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तीनों नये कृषि कानून वापस: पीएम ने मांगी क्षमा, कहा- कृषि कानूनों को मैं समझा नहीं सका

Agriculture Bills

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

प्रकाश पर्व पर किसानों के लिए बड़ी खबर आयी है। केन्द्र सरकार ने नये तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्‍ट्र को संबोधित करते हुए यह बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार आगामी संसद सत्र में तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लेगी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को गुरु नानक देव जी के पवित्र प्रकाश पर्व की बधाई दी।

अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि मैं क्षमा चाहता हूं कि तीन कृषि कानून को मैं समझा नहीं सका। साथ ही पीएम ने कहा कि देश के कोने-कोने में कोटि-कोटि किसानों ने, अनेक किसान संगठनों ने, इसका स्वागत किया, समर्थन किया, मैं आज उन सभी का बहुत आभारी हूं।

पांच दशकों में किसानों की चुनौतियों को नजदीक से देखा – पीएम

पीएम ने नये कृषि कानूनों को लाये जाने की वजह बताते हुए कहा कि बरसों से यह मांग देश के किसान, देश के कृषि विशेषज्ञ, देश के किसान संगठन लगातार कर रहे थे। इस पर संसद में चर्चा हुई, मंथन हुआ और ये कानून लाये गये। अपने पांच दशक के जीवन में किसानों की चुनौतियों को बहुत करीब से देखा है। 2014 में सत्ता में आने के बाद हमने कृषि विकास, किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। देश के छोटे किसानों की चुनौतियों को दूर करने के लिए, हमने बीज, बीमा, बाजार और बचत, इन सभी पर चौतरफा काम किया। सरकार ने अच्छी क्वालिटी के बीज के साथ ही किसानों को नीम कोटेड यूरिया, सॉयल हेल्थ कार्ड, माइक्रो इरिगेशन जैसी सुविधाओं से भी जोड़ा। किसानों को उनकी मेहनत के बदले उपज की सही कीमत मिले, इसके लिए भी अनेक कदम उठाये गये।

क्या हैं तीन कृषि कानून जिन्हें वापस लेने का पीएम ने फैसला लिया?

पहला कानून: कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 है। इस कानून के मुताबिक, किसान अपनी मनचाही जगह पर अपनी फसल को बेचने के स्वतंत्र हैं। यहां तक कि किसान दूसरे राज्य में भी अपनी फसल को बेच सकते हैं। इसके अलावा मार्केटिंग और ट्रांस्पोर्टिशन पर भी खर्च कम करने की बात कही गई है.

दूसरा कानून: इस बिल में सरकार ने कृषि करारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रोविजन किया गया है। यह बिल कृषि पैदावारों की बिक्री, फार्म सर्विसेज, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और एक्सपोर्टर्स के साथ किसानों को जुड़ने के लिए मजबूत करता है। कांट्रेक्टेड किसानों को क्वॉलिटी वाले बीज की सप्लाई यकीनी करना, तकनीकी मदद और फसल की निगरानी, कर्ज की सहूलत और फसल बीमा की सहूलत मुहैया कराई गई है।

तीसरा कानून: इस बिल में अनाज, दाल, तिलहन, खाने वाला तेल, आलू-प्‍याज को जरूरी चीजो की फहरिस्त से हटाने का प्रोविजन है. माना जा रहा था कि बिल के प्रोविजन से किसानों को सही कीमत मिल सकेगी, क्योंकि बाजार में मुकाबला बढ़ेगा।

यह भी पढ़ें: ‘आपके अधिकार-आपकी सरकार आपके द्वार’ पर हेमंत सरकार रेस, 15000 आवेदनों का त्वरित निष्पादन

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