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Babulal Marandi का आरोप- हेमंत व शिबू सोरेन के पास अकूत बेनामी संपत्ति, फंसने पर खेल रहे आदिवासी कार्ड

image source : social media

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) ने हेमंत सोरेन और और शिबू सोरेन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि इनके पास अकूत बेनामी संपत्ति है। उन्होंने कहा है कि सोरेन परिवार को गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम जुड़वा लेना चाहिए, क्योंकि इतने कम समय में उन्होंने इतनी प्रॉपर्टी बना ली है। उन्होंने आरोप लगते हुए कहा है कि इनकम टैक्स या सीबीआई रिपोर्ट जो आई है 250 करोड़ की ऐसी संपत्ति का पता चला है, जो पूरी परिवार की है,  बाकी की जांच होगा तो पता चलेगा।

‘सोरेन राज परिवार है’

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को सोरेन परिवार ने केवल 33 संपत्तियों की ही जानकारी दी है, जबकि उनके पास 108 संपत्तियां हैं। इसके अलावा भी कई बेनामी संपत्तियां हैं जिनके बारे में उन्हें खुद जानकारी है। उन्होंने कहा कि, सोरेन राज परिवार है। इसके 108 संपत्तियों का साम्राज्य झारखंड के रांची, दुमका, धनबाद, बोकारो से लेकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ है। इनमें से 82 की जांच CBI कर चुकी है। रांची के मोरहाबादी इलाके में शायद ही कोई जमीन का टुकड़ा बचा होगा जिसे सोरेन परिवार ने अपने नाम नहीं करा लिया हो।

“संकट आने पर खेलने लगते हैं आदिवासी कार्ड” 

भाजपा कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब जब राज्य में हेमंत सोरेन की सरकार संकट में आई या उन्हें एहसास होता है, तो आदिवासी कार्ड खेलना शुरू कर देते हैं। खुद को आदिवासी बता कर तरह तरह के बयान देने लगते हैं।

खुद को बचाने के लिए देश के नामी वकीलों को हायर करते हैं

उन्होंने कहा कि मामला जब अदालत में पहुंचता है तो खुद को बचाने के लिए देश के नामी वकीलों को हायर करते हैं। क्या झारखंड के किसी आदिवासी की हैसियत है कि नामी वकील हायर कर सके। खुद को आदिवासी बताने वाले हेमंत सोरेन स्वयं सामंती चरित्र रखते हैं।

मात्र 33 संपत्तियों की जानकारी दी है

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि शिबू सोरेन के खिलाफ लोकपाल में दायर मामले की मैंने तहकीकात की तो देखकर मैं दंग रह गया। सोरेन परिवार की संपत्ति की जानकारी जांच एजेंसियों ने एकत्र की है। 108 ऐसी संपत्ति इस परिवार ने एकत्र कर रखा है। लेकिन मात्र 33 संपत्तियों की  ही चुनाव आयोग को जानकारी दी है। शेष संपत्ति की जानकारी छिपाई गई है। ऐसे में चुनाव आयोग शिबू सोरेन व हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द कर सकता है, क्योंकि ये जनप्रतिनिधत्व कानून का उल्लंघन है।उन्होंने कहा कि 10 – 12 सालों में शायद ही कोई आदिवासी इतनी दौलत इकट्ठा की  हो, उन्होंने कहा कि ये सत्ता में लूटने के लिए आए हैं।

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