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Assembly Election 2022: किसका मनेगा वैलेंटाइन, कौन मनाएगा होरी, चुनाव आयोग ने जब छीन ली पिचकारी

Assembly Election

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

वैलेंटाइन डे के आसपास शुरू होकर होली के आसपास जब पांच राज्यों का विधानसभा चुनाव समाप्त होगा तब पता चल जायेगा कि जनता ने किसको प्यार दिया है और कौन अबीर-गुलाल खेल रहा है। चुनाव आयोग ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तिथियां घोषित कर सभी पार्टियों को रेस लगाने को तो कह दिया है, लेकिन उसने राजनीतिक दलों पर जो पाबंदियां लगा दी हैं, उससे कई पार्टियों के चेहरे अभी से बदरंग हो चुके हैं। जाहिर है, कोरोना महामारी के दौर में इस बार इन राज्यों में चुनाव प्रचार की वह सरगर्मी नहीं नजर आयेगी जो आमतौर पर चुनावों में होती है। सिर्फ सोशल मीडिया पर ही राजनीति गर्म होती रहेगी।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने जो तिथियां घोषित की हैं, वे बड़ी गौर करने वाली हैं। पांचों राज्यों को मिलाकर सात चरण में मतदान होने हैं। सभी चरण एक महीने (28 दिन) में समाप्त हो जायेंगे- 10 फरवरी से 10 मार्च। 10 मार्च को चुनाव के नतीजे आ जायेंगे। इस एक महीने में वैलेंटाइन भी है, फगुआ की भी धूम भी होगी और 10 मार्च आते-आते देश में होली की धूम भी मचनी शुरू हो जायेगी। फिर पता चलेगा, जनता ने किस पर प्यार लुटाया, कौन फगुआ गा रहा है और गले में माला पहले कौन अबीर-गुलाल उड़ा रहा है।

सियासत का दिखेगा नया रंग

यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव के लिए आयोग ने कई बड़े और कड़े कदम उठाये हैं। इन नये कदमों से इन राज्यों में सियासत का नया रूप दिखने की उम्मीद है। चुनाव आयोग ने जो फैसले किए हैं, इनमें सबसे बड़ा फैसला 15 जनवरी तक हर तरह की रैली और रोड शो पर रोक लगायी गयी है। कोरोना के दौर में लोगों की जान बचाने के लिए लिया गया सराहनीय कदम है। दूसरे बड़े फैसले में आयोग ने अपराधियों के चुनावी मैदान में उतरने पर जनता को जवाब देने को कहा है। हर पार्टी को बताना होगा कि किस आपराधिक छवि के शख्स को वह टिकट दे रही है और  क्यों दे रही है। ये बात जनता को अखबारों  और टीवी चैनलों के अलावा पार्टियां अपनी वेबसाइट पर भी बताएंगी। प्रलोभन देकर वोट को प्रभावित करने वालों पर कार्रवाई का खाका भी तय किया गया है। CVIGIL नाम का एप आयोग ने लॉन्च किया है। किसी भी तरह से आचार-संहिता के उल्लंघन के मामले में कोई भी वोटर वीडियो या फोटो खींचकर इस एप के जरिए आयोग से शिकायत कर सकेगा। CVIGIL एप वोटर के हाथ में बड़ा हथियार है।

अखिलेश यादव (विपक्ष) अभी से परेशान

चुनाव आयोग के राजनीतिक दलों पर अंकुश लगाने के लिए जो बड़े और कड़े फैसले किये हैं, उससे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव खासा के माथे पर बल पड़ गये हैं। अखिलेश यादव चुनाव आयोग से 15 जनवरी तक रैली पर रोक की शिकायत कर रहे हैं। सपा प्रमुख का कहना कि हम चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन चुनाव आयोग को डिजिटल स्पेस के लिए नियम बनाने चाहिए थे, क्योंकि सत्ताधारी दल इसका दुरुपयोग कर सकता है।

इतना ही नहीं सपा प्रमुख को चुनाव में हार का डर भी सताने लगा है। अखिलेश यादव इसलिए भी परेशान हैं कि फिलहाल वह किसी भी नुक्कड़ सभा व साइकिल रैली या बाइक रैली जैसी चीज नहीं कर सकेंगे। अखिलेश यादव चुनाव आयोग के डिजिटल प्रचार पर जोर से इसलिए भी चिंतित हैं क्योंकि भाजपा के पास इसका पहले से ही बहुत इन्फ्रास्ट्रक्चर है। इलेक्शन बॉन्ड भी उन्हें ही सबसे ज्यादा मिलते हैं। विपक्षी पार्टियों को भी कहीं न कहीं स्पेस मिलना चाहिए।

अखिलेश यादव की एक चिंता यह भी माना जा रहा है कि इत्र कारोबारियों के पास कथित तौर पर उनका रखा पैसा भी तो अब ‘लुट’ चुका है। तो अब वह किसके सहारे चुनाव-समर में उतरेंगे। यह चिंता अकेले सपा की ही नहीं है, दूसरी कई पार्टियों के साथ भी यही चिंता है। खैर, चुनाव की घोषणा हो चुकी है तो चुनावी समर में उतरना तो पड़ेगा ही, अब आपके पास चाहे जो भी हथियार हों।

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