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Aryan Khan को आज भी नहीं मिली बेल- कोर्ट ने दी एक और तारीख

Aryan Khan को आज भी नहीं मिली बेल

न्यूज़ डेस्क/ सामाचार प्लस झारखंड-बिहार

शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) के बेटे आर्यन खान (Aryan Khan), अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धमेचा की जमानत अर्जी 20 अक्टूबर को खारिज कर दी गई थी. बॉम्बे हाई कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर 26 अक्टूबर को सुनवाई कई घंटे तक चली. मामले पर कल फिर 2.30 बजे से सुनवाई होगी और समीर वानखेड़े की 5 लोगों की टीम कल दिल्ली से मुंबई जाएगी.

शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की जमानत अर्जी पर बाकी सुनवाई अब 27 अक्टूबर को होगी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए कल 2:30 बजे के बाद का समय दिया है। कोर्ट में आर्यन के वकील मुकुल रोहतगी अपनी दलीलें रख चुके हैं। उनके बाद अमित देसाई अरबाज मर्चेंट की जमानत के पक्ष में दलीले रख रहे थे। कोर्ट ने उनसे पूछा कि आपको कितना वक्त लगेगा। अमित देसाई ने जवाब दिया 45 मिनट वहीं एनसीबी की तरफ से अनिल सिंह ने 45 मिनट का वक्त मांगा। इस पर कोर्ट ने आगे की सुनवाई कल तक के लिए टाल दी।

चैट के आधार पर जेल में रखना गलत

आर्यन की तरफ से पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जिरह की। रोहतगी ने कोर्ट में कहा कि उनके क्लाइंट के पास कुछ नहीं मिला, न ही मेडिकल हुआ जिससे ये पता चले कि उन्होंने ड्रग्स ली थी। अरबाज मर्चेंट के के जूतों से 6 ग्राम चरस मिला है। मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता सिवाय वह मेरे क्लाइंट का दोस्त है। आर्यन के खिलाफ कुछ नहीं मिला है और उन्हें 3 अक्टूबर को अरेस्ट किया गया था। उन्होंने गिरफ्तारी को अवैध बताया। उन्होंने कहा कि चैट में क्या है ये साबित होना बाकी है। इनका केस से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बिनाह पर किसी को 20 दिन जेल में नहीं रखा जा सकता।

आर्यन का केस मामूली, पेरेंट्स की वजह से हुआ हाइलाइट

रोहतगी ने कहा, वॉट्सऐप चैट का क्रूज टर्मिनल से कोई लेना-देना नहीं है। ये पुरानी चैट का जिक्र कर रहे हैं, जिसके आधार पर कह रहे हैं, तुम्हारा कुछ लोगों से लेना-देना है। मैं जब बाहर रह रहा था तो इसको भी इंटरनैशनल लिंक बताया जा रहा है। ट्रायल कोर्ट तय करेगा कि इसको माना जाएगा या नहीं। आर्यन के वकील ने कहा कि ये लड़का बहुत छोटा सा मामला है। इसके पेरेंट्स की वजह से इतना हाइलाइट हो गया। रोहतगी ने कहा कि कानून भी कहता है कि अगर ड्रग्स का कन्जम्पशन भी मिले तो रिहैब ले जाना चाहिए। लोगों को जेल में डालना मंशा नहीं होनी चाहिए। सोशल जस्टिस मिनिस्ट्री भी सुधार की बात कर रही है।

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