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आजसू कार्यकर्ताओं ने निर्मल महतो की मनायी जयंती, शहीद का दर्जा दिये जाने की मांग भी उठायी

Nirmal Mahto

Nirmal Mahto की जयंती पर सैकड़ों की संख्या में आजसू कार्यकर्ताओं ने जेल चौक स्थित निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। साथ ही राज्य सरकार से Nirmal Mahto  को शहीद का दर्जा दिए जाने और उनकी मौत की जांच एनआईए से करवाने की मांग की। मौके पर आजसू के रांची महानगर अध्यक्ष ज्ञान सिन्हा ने कहा कि निर्मल महतो की सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब उन्हें शहीद का दर्जा मिलेगा, साथ ही मौके पर एक नारा देते हुए कहा कि ‘दादा हम शर्मिंदा है तेरे कातिल जिंदा है’।

बता दें, गरीबों, मजदूरो, किसानों के हक की आवाज उठाने वाले झामुमो के प्रखर नेता निर्मल महतो की हत्या 8 अगस्त 1987 को जमशेदपुर के बिष्टुपुर में नार्दर्न टाउन स्थित चमरिया गेस्ट हाउस के सामने गोली मारकर कर दी गयी थी। लोग निर्मल महतो को प्यार से निर्मल दा पुकारते थे।

झारखंड के प्रखर नेता थे निर्मल महतो

निर्मल महतो की पहचान इतनी भर नहीं है कि वह ऑल झारखणंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के संस्थापक और बाद में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख नेता रहे थे। उनकी असली पहचान यह है कि वह झारखंड अलग राज्य के आंदोलन के प्रमुख नेता रहे थे। हालांकि उनके जीवित रहते झारखंड अलग राज्य का उनका सपना पूरा नहीं हो पाया था, लेकिन दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ मिलकर झारखंड अलग राज्य की बुनियाद उन्होंने रख जरूर दी थी। निर्मल महतो की राजनीतिक प्रतिभा को झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने ही पहचाना था। उनके आन्दोलनकारी तेवर को देखते हुए ही शिबू सोरेन ने उन्हें झामुमो में शामिल किया था।

निर्मल महतो का जन्म 25 दिसंबर 1950 को झारखंड के सिंहभूम जिले उलिआन में हुआ था। शुरू से ही उनकी राजनीतिक में रुचि रही थी। उनकी राजनीति की बुनियाद में सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन और झारखंड अलग राज्य का सपना था। झारखंड के सबसे बड़े छात्र संगठन आजसू का जन्म इन्हीं के अथक प्रयास से हुआ था। झारखंड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन इनके आक्रामक छवि से काफी प्रभावित थे। शिबू सोरेन ने इनकी आंदोलनकारी छवि को देखते हुए निर्मल महतो को 1980 ई में पार्टी में शामिल किया था।

निर्मल महतो की राजनीतिक उपलब्धियां
  • 8 सितम्बर 1980 में पश्चिमी सिंहभूम जिला के बड गांव में आदिम जनजाति आंदोलन में आंदोलनकारी भूमिका निभाई।
  • 1984 ई में रांची सिंदरी से लोकसभा चुनाव झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट से लड़ा, हालांकि वह चुनाव हार गये।
  • 1985 ई में बिहार विधानसभा ईचागढ़ से एमएलए का चुनाव लड़ा, इसमें भी उन्हें कामयाबी नहीं मिली।
  • – अप्रैल 1986 में झारखंड मुक्ति मोर्चा का अध्यक्ष बनाये गये।
  • निर्मल महतो ने शोषण के विरुद्ध एवं गरीबों, मजदूरों, किसानों के हक के लिए आवाज उठायी और जमीनी स्तर पर युवाओं को जोड़ने का काम किया।
  • झारखंड अलग राज्य के लिए आंदोलन ने जब रफ्तार पकड़ी तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी व तत्कालीन भारत के गृहमंत्री बूटा सिंह की कई बार आजसू से वार्ता हुई। आखिरकार झारखंड स्वायत्तशाषी परिषद, फिर झारखंड अलग राज्य का गठन हुआ, लेकिन यह देखने के लिए निर्मल महतो जीवित नहीं रहे।

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Nirmal Mahto

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