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Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary: पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी की चौथी पुण्यतिथि आज, राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के साथ PM मोदी ने ‘सदैव अटल’ पर दी श्रद्धांजलि

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी(Atal Bihari Vajpayee) की चौथी पुण्यतिथि (deathanniversary) पर उन्हें पूरा देश उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दे रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ और पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें सदैव अटल स्मृति जाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया गया।

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1957 में पहली बार बने सांसद

अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) पहली बार 1957 में सांसद चुने गए थे। साल 1950 के दशक की शुरुआत में आरएसएस की पत्रिका को चलाने के लिए वाजपेयी ने कानून की पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। बाद में उन्होंने आरएसएस में अपनी राजनीतिक जड़ें जमाईं और बीजेपी की उदारवादी आवाज बनकर उभरे। राजनीति में वाजपेयी की शुरुआत 1942-45 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में हुई थी। उन्होंने कम्युनिस्ट के रूप में शुरुआत की, लेकिन बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता के लिए साम्यवाद को छोड़ दिया।

तीन बार देश के पीएम बने

वाजपेयी देश के तीन बार प्रधानमंत्री रहे। वह पहली बार 1996 में 13 दिनों के लिए, दूसरी बार 1998 में 13 महीनों के लिए पीएम बने। 1999 में उन्होंने पीएम के रूप में पांच वर्षों का कार्यकाल पूरा किया। वाजपेयी ने लालकृष्ण आडवाणी के साथ 1980 में भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी। इसके बाद एक राजनीतिक पार्टी के रूप में भाजपा की यात्रा शुरू हुई। भाजपा को खड़ा करने में वाजपेयी और आडवाणी की सबसे ज्यादा योगदान रहा। अटल बिहारी वाजपेयी अपनी विचारधारा एवं सिद्धांतों के लिए जाने गए। उन्होंने सत्ता के लिए कभी समझौता नहीं किया। वाजपेयी प्रधानमंत्री के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे।

दिया यादगार भाषण

साल 1999 में एक वोट से अपनी सरकार गंवाने वाले वाजपेयी का संसद में दिया गया भाषण आज भी याद किया जाता है। पीएम पद से इस्तीफा देने से पहले उन्होंने संसद में भाषण दिया। भाजपा के इस दिवंगत नेता का यह भाषण आज भी याद किया जाता है। उन्होंने कहा था, ‘सत्ता का खेल तो चलेगा, सरकारें आएंगी और जाएंगी। पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, मगर ये देश रहना चाहिए, देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।’

नेहरू ने प्रधानमंत्री बनने की थी भविष्यवाणी
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी भले ही अलग राजनीतिक पार्टियों और विचाधारा से संबंध रखते हों, लेकिन उन दोनों के बीच कई ऐसी चीजें थी जो समान थी. दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों की ओर से प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता थे. आजादी के बाद नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने. इसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी भी पहली बार संसद में पहुंचे, तो उनका भाषण सुनकर नेहरू जी ने कहा था कि यह नौजवान नहीं, मैं भारत के भावी प्रधानमंत्री का भाषण सुन रहा हूं. नेहरू का ये बयान आज भी याद किया जाता है.

यूएन में पहली बार किसी नेता ने हिंदी में भाषण दिया

कविताओं और किताबों के शौकीन अटल बिहारी वाजपेयी ने 1977 की जनता सरकार में जब वह विदेश मंत्री थे, तो उन्होंने पूरी दुनिया को भारत की सादगी, सच्चाई, धर्मनिरपेक्षता और यहां के लोकतंत्र से अवगत कराया. यूएन में पहली बार किसी नेता ने हिंदी में भाषण दिया और इसका असर ऐसा कि सभी प्रतिनिधियों ने वाजपेयी के लिए खड़े होकर तालियां बजाई थी.

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