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अजय मिश्रा ने रच दी अपने इस्तीफे की पृष्ठभूमि, टेनी पर भाजपा हाईकमान की नजर ‘टेढ़ी’!

अजय मिश्रा ने रच दी अपने इस्तीफे की पृष्ठभूमि

न्यूज डेस्क/समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

अपने पद के मद में केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने जो किया वह किसी से छुपा नहीं है। लखीमपुर-खीरी में किसानों की ‘हत्या’ के मामले में विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ तो है ही, दूसरी ओर टेनी खुद ही अपने इस्तीफे की पृष्ठभूमि तैयार करने में लगे रहे। लखीमपुर-खीरी की घटना के बाद पिता-पुत्र की जोड़ी ने काफी गुलाटियां खायीं। लगा, उनकी हरकतों पर भाजपा हाईकमान चुप्पी साधे है, लेकिन ऐसा नहीं है। अब तो उसने इस मामले को सहन नहीं करने का मन बना लिया है। इसे रविवार को उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के वक्तव्य से भी समझना होगा। स्वतंत्र देव ने कहा कि ‘नेता बनने का मतलब गाड़ी चढ़ाने का लाइसेंस मिल जाना नहीं है’। प्रदेश अध्यक्ष के इस कथन को हाई कमान के संदेश का संकेत समझा जा सकता है।

लखीमपुर-खीरी की घटना के बाद जो भी बयानबाजी हो रही थी वह केन्द्रीय राज्य मंत्री की ओर से हो रही थी, जो अपने बेटे को ‘पाक-साफ’ बताने के लिए दलीलों पर दलीलें दिये जा रहे थे। इसके बाद रविवार को जब एसआईटी ऑफिस में मंत्रिपुत्र आशीष मिश्रा से पूछताछ चल रही थी तब पित्रा-पुत्र के समर्थक बाहर हंगामा कर रहे थे। उनके समर्थकों ने जिस तरह धरना-प्रदर्शन किया वह गले के नीचे उतरने वाली बात नहीं है।

इशारों में स्वतंत्र देव ने दे दिये संकेत

रविवार को प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट कहा- ‘नेतागीरी का मतलब फॉर्च्यूनर से कुचलना नहीं होता है।’ ऐसा नहीं ही भाजपा हाईकमान आंखें बंद किये हुए है, उस तक जो संदेश पहुंचे हैं, वह मंत्री की लापरवाही व अनदेखी के प्रमाण ही दे रहे थे। घटना में एक पिता हावी दिखा, संविधान का रक्षक नहीं। संविधान की कसम खाकर संवैधानिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि का पहला कर्तव्य बनता है कि वह पहले संविधान की रक्षा करे। पिता बनने के लिए पद का त्याग तो करना ही होगा। संविधान का संरक्षक होने के बाद भी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री खुफिया इनपुट को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। उनकी सारी कोशिश ध्यान भटकाने वाले साक्ष्य जुटाने में लगी रही। जब ये साक्ष्य इकट्ठा हो गये, तब बेटा पहुंच गया थाने। मगर एक बात को नहीं भूलना चाहिए कि मंत्री व उनके बेटे का सारा ताना बाना घटना स्थल पर उपस्थित नहीं रहने के लिए बुना गया। मगर वे अपनी उस गाड़ी को भूल गये जिससे भीड़ को ठोंका गया था।

सोशल मीडिया पर जो वीडियो जारी हुए हैं, यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि किसानों की भीड़ में जानबूझकर कर गाड़ी डाली गयी।वीडियो जारी होने तक तो  हाईकमान मौन रहा, लेकिन बेटे आशीष मिश्रा की जांच एजेंसियों से पूछताछ के समय टेनी व उनके बेटे के समर्थकों द्वारा किये गये प्रदर्शन ने हाई कमान को नज़रें टेढ़ी करने पर मजबूर कर दिया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी जतायी नाराजगी

हाईकमान की टेढ़ी भ्रकुटि से मिले संकेत के बाद पहले प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव और उसके बाद पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी नाराजगी जता दी है। नड्डा ने कहा, अनुशासनहीनता के खिलाफ पार्टी किसी से भी समझौता नहीं करेगी। जो भी दोषी होगा उसे जरूर सजा मिलेगी।

टेनी को मंत्रिमंडल से हटाये जाने की मांग कांग्रेस. आप, सपा व की ओर से लगाकर की जा रही है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के विरोध में लगातार यूपी सरकार पर हमलावर हैं। महाराष्ट्र में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र उर्फ टैनी की मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी को लेकर सोमवार को बंद का आह्वान किया गया।

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