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इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी, गाय भारत की संस्कृति; घोषित हो राष्ट्रीय पशु

गाय भारत की संस्कृति; घोषित हो राष्ट्रीय पशु

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि गो मांस खाना किसी का मौलिक अधिकार नहीं है। जीभ के स्वाद के लिए जीवन का अधिकार नहीं छीना जा सकता। बूढ़ी बीमार गाय भी कृषि के लिए उपयोगी है। इसकी हत्या की इजाजत देना ठीक नहीं। यदि गाय को मारने वाले को छोड़ा गया तो वह फिर अपराध करेगा। हाई कोर्ट ने वैदिक, पौराणिक, सांस्कृतिक महत्व व सामाजिक उपयोगिता को देखते हुए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा कि भारत में गाय को माता मानते हैं। यह हिंदुओं की आस्था का विषय है। आस्था पर चोट करने से देश कमजोर होता है।

गोरक्षा का काम केवल एक धर्म संप्रदाय का नहीं

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा का काम केवल एक धर्म संप्रदाय का नहीं है और न ही गायों को सिर्फ धार्मिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि गाय भारत की संस्कृति है और संस्कृति की रक्षा का कार्य देश के प्रत्येक नागरिक का है। कोर्ट ने कहा कि पूरे विश्व में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जहां सभी संप्रदायों के लोग रहते हैं। देश में पूजा पद्धति भले अलग-अलग हो, लेकिन सबकी सोच एक है। सभी एक-दूसरे के धर्म का आदर करते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने संभल के जावेद की जमानत अर्जी खारिज करते हुए दिया है। अर्जी पर शासकीय अधिवक्ता एसके पाल, एजीए मिथिलेश कुमार ने प्रतिवाद किया।

29 में से 24 राज्यों में गोवध प्रतिबंधित है

हाई कोर्ट ने कहा कि देश के 29 में से 24 राज्यों में गोवध प्रतिबंधित है। एक गाय जीवनकाल में 410 से 440 लोगों का भोजन जुटाती है। वहीं, गोमांस से केवल 80 लोगों का पेट भरता है। महाराजा रणजीत सिंह ने गो हत्या पर मृत्यु दंड देने का आदेश दिया था। यही नहीं, कई मुस्लिम और हिंदू राजाओं ने गोवध पर रोक लगाई थी। गाय का मल व मूत्र असाध्य रोगों में लाभकारी है। गाय की महिमा का वेदों-पुराणों में बखान किया गया है। रसखान ने कहा है कि ‘उन्हें जन्म मिले तो नंद के गायों के बीच मिले।’ गाय की चर्बी को लेकर मंगल पांडेय ने क्रांति की थी। संविधान में भी गो संरक्षण पर बल दिया गया है।

फोटो खिंचाकर गो संवर्धन करने वालों से सावधान रहें 

कोर्ट ने फैसले में टिप्पणी की है कि कुछ लोग गाय के साथ एक दो फोटो खिंचाकर सोचते हैं कि गो संवर्धन का काम हो गया। उनका गाय की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं होता है। उनका एकमात्र उद्देश्य गाय की सुरक्षा के नाम पर पैसे कमाना होता है।

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