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यात्रिगण कृपया ध्यान दें! भारतीय रेलवे अभी विद्युत गृहों तक कोयला पहुंचाने में व्यस्त है, इसलिए थोड़े दिनों बाद यात्रा करें!

Attention travelers please! Indian Railways is currently busy in transporting coal to power stations.

24 मई तक यात्री ट्रेनों के 670 फेरे कैंसल

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

बिजली संकट इस समय पूरे देश की समस्या बनी हुई है। राज्य सरकारें इस संकट से निजात दिलाने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रही हैं। इस संकट से निजात दिलाने के लिए भारतीय रेलवे ने कमर कस लगी है, हालांकि भारतीय रेलवे के इस प्रयास के कारण ढेरों यात्रियों को तकलीफें होने वाली हैं। दरअसल, बिजली की भारी मांग और बिजली उत्पादन के बीच कोयले की कमी का तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। देश के अधिकांश ताप विद्युत गृहों में कोयले की कमी हो गयी है। ताप विद्युत गृहों तक समय पर कोयला पहुंच सके, इसके लिए भारतीय रेलवे ने योजना तैयार की है। लेकिन रेलवे को ऐसा करने के लिए तकरीबन 16 एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है। अलग-अलग जगहों पर स्थित बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने के लिए रेलवे को ऐसा करना पड़ा है। चूंकि बिजली संयंत्र देश में अलग-अलग जगहों पर स्थित हैं और कोयला रेक को अपनी यात्रा पूरी करने में तीन से चार दिन का समय लगता है। इस कारण रेलवे को यह कदम उठाना पड़ रहा है। कोयले का एक बड़ा हिस्सा पूर्वी क्षेत्र से भारत के उत्तरी, मध्य और पश्चिमी भागों में ले जाया जाता है।

रेल मंत्रालय ने यात्री ट्रेनों के करीब 670 फेरों को रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें 500 से अधिक लंबी दूरी की मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें भी हैं। रेलवे ने कोयले की रेक की दैनिक औसत लोडिंग 400 से ज्यादा कर दी है। जो पिछले 5 वर्षों में सबसे अधिक हैं। भारतीय रेलवे रोजाना 415 रेक मुहैया कराने करायेगा। प्रत्येक रेक में तकरीबन 3,500 टन कोयला ढोया जायेगा।

कोयला रेक लोडिंग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

आधिकारिक आरंकड़े के अनुसार रेलवे ने 2016-17 में रोजाना 269 कोयला रेक लोड किए। 2017-18 और 2018-19 में इसमें कोई विशेष अंतर नहीं आया था। रोजाना 267 रेक की इस दौरान ढुलाई की गयी। लेकिन 2019-20 में यह लोडिंग 347 रेक प्रति दिन हो गयी। वर्तमान में कोयले से लदी रेक की संख्या लगभग 400-405 प्रतिदिन हो गयी है।

यह भी पढ़ें: झारखंड की ही बिजली नहीं है गुल, पूरे देश का है हाल बेहाल, कई राज्यों की हालत बहुत बुरी

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