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Karwa chauth: व्रत करने के पहले जानें शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री और पूजन-विधि

Karwa Chauth

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

भारत में सुहागिन महिलाओं का प्रमुख व्रत है करवा चौथ। हालांकि यह पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान में मनाया जाता है। यह प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। सुहागिन स्त्रियों का यह व्रत सूर्योदय से पहले से शुरू होता है और रात में चंद्र दर्शन के बाद संपूर्ण होता है। मुख्यतः पति की दीर्घायु की कामना एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। करवाचौथ में भी संकष्टी गणेश चतुर्थी की तरह दिन भर उपवास रखकर रात में चन्द्रमा को अर्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। महिलाएं इस दिन निराहार रहकर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं।

करवा चौथ के अनेक नाम

करवा चौथ के इस व्रत को करक चतुर्थी, दशरथ चतुर्थी, संकष्टि  चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन करवा माता के साथ मां पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा करने का भी विधान है। इस दिन सुहागिन स्त्रियों को इस व्रत का वर्ष भर इंतजार रहता है। इस दिन सुहाग से जुड़ी चीजों का काफी महत्व होता है इसलिए सुहागिन स्त्रियां करवा चौथ पर सोलह शृंगार करती हैं। पूजा और करवा चौथ व्रत की कथा सुनने के बाद रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के उपरांत व्रत का पारण करती हैं। अपने पति की समृद्धि और लंबी आयु की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

पूजन का शुभ मुहूर्त
  • कृष्ण पक्ष की चतुर्थी आरंभ- 24 अक्तूबर प्रातः 3:01 मिनट से
  • कृष्ण पक्ष की चतुर्थी समाप्त- 25 अक्तूबर प्रातः 5:43 मिनट तक।
  • चंद्रोदय का समय- 24 अक्तूबर को रात्रि 8:12 मिनट पर
पूजा सामग्री

चंदन, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मिठाई, गंगाजल, अक्षत (चावल), सिंदूर, मेहंदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी,  बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूं, शक्कर का बूरा, हल्दी, जल का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, चलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलवा और दक्षिणा (दान) के लिए पैसे आदि।

पूजा-विधि
  • सर्वप्रथम पूजन स्थल को स्वच्छ कर लें।
  • इस मंत्र का जाप करते हुए व्रत का संकल्प लें- ‘‘मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये कर्क चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये’
  • पूजन स्थल पर गेहूं से फलक बनाएं और उसके बाद चावल पीस कर करवा की तस्वीर बनाएं।
  • इसके बाद आठ पूरियों की अठवारी बनाकर उसके साथ हलवा या खीर बनाएं और पक्का भोजन तैयार करें।
  • अब आप पीले रंग की मिट्टी से गौरी की मूर्ति बनायें और साथ ही उनकी गोदे में गणेश जी को विराजित करें।
  • अब मां गौरी को चौकी पर स्थापित करें और लाल रंग की चुनरी ओढ़ा कर उन्हें शृंगार का सामान अर्पित करें।
  • गौरी मां के सामने जल भर कलश रखें और साथ ही टोंटीदार करवा भी रखें जिससे चंद्रमा को अर्घ्य दिया जा सके।
  • अब विधिपूर्वक गणेश गौरी की विधिपूर्वक पूजा करें और करवा चौथ की कथा सुनें।
  • कथा सुनने से पूर्व करवे पर रोली से एक सतिया बनाएं और करवे पर रोली से 13 बिन्दियां लगाएं।
  • कथा सुनते समय हाथ पर गेहूं या चावल के 13 दाने लेकर कथा सुनें।
  • पूजा करने के उपरांत चंद्रमा निकलते ही चंद्र दर्शन के उपरांत पति को छलनी से देखें।
  • इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर अपने व्रत का उद्यापन करें।

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