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Agnipath: हिंसा के लिए युवाओं की अगर सेना में जगह नहीं, तो ‘आग’ लगाने वाले नेताओं को भी दिखानी चाहिए उनकी जगह

Agnipath: Leaders who set 'fire' should also be shown their place

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

आज विपक्षी पार्टियों के साथ कांग्रेस भी ‘अग्निपथ’ योजना के विरोध में सड़कों पर है और राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से मुलाकात करने वाली है कि यह योजना युवाओं के लिए सही नहीं है, इसे वापस लिया जाना चाहिए। कांग्रेस आज जो सोच रख रही है वह सही है, या कांग्रेस के राज में ही इस योजना के बारे में 1989 को सोचा गया था, वह सही है। सेना से युवाओं को जोड़ने की पहल कोई नयी बात नहीं है। एनसीसी और एनएसएस के द्वारा सेना की नयी पौध तैयार करने की सोच काफी पुरानी। इसी का विस्तृत और परिष्कृत रूप ही है ‘अग्निपथ’। अगर इस योजना को 1989 में ही (तब राजीव गांधी के प्रधानमंत्री थे) मूर्त्त रूप दे दिया गया होता तब भी इसी तरह की व्यवस्था होती, जैसी कि आज है। यह भी हो सकता है कि आज केन्द्र सरकार युवाओं को जो लाभ दे रही है, उस समय वह लाभ इससे भी कम होता।

‘अग्निपथ’ योजना का एक मर्म न तो युवा समझ पा रहे हैं और न ही आंख पर पट्टी बांधे राजनीतिक दल। ‘अग्निपथ’ द्वारा की जाने वाली बहाली की संख्या पर भी गौर कर लें तब भी इसका विरोध करने का कोई औचित्य नहीं रह जायेगा। पहले-दूसरे साल तीनों सेनाओं में 46,500 युवाओं की भर्ती की जानी है। इनमें से 25 प्रतिशत यानी 11,625 अग्निवीरों की सेवा को विस्तार मिलेगा। युवा यह क्यों नहीं मान रहे कि यह बहाली 11 हजार युवाओं के लिए है? 11 हजार युवाओं की बहाली किस रूप में कम है? पूरे देश के युवाओं को तो सेना में बहाल किया नहीं जा सकता? चार साल में जो लाभ मिल रहा है, अगर हमारे लाइफ प्लान में फिट बैठता तो उसका लाभ उठा लेना बुद्धिमानी है। अगर हमारे लाइफ प्लान को यह सूट नहीं करता या हमारा एम्बीशन ज्यादा हाई है तो फिर हमारा किसी ने हाथ पकड़ा भी नहीं है कि आपको सेना में जाना ही है।

सब पर होनी चाहिए कार्रवाई

‘अग्निपथ’ के नाम पर देश में आग लगाने का काम सिर्फ युवा ही नहीं कर रहे, उन्हें बरगलाकर सड़कों पर लाने वाले नेता भी आग लगाने का काम कर रहें। सेना ने यह घोषणा की है कि हिंसा में शामिल होने वालों के लिए सेना में कोई जगह नहीं है। पूरे देश में प्रदर्शनकारियों को चिह्नित किया जा रहा है, उन पर एफआईआर की जा रही है, जाहिर है, ऐसे युवाओं का सेना में भविष्य अंधकारमय हो जायेगा। काश, ऐसा हिंसा फैलाने में योगदान देने वाले नेताओं के साथ भी ऐसा होता। लेकिन दुर्भाग्य है कि इनके जायज-नाजायज का समर्थन देने वालों की संख्या असंख्य है, यह बात ये नेता अच्छी तरह जानते हैं, और इन्हीं के कंधों पर सवार होकर अपनी राजनीति चलाते हैं। आज इस मुद्दे को लेकर ये राजनीति की दाल गला रहे है, कल दूसरे मुद्दे को उठा कर गलायेंगे। सोचना हमें हैं कि ये नेता हमारा कितना हित चाहते हैं, कितना इसकी कारगुजारियों से हमारे अहित हो रहा है। आखिरकार हमारा भविष्य हमें ही संवारना है।

यह भी पढ़ें: Agnipath Scheme: सेना की दो टूक, अग्निपथ स्कीम किसी हालत में नहीं होगी वापस, तोड़फोड़ या आगजनी करने पर FIR हुई तो नहीं मिलेगा मौका

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