार ने 2016 में ‘हर घर नल से जल’ योजना की शुरुआत की थी। यही योजना बाद में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के लिए लागू की है

  • मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चल योजना के तहत राज्य के गैर-गुणवत्ता प्रभावित 5013 ग्राम पंचायतों के सभी वॉर्डों के सभी परिवारों को पाइप के माध्यम से नल द्वारा स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की जानी थी।
  • पंचायती राज विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 38 जिलों के कुल 1,14,737 वॉर्डों में से 59,730 वॉर्डों में ही ये योजना शुरू की गई थी।
  • इन वॉर्डों में कुल 63,728 तरह के कार्य (सह-योजनाएं) किए जाने थे, लेकिन इसमें से सिर्फ 8,899 कार्य ही पूरे हो पाए हैं.
  • इस तरह बिहार सरकार की पेयजल योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आवंटित कुल कार्य में से करीब 14 फीसदी ही कार्य पूरे हुए हैं।
  • विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 26,028 कार्यों का ही निरीक्षण किया गया है, जो कुल आवंटित कार्यों की तुलना में करीब 41 फीसदी है. फिलहाल इस योजना के तहत 14,352 कार्य चल रहे हैं.
  • अररिया, कटिहार, किशनगंज, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, सुपौल और सहरसा में ‘हर घर नल का जल’ निश्चय के तहत पिछले चार सालों में कोई भी कार्य शुरू नहीं किया गया।
  • अन्य जिलों को देखें, तो अरवल में कुल 867 वॉर्ड हैं, लेकिन इसमें से सिर्फ 646 वॉर्ड में कुल 675 कार्य आवंटित किए गए थे। इसमें से भी सिर्फ 54 कार्य पूरे हो पाए हैं। यह आवंटित कार्य की तुलना में सिर्फ आठ फीसदी है।
  • इसी तरह औरंगाबाद जिले में 2,851 वॉर्ड हैं और इसमें से 1941 वॉर्ड में कुल 1,988 कार्य किए जाने थे. हालांकि इसमें से सिर्फ 505 कार्य पूरे हो पाए हैं।
  • कैमूर जिले के 1,850 वॉर्ड में से सिर्फ 956 वॉर्ड में 1,001 कार्यों का आवंटन किया गया था, लेकिन इसमें से सिर्फ 139 कार्य पूरे हो पाए हैं।
  • पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, गया जिले में कुल 4,573 वॉर्ड हैं, लेकिन इसमें से 2,787 वॉर्ड में ही पेयजल योजना के तहत 2,964 कार्य आवंटित किए गए थे।
  • गोपालगंज जिले के 3,177 वॉर्ड में से 2,180 वॉर्डों में कुल 2,229 कार्य शुरू किए गए थे, जिसमें से 1,071 कार्य ही पूरे हो पाए हैं। इसमें से सिर्फ 30 कार्यों का ही निरीक्षण किया गया था।
  • नालंदा जिले 3,391 वॉर्डों में से 2,126 वॉर्ड में 2,699 कार्य शुरू किए गए थे. लेकिन इसमें से सिर्फ 1,130 कार्य ही पूरे हुए हैं।
  • हाई-प्रोफाइल पटना जिले में 4,355 वॉर्ड हैं। लेकिन इसमें से 2,560 वॉर्ड में ही 2,699 कार्य शुरू किए गए थे, जिसमें से 189 कार्य पूरे किए गए हैं। बाकी जिलों की भी करीब-करीब ऐसी ही स्थिति है।
  • यह भी पढ़ें: हिजाब विवाद अभी नहीं सुनेगा सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट में ही याचिकाओं की होगी सुनवाई

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